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मंत्री को लिखी चिट्ठी में निपट गए एसपी, सीएम बघेल ने पता चलते ही कर दिया तबादला

बस्तर के सुकमा में एसपी जितेंद्र शुक्ला ने सरकार के मंत्री कवासी लखमा को पत्र लिखना भारी पड़ गया। इस मामले की शिकायत मिलते ही सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए एसपी का तबादला आदेश जारी कर दिया है।

मंत्री को लिखी चिट्ठी में निपट गए एसपी, सीएम बघेल ने पता चलते ही कर दिया तबादला

बस्तर के सुकमा में एसपी जितेंद्र शुक्ला ने सरकार के मंत्री कवासी लखमा को पत्र लिखना भारी पड़ गया। इस मामले की शिकायत मिलते ही सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए एसपी का तबादला आदेश जारी कर दिया है।

खास बात ये है कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा इस तरह अफसर मंत्री को पत्र नहीं लिख सकते। पत्र लिखा इसलिए हटाया गया।

सुकमा में पदस्थ रहे एसपी जितेंद्र शुक्ला को वहां से स्थानांतरित करके पुलिस मुख्यालय भेजा गया है। सरकार ने यह आदेश 7 मार्च को जारी किया था। श्री शुक्ला के स्थान पर डीएस मरावी को एसपी बनाया गया है।
सरकार ने जब यह आदेश जारी किया था, तभी इसे लेकर हैरानी जताई जा रही थी कि आखिर क्या वजह है कि एसपी को हटाया गया, लेकिन इसके पीछे वजह क्या है ये साफ नहीं हुआ था।

ये वजह है पत्र लिखने की
सूत्रों के अनुसार मंत्री कवासी लखमा ने जो बस्तर संभाग के नेता भी है, ने अपने संभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी को स्थानांतरित करने का आदेश एसपी जितेंद्र शुक्ला को दिया था। इसके जवाब में आदेश का पालन करने की जगह अधिकारी ने अपनी ओर से पत्र लिखकर मंत्री को जवाब दे दिया।
माना जा रहा है कि उनका यह कदम ही सरकार को नागवार गुजरा। जितेंद्र शुक्ला का मामला है, उसे लेकर माना जा रहा है कि उन्होंने एक तरह से मंत्री कवासी लखमा के निर्देश को मानने में विलंब किया। यही नहीं, पत्र लिखकर भी उन्होंने शासकीय नियमावली को दरकिनार करने की कोशिश की।

एसपी ने भी कहा-अप्रत्याशित
इसी बीच एसपी जितेंद्र शुक्ला ने सोशल मीडिया के माध्यम से तबादला आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आदेश को अप्रत्याशित बताया है। उन्होंने लिखा है कि सुकमा में रहते हुए अलग तरह का रोमांच था। यहां की चुनौतियां छत्तीसगढ़ कैडर के सभी पुलिस अफसरों को रोमांचित करती हैं।
जब ये बात सामने आई थी, तभी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संकेत में यह जिक्र किया था कि अफसर ने मंत्री को पत्र लिखा है। जानकारों की मानें तो सरकार ने अफसर के इस कदम को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए उन्हें स्थानांतरित करने का कदम उठाया।
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