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स्मार्ट मीटर का लगेगा किराया, कंपनी तय करेगी किसे देना है प्रीपेड और पोस्टपैड

प्रदेश के 50 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं के घरों के साथ सारे सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में मीटर बदले जाएंगे।

स्मार्ट मीटर का लगेगा किराया, कंपनी तय करेगी किसे देना है प्रीपेड और पोस्टपैड

प्रदेश के 50 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं के घरों के साथ सारे सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में मीटर बदले जाएंगे।

केंद्र सरकार के निर्देशों के मुताबिक तीन साल में देश के हर राज्य में सारे मीटर बदले जाने हैं। यहां जो स्मार्ट मीटर लगेंगे, कंपनी उनका उपभोक्ताओं से किराया लेगी। इसी के साथ कंपनी ही तय करेगी कि किस वर्ग के उपभोक्ता को प्रीपैड मीटर देने हैं और किस वर्ग को पोस्टपैड।

केंद्र सरकार ने बिजली चोरी रोकने के साथ रीडिंग पर होने वाले खर्च को बचाने के लिए पूरे देश के हर बिजली उपभोक्ता के कनेक्शन में स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला किया है। इस स्मार्ट मीटर में कई तरह की सुविधाएं हैं। इसमें से एक सबसे बड़ी सुविधा प्रीपैड की भी है। जो उपभोक्ता लगातार बिल जमा नहीं करते, ऐसे उपभोक्ताओ के मीटर को कंपनी प्रीपैड कर सकेगी।
इस योजना का प्रारंभ छत्तीसगढ़ में भी पावर कंपनी को करना है। इसके लिए कंपनी ने पहले चरण में रायपुर, दुर्ग, रायगढ़, कोरबा, राजनादगांव और अंबिकापुर का डीपीआर भी तैयार कर लिया है।
यह है खासियत
स्मार्ट मीटर लगने से इसकी रीडिंग पावर कंपनी के दफ्तर में बैठकर ही हो जाएगी। मीटरों की रीडिंग के लिए रीडरों को भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में पावर कंपनी का हर माह रीडिंग पर होने वाला करीब दो से ढाई करोड़ का खर्च बच जाएगा।
कंपनी तो अब कैमरे वाली मशीनों से रीडिंग करा रही है, इसमें ज्यादा खर्च आ रहा है। अभी सिर्फ इसका प्रारंभ चार शहरों में हुआ है। स्मार्ट मीटर लगने से इसकी जरूरत नहीं होगी।
पावर कंपनी ने ऐसे ही स्मार्ट मीटर जिनमें सिम लगे हैं, इन्हें पहले उद्योगों में लगाया है, लेकिन ये मीटर उतने स्मार्ट नहीं हैं, जितने नए स्मार्ट मीटर होंगे। नए मीटरों में कई तरह की सुविधाएं हैं। इन मीटरों से दफ्तर में बैठकर कंपनी के अधिकारी ये भी देख सकेंगे कि उपभोक्ता कितनी खपत कर रहे हैं।
मीटरों से कोई छेड़छाड़ होने पर उसका भी पता चल जाएगा। इसी के साथ किसी भी उपभोक्ता का पावर कट भी कंट्रोल रूम से हो जाएगा।

कंपनी तय करेगी किराया
कंपनी जो स्मार्ट मीटर लगाएगी वाे ज्यादा महंगे नहीं हैं। इन मीटरों की कीमत करीब ढाई हजार रुपए है, लेकिन इन्हें ऑनलाइन करने की जो सुविधा लगेगी, उसके नेटवर्क पर अलग से खर्च होगा। इसका आंकलन फिलहाल नहीं किया गया है। कंपनी मीटर लगाने के बाद इसका कीमत उपभोक्ताओं से न लेकर किराया तय करेगी। किराया कितना होगा, इसका अभी फैसला नहीं किया गया है।
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