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वन्यप्राणी के करोडो के अंग जब्त, कई दशको से चल रहा राजधानी में कारोबार

वन विभाग ने बुधवार को गोलबाजार के गुप्ता फर्म के दो दुकान से करोड़ों रुपए के वन्यजीवों के अंग जब्त की है। वन विभाग ने यह कार्रवाई पीपुल्स फॉर एनिमल की दिल्ली से आए टीम की निशानदेही पर की है।

वन्यप्राणी के करोडो के अंग जब्त, कई दशको से चल रहा राजधानी में कारोबार
वन विभाग ने बुधवार को गोलबाजार के गुप्ता फर्म के दो दुकान से करोड़ों रुपए के वन्यजीवों के अंग जब्त की है। वन विभाग ने यह कार्रवाई पीपुल्स फॉर एनिमल की दिल्ली से आए टीम की निशानदेही पर की है।
बताया जा रहा है वन्यजीवों के अंगों को तंत्र-मंत्र के इस्तेमाल के लिए दोनों दुकानों में बिक्री के लिए रखे थे। जब्त वन्यजीवों के अंग शेड्यूल-1 और शेड्यूल-2 की श्रेणी के हैं। डीएफओ की मानें तो इन दोनों शेड्यूल के अंगों की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसमें अधिकतम सात वर्ष की सजा के साथ भारी भरकम जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
रायपुर डीएफओ उत्तमकुमार गुप्ता के मुताबिक गोलबाजार स्थित रत्नेश गुप्ता और दुर्गा प्रसाद शिवकुमार गुप्ता के दुकान में छापा मारकर वन्यजीवों के प्रतिबंधित अंग बिक्री कर रहे थे।
पीपुल्स फॉर एनिमल ने रायपुर के गोलबाजार इलाके में बड़े पैमाने पर शेड्यूल-1 और शेड्यूल-2 के वन्य जीवों के प्रतिबंधित अंग बेचे जाने की सूचना दी थी। इसी सूचना के आधार पर गोलबाजार में जड़ी बुटी बेचने वाले इन दोनों दुकानों में छापामार कार्रवाई की गई। दोनों दुकान संचालकों को वन विभाग की टीम ने पूछताछ करने रायपुर मंडल ऑफिस में लेकर आई है।

इन वन्यजीवों के अंग जब्त की गई

डीएफओ ने जानकारी दी है कि दोनों दुकान संचालकों के फर्म से शेड्यूल-1 के वन्यजीव लॉर्ज बेंगाल मॉनिटर लिजार्ड (गोहिया हत्था) के प्रजनन अंग के भारी मात्रा में पार्ट जब्त की गई है। इसके अलावा सी-फेन (इंद्रजाल), जेकॉल की नाभी (सियार) और शेड्यूल-2 के वन्यजीव जंगल कैट की पित्त की थैली विभाग के जांच टीम ने जब्त की है।बताया जा रहा है दोनों दुकाने पिछले कई दशकों से संचालित है.

अधिकारी कर रहे थे खातिरदारी

वन विभाग की टीम वन्यजीव के अंगों की अवैध बिक्री करने वाले दोनों दुकानदारों को पूछताछ के लिए जिला वन मंडल के कायार्लय में लेकर आई थी। उस समय विभागीय अधिकारी और कर्मचारी दोनों दुकानदारों की जमकर खातिरदारी कर रहे थे। पीपुल्स फॉर एनिमल के एक्टिविस्ट ने जब विरोध दर्ज कराया, तब दुकानदारों की खातिरदारी करने वाले अधिकारी, कर्मचारियों सहित दोनों दुकानदारों ने एक्टिविस्ट के साथ मीडिया के साथ बदसलूकी की। इसकी जानकारी जब डीएफओ को लगी, तब उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को फटकार लगाई।

पहली बार हुई कार्रवाई

जानकारों की मानें, तो इस तरह की कार्रवाई पहली बार हुई है। वह कार्रवाई भी वन विभाग ने अपने स्तर पर करने के बजाय पीपुल्स फॉर एनिमल की सूचना पर की है।

सूचना मिल रही थी

पीपल्स फॉर एनिमल, के एक्टिविस्ट दीपक कुमार ने बताया कि हमें लंबे समय से रायपुर में प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंग बेचे जाने की सूचना मिल रही थी। हमने अपने लोकल एक्टिविस्टों की मदद से इसकी जानकारी जुटाने के बाद वन विभाग को कार्रवाई करने यहां आकर दबाव बनाया, तब यह कार्रवाई हुई है।

प्रतिबंधित है

रायपुर वन मंडल के डीएफओ उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि जब्त वन्यजीवों के अंगों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस मामले में पड़ताल करने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। जब्त वन्यजीवों के अंग लोग कथित तौर पर तंत्र-मंत्र के लिए करते हैं।
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