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मां का आवेदन देख पसीजा जज का मन, पहली पेशी में बच्चे को किया मां के हवाले

मां का आवेदन देखकर फैमिली कोर्ट प्रिंसिपल जज एएल जोशी का मन पसीजा और आवेदन लगने के बाद पहली ही सुनवाई में नाबालिग पुत्र को सीधे आवेदिका मां के हवाले कर दिया।

मां का आवेदन देख पसीजा जज का मन, पहली पेशी में बच्चे को किया मां के हवाले

मां का आवेदन देखकर फैमिली कोर्ट प्रिंसिपल जज एएल जोशी का मन पसीजा और आवेदन लगने के बाद पहली ही सुनवाई में नाबालिग पुत्र को सीधे आवेदिका मां के हवाले कर दिया। सामान्यतया कोर्ट की शरण में जाने पर तारीख ही तारीख होती है, लेकिन रायपुर कोर्ट के इतिहास में संभवतया पहली बार ऐसा हुआ है कि पहली ही सुनवाई के दिन फैसला आ गया।

प्रकरण के अनुसार लाखेनगर निवासी प्रियंका वर्मा (28) का विवाह उरला अभनपुर निवासी विनय वर्मा (31) से 14 फरवरी 2011 को हुआ था। दोनों के बीच सुखमय दांपत्य जीवन के बीच 1 जनवरी 2012 को पुत्र ख्वाहिस वर्मा का जन्म हुआ।
गृहस्थ जीवन आगे बढ़ने के बाद दोनों के बीच कुछ मनमुटाव हुआ और एक समय ऐसा भी आया कि दोनों का आपसी सामंजस्य नहीं हो पाया। आखिरकार 14 जुलाई 2018 से दोनों अलग हो गए। तब से अब तक अलग रह रहे हैं।
इस बीच 6 साल का बेटा विनय के पास ही रह गया। बच्चे को प्रियंका ने अपने पास रखने की बात ससुराल वालों के बीच रखी, तो बात नहीं बनी। पति और ससुराल वालों ने दो टूक कहा दिया कि जाओ जो कर लो, बच्चा तो तुम्हें नहीं मिलेगा। भयभीत प्रियंका ने वाद मित्र (अधिवक्ता) राकेश से सलाह ली।
इसके बाद उसका मनोबल जागा और उसने एक आवेदन फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज एएल जोशी की कोर्ट में लगाया कि वह बच्चे को अपनी कस्टडी में रखना चाहती है। आवेदन पंजीकृत होने के बाद सुनवाई की पहली तारीख 17 जनवरी निर्धारित हुई। कोर्ट में जज ने दोनों को बहुत समझाया और आखिरकार बच्चे को मां के पास भेजने का आदेश जारी किया।
मां ने कहा वह परवरिश के लिए सक्षम
कोर्ट में प्रियंका ने बताया कि वह पढ़ी-लिखी है। अपने बच्चे को साथ रखना चाहती है। वह हर परस्थिति में बच्चे के भरण-पोषण, शिक्षा-दीक्षा और चिकित्सकीय खर्च के लिए सक्षम है। हालांकि बच्चे के पिता ने पहले तो आपत्ति की, लेकिन बाद में जज और काउंसिलर की समझाइश पर वह बच्चे को भेजने के लिए राजी हो गया।
सुलह की संभावना
प्रियंका ने बताया कि वह पहले बहुत ही डरी हुई थी कि कहीं कोर्ट उसे बच्चे से दूर न कर दे, लेकिन कोर्ट ने फरियाद सुनी। काउंसिलर की समझाइश पर मेरे पति ने कहा वह तलाक नहीं चाहता, लेकिन फिलहाल उसके घर की हालत भी ठीक नहीं है। उन्होंने मुझसे तलाक देने के संबंध में नहीं कहा। इससे दोनों के बीच गृहस्थ जीवन में सुलह की संभावना जागी। जज की समझाइश और फैसले से मैं और मेरे परिवार वाले बहुत खुश हैं। आज मेरा बेटा मेरे पास है।
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