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जानिए मोटरसाइकिल से कहाँ हुई खुदाई, आदेश से पहले कैसे चालू हुआ काम

प्रदेश के वन विभाग में करोड़ो के बोटानिकल गार्डन घोटाले में नया खुलासा हुआ है। बोटानिकल गार्डन में तालाब खुदाई के नाम पर हुए इस घोटाले में वन विभाग के अफसरों ने बिना किसी बजट और प्रशासकीय स्वीकृति के ही करोड़ो का काम करा डाला।

जानिए मोटरसाइकिल से कहाँ हुई खुदाई, आदेश से पहले कैसे चालू हुआ काम
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प्रदेश के वन विभाग में करोड़ो के बोटानिकल गार्डन घोटाले में नया खुलासा हुआ है। बोटानिकल गार्डन में तालाब खुदाई के नाम पर हुए इस घोटाले में वन विभाग के अफसरों ने बिना किसी बजट और प्रशासकीय स्वीकृति के ही करोड़ो का काम करा डाला। यही नहीं तालाब खुदाई के लिए अधिकारियों ने बाइक जैसी गाड़ियों का भी इस्तेमाल किया है.

सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजो से पता चला है कि वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने एक पत्र के माध्यम से 4 मई को प्रस्ताव दिया जिसमे बोटानिकल गार्डन के तालाब क्रमांक 3 एवम 4 में तालाब के खुदाई गहरीकरण के लिए बजट और प्रशासकीय स्वीकृति की मांग की थी ।जिसे वन विभाग के मुख्यालय ने एक माह बाद 3 जून को बजट स्वीकृत किया गया। लेकिन वन विभाग ने बिना किसी बजट स्वीकृति और अनुमति के ही इस काम को मार्च महीने में ही शुरू कर दिया।
आलम ये था कि प्रस्ताव भेजने से पहले ही वन विभाग में लाखो रूपए के बिल स्वीकृत हो गए । दस्तेवेजो के मुताबिक जिस काम की स्वीकृति जून माह मिली उसके बिल अप्रेल महीने में ही लग गए और भुगतान के लिए उनकी प्रकिर्या भी शुरू कर दी गई। तालाब खुदाई के लिए जिन फर्म्स और ठेकेदारों के बिल है वे भी प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होते है । अलग अलग फर्मो के ज्यादातर बिलो पर एक ही हेंडराइटिंग है।
सूचना के अधिकार के तहत निकाले गए दस्तावेजों को प्रस्तुत करते हुए जनता कांग्रेस के प्रवक्ता संजीव अग्रवाल ने खुलासा किया था कि वन विभाग ने करोड़ो रूपये की लागत से बने बोटानिकल गार्डन में तालाब खुदाई का काम बन किसी निविदा के मनमाने ढंग से करा लिया था।
यही नही तालाब खुदाई के दौरान निकली मुरुम को भी जिन वाहनों से परिवहन होना बताया गया वे सभी वाहन भी फर्जी मिले कुछ वाहन वन विभाग के अफसरों की गाड़ियां निकली तो जांच करने पर कुछ मोटर सायकिल निकली।
संजीव अग्रवाल ने हरिभूमि को बताया कि ये वन विभाग की मनमानी और जंगल राज का एक छोटा सा नमूना मात्र है। जहां बिना किसी स्वीकृति के करोड़ो रूपये के काम शुरू हो जाते है। फर्जी बिल लग जाते है और महज खानापूर्ती के लिए आधी अधूरी विभागीय जांच होती है लेकिन जांच में किन वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर मनमाने ढंग से ये काम बिना निविदा के किया गया। उनके नाम का खुलासा अधिकारी और विभागे मंत्री नहीं करते है.
श्री अग्रवाल ने कहा कि आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग में इस मामले की शिकायत पहले ही कर चुके है हाई कोर्ट में भी जनहित याचिका के माध्यम से इस मामले में कार्यवाही की मांग की है। लेकिन बोटानिकल गार्डन घोटाले में इन नये तथ्यों की शिकायत भी ईओडब्ल्यू से कर रहे है साथ ही हाईकोर्ट को भी इन नए तथ्यों से अवगत कराएंगे। ताकि करोडो के वारे न्यारे करने वाले बेनकाब हो और सीखचों के पीछे जा सके.

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