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तांत्रिक विधान से हुआ त्रिकोणीय यंत्र कुंड, चतुर्रस हवन कुंड में दी आहुतियां

अमावस्या की रात्रि कलकलाती पानी से खारुन नदी का तट, जहां श्मशान काली हवन पूजन में भक्तों ने हवन में मां काली के अघोर मंत्रों से आहुतियां दीं।

तांत्रिक विधान से हुआ त्रिकोणीय यंत्र कुंड, चतुर्रस हवन कुंड में दी आहुतियां

अमावस्या की रात्रि कलकलाती पानी से खारुन नदी का तट, जहां श्मशान काली हवन पूजन में भक्तों ने हवन में मां काली के अघोर मंत्रों से आहुतियां दीं। यह हवन आत्म कल्याण, सर्वजनहिताय और सर्वजन सुखाय के उद्देश्य से गुरुवार अमावश्या की रात्रि को महादेेव घाट स्थित श्मशानघाट पर मां श्मशान काली पूजन का आयोजन किया गया, जहां सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने परिवार कल्याण की कामना से हवन में आहुतियां डालीं। अमावस्या की रात विभिन्न तांत्रिक विधियों से सबके कल्याण के उद्देश्य से मां श्मशान काली को नमन करते हुए श्यामा तंत्र पीठिका द्वारा पूजन का आयोजन किया गया।

गुरुवार सुबह 10 से शुक्रवार सुबह 5 बजे तक चला पूजन
गुरुवार सुबह 10 बजे से इस पूजन की शुरुआत हुई और शुक्रवार सुबह 5 बजे तक विभिन्न पूजन व हवन हुए। इसमें सुबह 10 बजे अज्ञात मृतकों की आत्मा की शांति के लिए संपूर्ण श्राद्धकर्म व नारायण नागबलि पूजन हुआ, जिसके बाद शाम 6 बजे से वेदी निर्माण, क्षेत्रपाल, अष्टभैरव, क्षेत्रकीलन पूजन व दीपदान हुआ। इसके बाद रात 8 बजे मां श्मशान काली विग्रह व विशेष घट स्थापना व तांत्रिक विधान से पूजन शुरू हुआ। रात 9 बजे त्रिकोणीय हवन कुंड में अग्नि स्थापना हुई, जिसके बाद रात 10 बजे विशेष द्रव्यों द्वारा मां श्मशान काली के 6 सिंहासनों के लिए कुंड में आहुतियां देकर सर्पाया पूजन सुबह 5 बजे तक चलता रहा।
ढाई क्विंटल सांकला और वनौषधियों की दी गई आहुति
पूजन स्थल पर त्रिकोणीय यंत्र कुंड में ढाई क्विंटल सांकला और वनौषधियों से पूरी रात्रि आहुति दी जाती रही। इसमें विभिन्न प्रकार की वनौषधियों की आहुतियां दी गईं, जिसमें से आधी वनौषधि बस्तर से व आधी अमरकंटक से लाई गई थीं। कुंड में आहुतियां रात्रि 9 से सुबह 5 बजे तक अविरल दी जाती रहीं।

10 बाटल शराब, ढाई मन मिर्च व अन्य सामग्रियों से दी आहुति
इसी अवसर पर मां श्मशान काली की अराधना करते हुए चतुर्रस हवन किया गया, जहां ढाई मन सूखी लाल मिर्च से आहुति दी गई, लेकिन किसी भी प्रकार की खरास किसी को भी नहीं हुई। इसके साथ इस हवन कुंड में 10 बाटल शराब, 25 किलो नमक, 15 किलो हल्दी, सात प्रकार की दाल, जिसमें प्रत्येक दाल 5 किलो की मात्रा में रही। काली मिर्च, 3 किलो पीली सरसों, 5 किलो सरसों का तेल व अन्य विशेष सामग्री से मां श्मशान काली की अघोर मंत्रों से आहुति दी गई। मां के 6 सिंंहासनों के लिए अलग-अलग आहुतियां दी गईं।
ये रहे उपस्थित
इस पूजन के दौरान श्यामा तंत्र पीठिका के अध्यक्ष चरण सिंह सोनवानी, दिल्ली से पहुंचे तंत्राचार्य शशिमोहन बहल व उनके 35 शिष्यों द्वारा श्मशानेश्वरी साधना की जा रही है। साथ ही मां श्मशान काली की विग्रह की वाम मार्गी पद्धति से सांगो पांग पूजन के लिए मां तारापीठ व मां कामाख्या के विद्वान तांत्रिक भी इस पूजन में मौजूद रहे। इन हवन पूजन के बाद सुबह 5 बजे आरती पुष्पांजलि व विग्रह विसर्जन किया गया।
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