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छत्तीसगढ़ में हर साल बढ़ रहे रोड एक्सीडेंट, सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने रोक लगाने दिए निर्देश

छत्तीसगढ़ में साल दर साल सड़क हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन हादसों की संख्या बीते तीन चार साल में लगातार बढ़ती जा रही है। हालत ये है कि पिछले साल राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 4 हजार 592 लोगों की मौत हुई, 13 हजार लोग घायल हुए।

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में साल दर साल सड़क हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन हादसों की संख्या बीते तीन चार साल में लगातार बढ़ती जा रही है। हालत ये है कि पिछले साल राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 4 हजार 592 लोगों की मौत हुई, 13 हजार लोग घायल हुए। इससे पहले के वर्षों में हर साल एक्सीडेंट का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के अधीन गठित सड़क सुरक्षा समिति नई दिल्ली ने राज्य सरकार को निर्देश देकर सड़क पर होने वाले हादसों में कमी लाने संबंधी कई निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार से कहा गया है कि वह 30 नवंबर तक सभी निर्देशों का पालन करे।

सड़क सुरक्षा समिति ने छत्तीसगढ़ की स्थिति का जायजा लेने के बाद पाया कि राज्य में 2015 से लेकर 2018 तक सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। यह वृद्धि 1.5,5.8 से बढ़कर 12 प्रतिशत तक बढ़ी है। यह स्थिति 2017 तक थी। इसके बाद 2018 में सड़क दुर्घटनाएं इन वर्षों के मुकाबले अधिक होकर 16ण्6 प्रतिशत बढ़ी। जनवरी 2019 के बाद भी यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। जांच समित ने पाया कि छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जहांं सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है।

राज्य सरकार मिले ये निर्देश

बताया गया है कि कमेटी ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सड़क हादसों को नियंत्रित करने जिला स्तर पर व्यवस्था बनाएं। समिति ने पाया कि राज्य सरकार ने एक्सीडेंट कम करने के लिए कोई रणनीति नहीं अपनाई है। यह रणनीति बनाना राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण कार्य है, राज्य सरकार को ये निर्देश भी दिया गया है कि हादसों को रोकन के लिए ट्रामा सेंटर, आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर बनाया जाए। हादसे होने वाली जगहों, ब्लैक स्पॉट की पहचान करें तथा वहां एंबुलेस की सुविधा उपलब्ध कराए। कमेटी ने ये भी देख कि राष्ट्रीय राजमार्ग व राज्य मार्ग पर 51 प्रतिशत मौत 2017 में हुई है। 2018 में 53 प्रतिशत तथा 2017 में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क हादसों में 68.2 प्रतिशत मौतें हुई हैं। सबसे अधिक हादसे दोपहिया वाहनों से हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग तथा राज्य मार्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां हादसे हुए हैं, वहां स्ट्रीट लाइट नहीं है। रिहायशी क्षेत्रों में जहां स्ट्रीट लाइट होना चाहिए, वहां भी नहीं है। इन सारी खामियों को 30 नवंबर तक सुधारने का निर्देश दिया गया है।

सुधार के निर्देश मिले हैं

पुलिस मुख्यालय की यातायात इकाई के एआईजी संजय शर्मा ने कहा है कि प्रदेश में सड़क हादसों में कमी करने तथा लोगों को जागरूक करने अभियान चलाने कि निर्देश मिले हैं। ऐसे स्थान जहां सबसे अधिक हादसे होते हैं, उन ब्लैक स्पॉट की पहचान की जाएगी। हादसे रोड इंजीनियरिंग की खामी से भी होते हैंए इसे सुधारा जाएगा। इस संबंध में मिले निर्देशों का पालन 30 नवंबर तक किया जाना है।

नगरीय प्रशासन ने भी मांगी है रिपोर्ट

इस मामले को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग के संचालन ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय संचालकों को सुप्रीम कोर्ट कमेटी के निर्देशों से अवगत कराया है। साथ ही कहा है कि निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट 10 नवंबर तक भेजी जाए, ताकि कमेटी को 30 नवंबर तक पालन प्रतिवेदन भेजा जा सके।

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