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लॉकडाउन के बीच गांवों में रोजगार से राहत, मनरेगा श्रमिकों को 1.14 करोड़ रुपए का मजदूरी भुगतान

कोविड-19 से निपटने देशव्यापी लॉक-डाउन के दौरान गांवों में संचालित मनरेगा कार्यों से ग्रामीण काफी राहत महसूस कर रहे हैं। लॉक-डाउन की अवधि में काम पर कहीं बाहर न जा पाने की स्थिति में मनरेगा कार्यों से उन्हें गांव में ही रोजगार मिल रहा है।

लॉकडाउन के बीच गांवों में रोजगार से राहत, मनरेगा श्रमिकों को 1.14 करोड़ रुपए का मजदूरी भुगतान
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रायपुर. कोविड-19 से निपटने देशव्यापी लॉक-डाउन के दौरान गांवों में संचालित मनरेगा कार्यों से ग्रामीण काफी राहत महसूस कर रहे हैं। लॉक-डाउन की अवधि में काम पर कहीं बाहर न जा पाने की स्थिति में मनरेगा कार्यों से उन्हें गांव में ही रोजगार मिल रहा है। मनरेगा की मजदूरी से वे इस कठिन दौर में भी अपने आप को सुविधाजनक स्थिति में पा रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति भी मिल रही है। अकेले रायगढ़ जिले में 1 अप्रेल के बाद से श्रमिकों को एक करोड़ 14 लाख रूपए से अधिक की मजदूरी का भुगतान किया गया है।

राज्य और केन्द्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार अभी रायगढ़ जिले के नौ विकासखण्डों के 473 ग्राम पंचायतों में एक हजार 512 मनरेगा कार्य संचालित हो रहे हैं। इनमें 13 हजार 684 मजदूरों को काम मिला हुआ है। जिले के शेष 292 ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य शुरू करने की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। जल्दी ही वहां के ग्रामीणों को भी गांव में ही रोजगार मिल जाएगा।

शासन के निर्देशों के अनुरूप अभी व्यक्तिमूलक और आजीविका संवर्धन के ऐसे काम मंजूर किए जा रहे हैं जिनमें कम से कम श्रमिकों की आवश्यकता हो। इसके तहत हितग्राहियों की निजी भूमि पर डबरी निर्माण, कुंआ निर्माण, बकरी व गाय शेड, वृक्षारोपण और बाड़ी निर्माण जैसे कार्य लिए जा रहे हैं। सिंचाई विस्तार, जल संचय और जल संरक्षण के कार्य भी प्राथमिकता से स्वीकृत किए जा रहे हैं। इन सभी कार्यों के दौरान कार्यस्थल पर शारीरिक दूरी और स्वच्छता के मानकों का पालन किया जा रहा है। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने मजदूर हाथ धुलाई, मुंह-चेहरा ढंकने और मास्क जैसे उपाय भी नियमित अपना रहे हैं।

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