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मध्यान्ह भोजन के सूखा राशन वितरण में राशन की मात्रा और गुणवत्ता की होगी रैंडम जांच

जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। जारी निर्देश में कहा गया है कि निर्धारित मात्रा से कम एवं खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता खराव होने की स्थिति में जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर अवकाश अवधि में स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिए जाने का निर्णय लिया गया है। शासन के निर्देशानुसार जिले के स्कूलों में 3 अप्रैल से सूखा राशन का वितरण किया जा रहा है। संचालक लोक शिक्षण जितेन्द्र शुक्ला ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सूखा राशन वितरण में यह सुनिश्चित करने को कहा है कि राज्य शासन द्वारा तय की गई निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता के अनुसार ही इसका वितरण किया जाए। इसके वजन एवं दाल, चावल की गुणवत्ता देखने के लिए रैण्डम जांच भी की जाए।

जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। जारी निर्देश में कहा गया है कि निर्धारित मात्रा से कम एवं खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता खराव होने की स्थिति में जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन के निर्देशानुसार मध्यान्ह भोजन मार्च एवं अप्रैल 2020 के लिए 40 दिन का सूखा दाल और चावल बच्चों के पालकों को स्कूल से प्रदाय किया जा रहा है। प्राथमिक शाला के प्रत्येक बच्चे को 4 किलोग्राम चावल और 800 ग्राम दाल तथा उच्चतर माध्यमिक शाला के प्रत्येक बच्चे को 6 किलोग्राम चावल और 1200 ग्राम दाल दिया जा रहा है।

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