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रमन सिंह सहित इन नेताओं ने झीरम घाटी मामले में गवाह बनने किया था आवेदन, एसआईटी ने किया खारीज

छत्तीसगढ़ में सत्ता पलट होने के साथ ही प्रदेश में बहुचर्चित झीरम घाटी मामला एक बार फिर चर्चे में है। मामले को लेकर सरकार ने एसआईटी का गठन किया है

रमन सिंह सहित इन नेताओं ने झीरम घाटी मामले में गवाह बनने किया था आवेदन, एसआईटी ने किया खारीज
छत्तीसगढ़ में सत्ता पलट होने के साथ ही प्रदेश में बहुचर्चित झीरम घाटी मामला एक बार फिर चर्चे में है। मामले को लेकर सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। वहीं, पूर्व सीएम रमन सिंह, तत्कालीन गृहमंत्री सहित अन्य तत्कालिन मंत्रियों के गवाह बनने के आवेदन को आयोग ने खारीज कर दिया है। आयोग ने इन सभी नेताओं के आवेदन को यह बोलकर खारीज कर दिया है कि 67 लोगों की गवाही हो चुकी है। इस बीच आवेदन न देकर गवाही होने के बाद आवेदन प्रस्तुत किया गया। झीरम आयोग ने कहा कि कांग्रेस 15 दिनों के भीतर लिखित में अपना तर्क प्रस्तुत करें।
4 अगस्त को कांग्रेस ने आयोग के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि प्रदेश के तत्कालीन सीएम डॉ.रमन सिंह, ननकीराम कंवर, केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और अन्य बड़े चेहरे को गवाही में बुलाया जाए। आवेदन पर तर्क प्रस्तुत कर कहा गया कि सिक्ख दंगे और नानावटी आयोग में भी बड़े मंत्रियों को गवाही में बुलाया गया था। इसलिए उन्हें भी बुलाया जा सकता है। कांग्रेस के आवेदन पर आयोग ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को आयोग ने आवेदन पर फैसला सुना दिया जिसमे कांग्रेस के आवेदन को आयोग ने निरस्त कर दिया है।
राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए जस्टिस प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में झीरम आयोग का गठन किया गया था। आयोग में अब तक 41 स्वतंत्र व्यक्तियों और 21 पुलिस व सीआरपीएफ के अधिकारियों का प्रतिपरीक्षण हो चुका है।
दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद 4 अगस्त को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा के न्यायिक आयोग ने फैसला सुरक्षित रखा था। कांग्रेस ने जस्टिस कृष्ण आयोग की रिपोर्ट, नानावटी आयोग और सिक्ख दंगे के आयोग का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री, गृहमंत्री को बयान के लिए बुलाने की मांग की थी।
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