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राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ी सिनेमा के भीष्म पितामह भैया लाल हेड़ाउ का निधन

अमिताभ बच्चन और अमरीश पुरी की मिमिक्री करने के लिए प्रख्यात थे। पढ़िए पूरी खबर-

राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ी सिनेमा के भीष्म पितामह भैया लाल हेड़ाउ का निधन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रख्यात गायक और वरिष्ठ अभिनेता भैया लाल हेड़ाउ का कल रात निधन हो गया। पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे भैया लाल हेड़ाउ ने 87 साल की उम्र में आखरी सांस ली। भैयालाल हेड़ाउ अमिताभ बच्चन और अमरीश पुरी की मिमिक्री करने के लिए प्रख्यात थे।

उनका अंतिम संस्कार कल सोमवार सुबह 10:00 बजे मठपारा स्थित मुक्तिधाम में किया जाएगा।

बता दें साल 1971 में उन्होंने लोगों को मंच के शिल्पी दाऊ रामचंद्र देशमुख की 'चंदैनी गोंदा' और 'कारी' में अभिनेता और गायक की दोहरी भूमिका निभाकर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी।

वे लोक संस्कृतिक मंच अनुराग धारा से भी लंबे समय तक जुड़े रहे उनके गाए प्रमुख छत्तीसगढ़ी गीतों में छन्नर-छन्नर पैरी बाजे, खन्नन-खन्नन चूड़ी, हम तो रे संगवारी, कबीरा झन आंजबे टुरी काजर आंखी म, छूट जाहि वो परान शामिल हैं।

फिल्म निर्देशक सत्यजीत राय के निर्देशन में 1981 में उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित टेलीफिल्म सद्गति में भी अभिनय कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। इस फिल्म में ओम पुरी, स्मिता पाटिल, मोहन आगाशे, गीता सिद्धार्थ और उषा मिश्रा ने भी अभिनय किया था।

छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत ने किया दुःख व्यक्त

संजय बतरा – वे मेरे दिल के बहुत करीब थे। बचपन में उनका कार्यक्रम देखने के लिए हम लोग लोग घर से दरी लेकर जाते थे और उन्हें सामने से देखने भर का अनुभव अपने आप में अलौकिक था। ये मेरा दुर्भाग्य रहा कि मैं कभी उनके साथ स्क्रीन नहीं शेयर कर पाया। राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ी सिनेमा के भीष्म पितामह लाल हेड़ाउ का निधन

वे असल मायने में छत्तीसगढ़ी सिनेमा के भीष्म पितामह थे।

राज वर्मा – भैया लाल हेड़ाउ वरिष्ठ अभिनेता और गायक थे। उनके स्वर्गवास होने का मुझे दुख है, मैंने उनके साथ 1 फिल्म की थी- 'तरी-हरी नाना' इस फिल्म में मैंने उन्हें डायरेक्ट भी किया था, लेकिन इस दौरान मुझे उनसे निर्देशन की बारीकियां सीखने को मिली, इसके अलावा मैं उनकी आवाज का कायल था।

दिलीप नामपल्लिवार – वे अमरीश पुरी की आवाज हुबहू निकालते थे। उनका निधन छत्तीसगढ़ी सिनेमा के लिए भारी क्षति है।

रॉकी दासवानी - भैयालाल हेड़ाऊ एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ साथ गायक और उद्घोषक भी थे। उनके पिता वासुदेव हेड़ाऊ भी एक बहुत अच्छे कलाकार थे। घर के वातावरण में ही कलाकारी थी। बचपन से वो गीत गाते थे । भैयालाल हेड़ाऊ 1971 में चंदैनी गोंदा के साथ जुड़े और बाद में सोनहा बिहान, नवा विहान, अनुराग धारा छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंडली में गाते रहे, अभिनय करते रहे।

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