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इस गांव में राजीव-सोनिया ने खाए थे कंदमूल, 33 साल बाद भी विकास की राह ताक रहे ग्रामीण

प्रदेश की जनता को 15 साल बाद सत्ता में काबिज हुई कांग्रेस सरकार से काफी उम्मीद है। उन्हें लगता है पिछली सरकार ने जो 15 सालों में नहीं किया वह अब नई सरकार पूरा करेगी। गरियांबद के बीहड़ जंगल में बसे कुल्हाड़ीघाट के ग्रामीण भी कुछ ऐसी सोच पाले हुए हैं।

इस गांव में राजीव-सोनिया ने खाए थे कंदमूल, 33 साल बाद भी विकास की राह ताक रहे ग्रामीण

प्रदेश की जनता को 15 साल बाद सत्ता में काबिज हुई कांग्रेस सरकार से काफी उम्मीद है। उन्हें लगता है पिछली सरकार ने जो 15 सालों में नहीं किया वह अब नई सरकार पूरा करेगी। गरियांबद के बीहड़ जंगल में बसे कुल्हाड़ीघाट के ग्रामीण भी कुछ ऐसी सोच पाले हुए हैं।

गांव की हालात हद से ज्यादा बदत्तर है। एक ओर यहां जहां ग्रामीणों के लिए रोजगार बड़ी समस्या बनी हुई है वहीं डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल में ताला लटका हुआ है। ग्रामीण बताते है काम न मिलने के कारण गांव से 135 लोग पलायन कर चुके हैं। गांव में स्कूल है मगर पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं। गांव तक सड़क तो बनी लेकिन रास्ते में पड़ने वाले 4 पुल नहीं बने जिसके आज भी गांव के लोगों केा ब्लॉक मुख्यालय तक जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बताते है। 17 जुलाई 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी अपनी पत्नी सोनिया गांधी के साथ कुल्हाड़ीघाट आए थे। उस दौरान उन्होंने आदिवासियों की हालत देखकर इस गांव को गोद लेने की बात भी की थी। उसके बादइ जब तक कांग्रेस की सरकार थी गांव में कुछ बुनियादी काम तो हुए मगर गांव का विकास राह नहीं पकड़ पाया। 33 साल बाद आज भी गांव की हालत जस की तस बनी हुई है।
गांव की 95 वर्षीय महिला बल्दी बाई को आज भी वो दिन याद है जब राजीव गांधी पत्नी संग उनके गांव आए थे उसकी झोपड़ी में बैठकर कंदमूल खाये थे। बल्दी कहती हैं उस दिन को मैं कभी भूल नहीं सकती। अब एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 95 वर्षीय बल्दी बाई सहित गांव के दूसरे लोगों को एक बार फिर यहाँ की तस्वीर और तकदीर बदलने की उम्मीद जगी है। हालांकि कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही कांग्रेसियों ने एक बार फिर कुल्हाड़ीघाट के बारे में चर्चा करना शुरु कर दी है।
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