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किसानों का हक़ मार रही सरकार, धान खरीदी नीति पर कांग्रेस ने उठाये सवाल

राज्य मंत्रि परिषद द्वारा वर्ष 2018-19 के लिए धान खरीदी नीति का निर्धारण करने के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह पर किसानों से एक बार फिर वायदा खिलाफी करने का आरोप लगाया है।

किसानों का हक़ मार रही सरकार, धान खरीदी नीति पर कांग्रेस ने उठाये सवाल

राज्य मंत्रि परिषद द्वारा वर्ष 2018-19 के लिए धान खरीदी नीति का निर्धारण करने के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह पर किसानों से एक बार फिर वायदा खिलाफी करने का आरोप लगाया है। प्रदेश के पूर्व खाद्य राज्य मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह को उनके द्वारा किसानों का एक एक दाना धान खरीदने, 21 सौ रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा 3 सौ रूपये प्रति क्विंटल बोनस देने के वायदे की याद दिलाते हुए घोषित धान खरीदी नीति को किसानों के साथ पुनः छलावा बताया है।

राज्य मंत्रीपरिषद की बैठक के बाद राज्य के किसानों से समर्थन मूल्य पर 1 नवम्बर से धान खरीदी करने की घोषणा की गई है। धान खरीदी नीति को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अकबर ने आज प्रेस कान्फ्रेंस लेकर आंकड़ों के आधार पर मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह को कटघरे में खड़ा कर उन पर किसानों का हक मारने का आरोप जड़ा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 के लिए घोषित धान खरीदी नीति अनुसार प्रदेश के 1333 सहकारी समितियों के लगभग 2000 उपार्जन केन्द्रों में नकद व लिंकिंग में 1 नवम्बर 2018 से किसानों से धान खरीदी की जाएगी जो 31 जनवरी 2019 तक चलेगी।
किसानों से धान खरीदी की अधिकतम सीमा प्रति क्विंटल 15 क्विंटल तय की गई है। धान उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी केन्द्रों में लगभग चैदह लाख किसानों का पंजीयन होता है जबकि राज्य में कुल 32 लाख 55 हजार किसान निवास करते है।

किसान औने-पौने में धान बेचने मजबूर

मोहम्मद अकबर ने कहा कि किसानों के द्वारा उत्पादित धान का एक-एक दाना खरीदने का वायदा करते समय मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने यह नहीं कहा था कि सिर्फ पंजीकृत किसानों से धान की खरीदी की जाएगी।
पुनः सत्ता में आने के बाद चुनाव के पूर्व की गई अपनी घोषणा के विपरीत नये नये आदेशों के जरिए डा. रमन सिंह किसानों को उनके अधिकारों से वंचित करते है। रमन सरकार की धान खरीदी नीति से पीड़ित किसान अपनी धान की फसल को मंडियों में व्यापारियों व कोचियों को औने-पौने दाम में बेचने पर मजबूर होते हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर इसकी क्षतिपूर्ति कौन करेगा ।

बोनस देने की बात क्यों भूल गए रमन

कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह द्वारा विधानसभा चुनाव 2013 के पूर्व किसानों से सहकारी समितियों में धान बेचने पर प्रति क्विंटल 300 रूपये बोनस दिये जाने के वायदे की याद दिलाई। कांग्रेस नेता 2018-19 के लिए घोषित धान खरीदी नीति में इसका उल्लेख नहीं होने पर मुख्यमंत्री की आलोचना की। धान खरीदी की नीति बनाते समय मुख्यमंत्री ने क्यों इसका ध्यान नहीं रखा।
पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री को उनकी इस घोषणा की भी याद दिलाई जिसमें डाॅ. रमन ने किसानों को धान का समर्थन मूल्य 21 सौ रूपये प्रति क्विंटल देने का वायदा किया था। धान खरीदी नीति में धान का समर्थन मूल्य 21 सौ रूपये घोषित नहीं करने पर मोहम्मद अकबर ने सवाल उठाते हुआ कहा कि जो समर्थन मूल्य घोषित किया गया है,
उसके अनुसार अच्छे किस्म के धान का समर्थन मूल्य 1750 रूपये व ए ग्रेड धान के लिए 1790 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य दिया जाएगा, जो की प्रति क्विंटल 2100 रूपये समर्थन मूल्य और 300 रूपये प्रति क्विंटल बोनस इस तरह कुल 2400 रूपये प्रति क्विंटल से बहुत कम है।

पीएम को प्रेषित पत्र से पोल खुली

मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री की नीयत को खराब बताते हुए डाॅ. रमन सिंह द्वारा 12 सितम्बर 2014 को प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र की प्रति भी जारी की जिसमें छत्तीसगढ़ के किसानों को 2100 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य दिये जाने की कोई पहल नहीं की गई है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र में किसानों को 300 रूपये प्रति क्विंटल बोनस देने का उल्लेख किया गया था।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा था कि छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में किसानों का जीवन स्तर सुधारने व कृषि उत्पाद बढ़ाने के लिए अनेक उपाय किए हैं, उनमें से एक किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी पर 300 रूपये प्रति क्विंटल बोनस भी है। प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र में डाॅ. रमन सिंह ने यह स्वीकार किया है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से मतदाताओं को घोषणा पत्र के माध्यम से किए गए वायदों में 300 रूपये प्रति क्विंटल बोनस के भुगतान का वायदा प्रमुख रूप से शामिल है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा 21 सौ रूपये समर्थन मूल्य के लिए पहल न करना तथा 3 सौ रूपये बोनस देने के वायदे को स्वीकारने के बावजूद 2018-19 के लिए इसकी घोषणा न करना किसानों के साथ धोखा है।

किसानों को प्रति एकड़ 9000/- बोनस नहीं मिला

दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात रखते हुए खाद्य विभाग के मंत्री रहे मोहम्मद अकबर ने रमन सरकार को प्रदेश की किसानों की कर्जदार बताया। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने किसानों को 2 वर्ष का धान का बोनस नहीं दिया। प्रति एकड़ के हिसाब से 15 क्विंटल धान खरीदी होगी जिसका 4500/- रूपये प्रति वर्ष का बोनस नहीं दिया गया। इस तरह प्रति एकड़ दो वर्ष का कुल 9000/- रूपये बोनस किसानों को नहीं मिला।

पांच वर्षों में कभी भी नहीं दिया 21 सौ रूपये समर्थन मूल्य

पूर्व मंत्री ने बताया कि गत वर्ष धान का समर्थन मूल्य 1550 रूपये व 1590 रूपये प्रति क्विंटल था। वायदे के अनुसार किसानों को 2100 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य दिया जाना था। 1550 एवं 1590 का औसत मूल्य 1570 रूपये प्रति क्विंटल होता है। 2100 रूपये मूल्य में 1570 रूपये की राशि घटाने पर अन्तर की राशि 530 रूपये प्रति क्विंटल होता है।
15 क्विंटल खरीदी पर यह राशि 7950 रूपये एक एकड़ के धान में एक वर्ष के लिए होती है। पांच वर्षों में यह राशि बढ़कर 39750 रूपये हो जाती है। इस तरह एक एकड़ के कास्तकार को 9000 बोनस 39750 अन्तर की राशि कुल 48750 रूपये मिलना चाहिए जो उनको अब तक नहीं दिया गया है। चॅूकि भाजपा सरकार अब 2018 के विधानसभा चुनाव में जाने वाली है, इसलिए जिस जिस किसानों की जितनी एकड़ की जितनी राशि सरकार को घोषणा अनुसार देना बाकी है
उसका भुगतान तत्काल मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह को करना चाहिए। जिस तरह शासकीय विभागों में भुगतान बकाया नहीं होने का नो ड्यूस प्रमाण पत्र की परंपरा है उसका पालन कर रमन सरकार भी नो-ड्यूस का प्रमाण पत्र किसानों से प्राप्त करना चाहिए।
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