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रायपुर रेल मंडल छुक-छुक ट्रेनों के इंजन को स्टेशन व रेलवे कार्यालयों के बाहर हैरिटेज के रूप में करेगा प्रदर्शित

आधुनिकता की पटरी पर फर्राटा से दौड़ रहा रेलवे अपनी 123 साल पुरानी आधा दर्जन छुक-छुक ट्रेनों को अब ऐतिहासिक विरासत के रूप में संजाेकर रखेगा। इसके लिए रायपुर रेल मंडल इन ट्रेनों के इंजन को स्टेशन व रेलवे कार्यालयों के बाहर हैरिटेज के रूप में प्रर्दशित करेगा। इससे जहां आम लोगों को छुक-छुक ट्रेनों के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती रहेगी, वहीं ट्रेनों के हैरिटेज के रूप में प्रदर्शित करने से रायपुर रेल मंडल कार्यालयों व स्टेशन की शोभा भी बढ़ेगी।

रायपुर रेल मंडल छुक-छुक ट्रेनों के इंजन को स्टेशन व रेलवे कार्यालयों के बाहर हैरिटेज के रूप में करेगा प्रदर्शित

रापपुर. आधुनिकता की पटरी पर फर्राटा से दौड़ रहा रेलवे अपनी 123 साल पुरानी आधा दर्जन छुक-छुक ट्रेनों को अब ऐतिहासिक विरासत के रूप में संजाेकर रखेगा। इसके लिए रायपुर रेल मंडल इन ट्रेनों के इंजन को स्टेशन व रेलवे कार्यालयों के बाहर हैरिटेज के रूप में प्रर्दशित करेगा। इससे जहां आम लोगों को छुक-छुक ट्रेनों के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती रहेगी, वहीं ट्रेनों के हैरिटेज के रूप में प्रदर्शित करने से रायपुर रेल मंडल कार्यालयों व स्टेशन की शोभा भी बढ़ेगी।

रायपुर रेल मंडल के प्रबंधक ने बताया कि रायपुर रेल मंडल के पास 6 छोटी लाइन की ट्रेनें हैं, जो 4 महीना पहले तक रायपुर-राजिम-धमतरी-अभनपुर छोटी लाइन पर दौड़ रही थीं। अब इन्हें हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। वर्तमान में गाड़ियां रायपुर रेल मंडल के रेलवे वर्कशॉप पर खड़ी हुई हैं। वर्कशॉप में खड़े-खड़े गाड़ियां कबाड़ में बदलें, इससे पहले इसका सदुपयोग करने रायपुर रेल मंडल ने इन गाड़ियों के इंजनों व कलपुर्जों को संग्रहित कर हैरिटेज के रूप में प्रदर्शित करने का निणर्य लिया है। इससे जहां छुक-छुक ट्रेनों का इतिहास सुरक्षित हो सकेगा, वहीं आने वाली पीढ़ी भी रेलवे की छुक-छुक ट्रेनों व छोटी लाइन के रोमांचक दौर को जान सकेगी।

छाेटी रेल लाइन का आगाज और अंत

रायपुर-धमतरी छोटी रेल लाइन 1901 में 45.74 मील लंबी धमतरी लाइन और 10.50 मील लंबी राजिम ब्रांच लाइन में यातायात चालू हुआ, जिस पर 2019 में हमेशा-हमेशा के लिए ब्रेक लग गया। रेलवे ने इसकी वजह छोटी लाइन से हो रहे आर्थिक घाटे व रेल लाइनों को आधुनिक बनाने की योजना को बताया है। साथ ही छोटी लाइन पर एक्सप्रेस वे भी बना दिया गया है। यह छोटी रेल लाइन 1896 में 45.74 मील लंबी लाइन बनाने का काम शुरू हुआ, जो 5 साल बाद 1901 में पूरा कर लिया गया। यह रेल लाइन ब्रिटिश इंजीनियर एएस एलेन की अगवाई में बनाई गई। धमतरी लाइन को बंगाल नागपुर रेलवे की पहली नेरोगेज लाइन होने का गौरव प्राप्त है।

पर्यटन टाॅय ट्रेनों भी एक विकल्प

राज्य पर्यटन विभाग महीनाें से छोटी लाइन की ट्रेनों को पर्यटन ट्रेन के रूप में चलाने की मांग कर रहा है, लेकिन इस पर अभी तक बात नहीं बन सकी। रायपुर रेल मंडल के पब्लिसिटी इंस्पेक्टर शिव प्रसाद ने बताया कि रेलवे व पर्यटन विभाग के बीच इस विषय को लेकर चर्चा हुई है। अगर इस पर सहमति बनती है, तो हैरिटेज प्रदर्शनी के बाद बाकी की बची छोटी लाइन ट्रेनों को पर्यटन विभाग चाहे, तो टाॅय ट्रेनों के रूप में भी उपयाेग कर सकता है।

धरोहर के रूप में संग्रहित करेंगे

छोटी रेल लाइन रेलवे के लिए ऐतिहासिक महत्व रखती है। अब जब छोटी लाइनों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है, तो इस लाइन की ट्रेनों को रायपुर रेल मंडल ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संग्रहित करेगा।

- कौशल किशोर, डीआरएम, रायपुर रेल मंडल

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