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लॉकडाउन : शहनाई तो बजी नहीं, शादी भवनों की बैंड जरूर बज गई

शादी के लिए होने वाली बुकिंग पूरी तरह जीरो होने की वजह से लगभग एक हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। पढ़िए पूरी खबर-

लॉकडाउन : शहनाई तो बजी नहीं, शादी भवनों की बैंड जरूर बज गई
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रायपुर। कोरोना के लॉकडाउन के कहर से प्रदेश के पंद्रह सौ मैरिज पैलेस में ताले लग गए हैं। शादी के लिए होने वाली बुकिंग पूरी तरह जीरो होने की वजह से लगभग एक हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। इतना ही नहीं मैरिज पैलेस बुक नहीं होने की वजह से दस हजार लोगों के सामने रोजी रोटी की समस्या आन खड़ी हुई है।

कोरोना के डर से प्रदेश में पिछले 45 दिनों से लॉक डाउन की स्थिति बनी हुई है। इसकी वजह से तमाम तरीके के सार्वजनिक समारोह पर पाबंदी लगा दिया गया है और कोरोना के लॉकडाउन की चपेट में शादियां भी आ गई हैं, जिसका सीधा असर मैरिज पैलेस के कारोबार पर हुआ है।

सामान्य दिनों में अप्रैल और मई में एक मैरिज पैलेस में कई बार दो शिफ्ट में शादी-पार्टियों का आयोजन होता है। पूरी शादी के लिए तीन से चार दिन की बुकिंग हो जाती है। इस बार भी मैरिज पैलेस की बुकिंग फरवरी और मार्च से हुई मगर शादी का सीजन आते ही लॉकडाउन की घोषणा हो गई और लोगों ने अपनी शादियों के साथ मैरिज पैलेस की बुकिंग को कैंसल कर दिया।

इसका सीधा असर कुछ ऐसा हुआ कि प्रदेश में करीबन पन्द्रह सौ से ज्यादा होटल और छोटे बड़े भवन में तालाबंदी की स्थिति बन गई और पूरा कारोबार एक साल के लिए चौपट हो गया। मैरिज पैलेस के कारोबार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस सीजन में हुई बुकिंग की रकम उन्हें वापस करनी होगी और जो शादी की तारीख आगे तय करेंगे उन्हें अगले सीजन में भवन उपलब्ध कराना होगा जिसका सीधा नुकसान होगा। कारोबारियों के मुताबिक सालभर में शादी के इस सीजन में प्रदेशभर मैरिज पैलेस में एक हजार करोड़ का कारोबार होता था, जो इस बार जीरो हो गया है।

ये सभी प्रभावित

एक मैरिज पैलेस से कैटरर्स, इलेक्ट्रिशियन, किराया भंडार, बैंडपार्टी, साज-सज्जा करने वाले जुड़े होते हैं। मैरिज पैलेस में बुकिंग नहीं होने की वजह से इन्हें भी काम नहीं मिल रहा है और उनके साथ काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। सूत्रों के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है जो लॉकडाउन का शिकार हुए हैं।

रखरखाव पर खर्च

मैरिज पैलेस में भले शादी की शहनाई नहीं बज रही हो, मगर भवन के रखरखाव, वहां के बिजली बिल तथा अन्य व्यवस्था संबंधी खर्च संचालकों को जेब से पूरा करना पड़ रहा है। अनुमान के मुताबिक एक मैरिज पैलेस के रखरखाव में प्रतिमाह से दस से तीस हजार रुपए का खर्च हो रहा है। वर्तमान में लॉकडाउन की वजह से बंद पड़े ताले कब खुलेंगे इस बारे में उन्हें भी अंदाजा नहीं है।

क्या कहते हैं संचालक

शेमरॉक ग्रीन के संचालक मनदीप चावला कहते हैं कि शादी के लिए होटलों की बुकिंग पूरी तरह ठप हो गई है। जहां पू्र्व में एक हजार लोगों की बुकिंग हुई थी अब वहां पचास लोगों का इंतजाम करने पर जोर दिया जा रहा है। केवल राजधानी में ही पांच सौ करोड़ का नुकसान हुआ है।

वृंदावन पैलेस के संचालक पवन ठाकुर कहते हैं कि मैरिज पैलेस में बुकिंग जीरो होने की वजह से इससे जुड़े अन्य लोगों के सामने भी काम की समस्या आ खड़ी हुई है। अप्रैल-मई के लॉड डाउन का असर अक्टूबर-नवंबर में भी रहने की आशंका है।

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