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आदेशों का प्रयोगशाला बना रायपुर शहर, कारोबारी और जनता परेशान

प्रशासन की इस कारगुजारी से छोटे-छोटे सब्जी विक्रेताओं से लेकर थोक के कारोबारी और जनता भी परेशान हो रही है। पढ़िए पूरी खबर-

आदेशों का प्रयोगशाला बना रायपुर शहर, कारोबारी और जनता परेशान
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रायपुर। कोरोना संकट काल के दौरान राजधानी रायपुर में स्थानीय जिला प्रशासन सब्जी बाजारों को लेकर रोज-रोज नए प्रयोग कर रहा है। ऐसा करने के लिए रोज अलग-अलग आदेश निकाले जा रहे हैं। यही नहीं एक बार आदेश निकालने के कुछ घंटों बाद आदेश को पलटते हुए नया आदेश जारी किया जा रहा है। प्रशासन की इस कारगुजारी से छोटे-छोटे सब्जी विक्रेताओं से लेकर थोक के कारोबारी और जनता भी परेशान हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि आखिर प्रशासन क्यों बार-बार अपने ही आदेश बदल रहा है।

कोरोना संकट के बीच सब्जी बाजारों को प्रशासन ने प्रयोगशाला में बदल दिया है। थोक बाजार से लेकर चिल्हर बाजार और पसरे को लेकर लगातार फैसले बदले जा रहे हैं। कभी मैदानों को बाजारों में तब्दील किया जा रहा है। कभी रात के समय ही थोक बाजार खोलने का फरमान जारी किया जा रहा है। हैरानी की बात यह भी है कि अब तक सिर्फ सब्जी बाजारों को लेकर ही दर्जनभर फरमान जारी किए जा चुके हैं। यही वजह है कि हर दिन बदलते फरमान न सिर्फ व्यापारियों बल्कि जनता के लिए भी परेशानी का सबब बन रहे हैं।

शास्त्री बाजार से शुरुआत

दरअसल लॉकडाउन के बाद इसकी शुरूआत तब हुई, जब बाजारों में भारी भीड़ उमड़ने लगी। पहले तो प्रशासन ने गोलबाजार, शास्त्री बाजार, पुरानी बस्ती और आमापारा जैसे बड़े बाजारों को ही बंद कर दिया। इसके बाद शहर के बड़े मैदानों में बाजार लगाने का फरमान जारी किया गया। साइंस कॉलेज,स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स से लेकर भाठागांव बस स्टैंड में बाजार लगाए गए। बाजारों को सुबह 9 से शाम दोपहर 3 बजे तक समय दिया गया। बाद में बाजारों को दो बजे के बाद ही बंद कराना शुरू कर दिया गया। 72 घंटों के कंप्लीट लॉकडाउन को लेकर भी गलतफहमी जारी रही। पहले तो प्रशासन ने सभी सब्जी बाजारों को बंद करने का फरमान जारी कर दिया। 24 घंटे के भीतर ही इस फरमान को रद्द करना पड़ा। हालांकि इस फरमान का नतीजा दो दिनों बाद नजर आया जब 72 घंटे के कर्फ्यू के बाद हजारों की संख्या में लोग डूमरतराई के थोक बाजार समेत सारे बाजारों में पहुंच गए। इसीलिए एक बार फिर पहले थोक बाजार रात में लगाने और बाद में दिन में ही लगाने का आदेश जारी करना पड़ा। हालांकि तमाम आदेशों के पीछे प्रशासन सोशल डिस्टेंसिंग को कारण बता रहा है।

मुद्दा एक, आदेश कई

1. शहर के बीच में संचालित सभी चिल्हर सब्जी बाजार बंद

2. घनी आबादी से दूर मैदानों में लगाए जाएंगे बाजार

3. सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खुले रहेंगे सभी बाजार

4. सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुलेंगे बाजार

5. शहर के 4 कोनों में लगाए जाएंगे सब्जी बाजार

6. बीटीआई मैदान, डब्ल्यूआरएस मैदान, भाठागांव बस स्टैंड और साइंस कॉलेज मैदान में लगेंगे बाजार

7. मोवा ओवरब्रिज के नीचे खाली स्थान पर लगेंगे बाजार

8. 72 घंटों के कर्फ्यू में बंद रहेंगे थोक बाजार

9. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ 72 घंटे के कर्फ्यू में भी खुलेंगे थोक बाजार

10. रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक खुलेगा थोक बाजार

11. पहले की तरह दिन में ही संचालित होगा थोक सब्जी बाजार

सुरक्षा के लिए जरूरी

इस मामले को लेकर नगर निगम के अपर कमिश्नर पुलक भट्टाचार्य का कहना है कि बाजारों का विक्रेंद्रीकरण किया जा रहा है। कोशिश ये है कि बाजारों में भीड़ जमा न हो,सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके।

कांग्रेस ने आरोप खारिज किए

कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय कहते हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके, इसलिए लगातार बाजारों को व्यवस्थित किया जा रहा है। साइंस कॉलेज और डब्ल्यूआरएस जैसे बड़े मैदानों का चयन भी इसीलिए किया गया है। लोगों की भीड़ थोक बाजार में न लगे, इसलिए भी वहां अनावश्यक लोगों को जाने से रोका जा रहा है। इधर रायपुर के भाजपा सासंद सुनील सोनी का कहना है कि बाजार के संबंध में सामूहिक निर्णय लिया जाना चाहिए। कुछ लोगों से बात करके बाजार के कहीं भी शिफ्ट किया जा रहा है। ऐसा करना गलत है। कोरोना के संबंध में एहितयात बरतने की बात कह रहे हैं,लेकिन ऐसे निर्णय से पूरी भीड़ सड़क पर आ रही है और लॉकडाउन ध्वस्त हो रहा है।

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