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शाकाहारी वन्य जीवों के लिए बारिश बानी आफत

बिलासपुर के कानन पेंडारी जू में तीन चौसिंगा की मौत और बारनवापारा में दिल्ली से लाए गए 50 काले हिरणों में पांच काले हिरणों की 25 से 27 अगस्त के बीच निमोनिया से मौत हो गई।

शाकाहारी वन्य जीवों के लिए बारिश बानी आफत

बिलासपुर के कानन पेंडारी जू में तीन चौसिंगा की मौत और बारनवापारा में दिल्ली से लाए गए 50 काले हिरणों में पांच काले हिरणों की 25 से 27 अगस्त के बीच निमोनिया से मौत हो गई। जानकारों की मानें, तो खुर वाले वन्यजीव अत्यधिक बारिश की वजह से निमोनिया के शिकार हो रहे हैं, इस वजह से उनकी मौतें हो रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले माह सेंट्रल जू अथारिटी की अनुमति से दिल्ली के जू से बारनवापारा में 50 काले हिरण लाए गए थे। उनमें पांच काले हिरणों की निमोनिया से मौत हो गई। वन अधिकारियों की मानें, पिछले दिनों हुई तेज बारिश और सफर के थकान की वजह से वन्यजीवों को निमोनिया हुआ।

इसलिए हो रहे निमोनिया का शिकार

पशु चिकित्सकों के मुताबिक शाकाहारी वन्यजीवोें और जानवरों के खुर होते हैं। बारिश के समय इनके पैर गीली मिट्टी से सने रहते हैं। इस वजह से इन वन्यजीवों को जल्दी सर्दी हो जाती है। अगर समय रहते इनका उपचार न हो, तो वे मर जाते हैं।
काला हिरण राजस्थान और गुजरात में पाए जाते हैं। दोनों शुष्क प्रदेश हैं, इस वजह से काले हिरण यहां के माहौल में पूरी तरह ढल नहीं पाए और उनकी मौत हो गई।

नहीं हुई सलाहकार समिति की बैठक

चार वर्ष पूर्व जब कानन पेंडारी में एंथ्रेक्स की चपेट में आकर 22 चीतलों की मौत हुई थी, उसके बाद एक समिति का गठन किया गया था। समिति में वन्यजीवों की जानकरी रखने वालों सहित एक पशु चिकित्सक को रखा गया था।
गठित समिति में वाइल्ड लाइफ बोर्ड के पूर्व सदस्य प्राण चड्ढा भी शामिल थे। उन्होंने बताया, वे समिति में तीन साल तक रहे, लेकिन समिति की कभी बैठक ही नहीं हुई। वर्तमान में प्रदेश के किसी भी जू में सलाहकार समिति नहीं है, इस वजह से वहां अव्यवस्था फैली हुई है।
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