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प्रमोशन भी मिला तो रिटायरमेंट के एक दिन पहले, अफसरों ने लगाया नाइंसाफी का आरोप

मार्कफेड में आयोजित रिव्यू, परिभ्रमण और कैलेंडर ईयर 2019 की बैठक में लापरवाही के कारण नहीं मिला दो साल पहले मिलने वाला प्रमोशन। पढ़िए पूरी खबर-

प्रमोशन भी मिला तो रिटायरमेंट के एक दिन पहले, अफसरों ने लगाया नाइंसाफी का आरोप
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रायपुर। राज्य के कई विभागों में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक समय पर नहीं होने के कारण अफसर परेशान हैं। ढेरों पदोन्नति प्रकरणों में शासकीय कर्मचारियों को इसका लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। विभागों में सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले पदोन्नति आदेश जारी कर कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) में दो कर्मचारियों को उनके सेवानिवृत्त होने के एक दिन पहले पदोन्नति आदेश जारी किया गया। मार्कफेड में आयोजित रिव्यू, परिभ्रमण और कैलेंडर ईयर 2019 की बैठक में लापरवाही की ही नतीजा है कि विभाग के अफसरों को दो साल पहले मिलने वाली पदोन्नति का लाभ उन्हें नहीं मिल पाया।

मार्कफेड में कर्मचारियों को विभागीय पदोन्नति देने के लिए दिसंबर माह में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक को हाईकोर्ट से स्टे होने के कारण नहीं किया गया। इसके कारण कई कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए। अन्य विभागों में 31 दिसंबर 2019 तक सभी पदोन्नति के प्रकरणों को अनुमति दे दी गई, इसमें सहकारिता आयुक्त कार्यालय भी शामिल है। 6 मार्च को मार्कफेड में डीपीसी पुनरीक्षण की बैठक हुई थी, पर कोर्ट में मामला होने के कारण निर्णय नहीं लिया गया। पुनरीक्षण और परिभ्रमण की बैठकें हर कैलेंडर वर्ष में आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2019 में यह 19 फरवरी को आयोजित की गई थी, पर बैठक नहीं हुई। ऐसे बैठकों में पुराने मामलों को भी लिया जा सकता है, इसमें कोई बैन नहीं होता। मार्कफेड के अधिकारियों के मामले लिफाफे में बंद थे, जिसे सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले खोला गया और उनका पदोन्नति आदेश जारी किया गया। बताया जाता है कि इन कर्मचारियों द्वारा सेवानिवृत्ति की सूचना दिए जाने पर उनके नाम से बंद लिफाफा खोला गया, तब पदोन्नति का आदेश जारी हुआ। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार विभागीय पदोन्नति के संबंध में हर छह माह में रिव्यू करने का नियम हैं, इसका पालन नहीं होने के कारण कई मामले अब भी अटके हैं।

लॉकडाउन के दौरान दो अफसरों की पदोन्नति

मार्कफेड में कोरोना संक्रमण लॉकडाउन के समय दो सहायक प्रबंधकों को उपप्रबंधक के पद पर पदोन्नति दी गई। दोनों अधिकारियों में मार्च महीने में उदयराम साहू की पदोन्नति का आदेश 27 मार्च को हुआ। वे 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए। वहीं दक्षिणानंद गिरी गोस्वामी की पदोन्नति का आदेश 29 अप्रैल को जारी किया गया। वे 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो गए। मार्कफेड सचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि उनको 24 अगस्त 2018 से पदोन्नत किया जाता है, लेकिन नो वर्क नो पे के आधार पर वरिष्ठता प्रदान की गई।

हाईकोर्ट के आदेश में पदोन्नति पर रोक नहीं

हाईकोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण लागू किए जाने को लेकर रोक लगी है, पर नियमित पदोन्नति करने पर कोई रोक नहीं है। विभाग के अफसरों के द्वारा डीपीसी की बैठक में इसे आधार पर बताकर बैठक निरस्त कर दिया जाता है। मामले में राज्य के महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने एक आदेश जारी कर साफ किया है कि नियमित पदोन्नति में कहीं रोक नहीं है। यह कैलेंडर ईयर में प्रावधान के अनुसार हो सकती थी।

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