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स्थापना दिवस पर इंद्रावती नदी बचाने बस्तर के लोगों ने किया जल सत्याग्रह, 1 घंटे नदी में खड़े रहकर किया सरकार को जगाने का प्रयास

बस्तर की प्राणदायनी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए राज्य स्थापना दिवस के पहले दिन शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने 1 घंटे नदी में खड़े रहकर जल सत्याग्रह आंदोलन किया।

स्थापना दिवस पर इंद्रावती नदी बचाने बस्तर के लोगों ने किया जल सत्याग्रह, 1 घंटे नदी में खड़े रहकर किया सरकार को जगाने का प्रयास

विकास तिवारी, जगदलपुर। बस्तर की प्राणदायनी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए राज्य स्थापना दिवस के पहले दिन शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने 1 घंटे नदी में खड़े रहकर जल सत्याग्रह आंदोलन किया। बस्तर की प्राणदायनी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए शुरू की गई इंद्रावती जनजागरण अभियान ने आज सुबह गांधीगिरी तरीके से सुबह 7 से 9 बजे तक सांकेतिक ध्यानाकर्षण सत्याग्रह किया। इस जल सत्याग्रह के माध्यम से मंच के लोगों ने इंद्रावती नदी को बचाने के लिए सरकार को जगाने का प्रयास किया। जल सत्याग्रह को लेकर इंद्रावती बचाओ आंदोलन के सदस्य पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने बताया कि आज से मंच के लोगों द्वारा तीसरे चरण के आंदोलन की शुरुआत की गई।

इंद्रावती नदी बचाओ मंच के सदस्यों ने नदी के आधे पानी मे डूब कर जल सत्याग्रह किया। मंच के सदस्यों ने कहा कि इस सत्याग्रह के माध्यम से शासन का ध्यानाकर्षण करना है की प्राधिकरण गठन की घोषणा के बाद अब तक जमीनी स्तर में नदी को बचाने कोई काम शुरू नही किया गया है। घोषणा किये 6 महीने बीत जाने के बाद भी न ही किसी अधिकारी की नियुक्ति की गई है और न ही प्राधिकरण का गठन किया गया है।


सरकार का इस ओर ध्यानआकर्षण करने के उद्देश्य से आज इंद्रावती नदी तट पर सत्याग्रह किया गया। अब लगातार इंद्रावती को बचाने के लिए अलग अलग तरीके से सांकेतिक धरना आंदोलन पर सत्याग्रह किया जाएगा।सदस्यों ने कहा कि हालांकि शुरुआती आंदोलन में प्रदेश में बने नए सरकार ने तत्परता दिखाते हुए इंद्रावती विकास प्राधिकरण के गठन करने की घोषणा तो की लेकिन इस पर अब तक किसी तरह की कोई पहल नहीं की गई है।

ऐसे में जल्द से जल्द सरकार कोई कारगर कदम उठाए इस वजह से आज राज्य स्थापना दिवस के दिन ध्यानाकर्षण जल सत्याग्रह का आयोजन किया गया है। ताकि प्रदेश सरकार तक यह संदेश जा सके कि इंद्रावती नदी को बचाने जल्द ही कोई निर्णय लिया जा सके। इस जल सत्याग्रह के दौरान इस मंच के सदस्यों में किशोर पारेख, संपत झा, अनिल लुक्कड़, रोहित आर्य, धर्मेंद्र महापात्र, करमजीत कौर समेत लगभग 50 की संख्या में सदस्य उपस्थित थे।

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