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पद्मश्री और पद्मभूषण के बाद अब पंडवानी गायिका तीजनबाई को मिला दिल्ली में पद्मविभूषण सम्मान…

पंडवानी गायिका तीजनबाई को दिल्ली में पद्मविभूषण सम्मान मिला है. तीजन बाई को ये सम्मान पंडवानी गायन के क्षेत्र में दिया गया है. तीजन बाई को तीन बार सर्वोच्च उपाधि डी लिट से भी सम्मानित किया जा चुका है.

पद्मश्री और पद्मभूषण के बाद अब पंडवानी गायिका तीजनबाई को मिला दिल्ली में पद्मविभूषण सम्मान…
आनंदनारायण ओझा, दुर्ग. पंडवानी गायिका तीजनबाई को दिल्ली में पद्मविभूषण सम्मान मिला है. तीजन बाई को ये सम्मान पंडवानी गायन के क्षेत्र में दिया गया है. तीजन बाई को तीन बार सर्वोच्च उपाधि डी लिट से भी सम्मानित किया जा चुका है. इससे पहले भी तीजन बाई को अलग-अलग यूनिवर्सिर्टी ने तीन बार शिक्षा की सर्वोच्च उपाधि डी लिट से सम्मानित किया है। देश ही नहीं विदेशों में भी इनके नाम से लोग पंडवानी को जानते हैं.
बता दें कि तीजन बाई को साल 1988 में पद्म श्री और 2003 में पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था. तीजन बाई की पहचान छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका के तौर पर होती है। 2007 में उन्हें नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया जा चुका है. दरअसल पंडवानी एक ऐसी एक शैली है जिसमें ‘महाभारत’ की कथाओं को पेश किया जाता है और तीजन बाई को इस कला में महारत हासिल है.
भिलाई के गाँव गनियारी में जन्मी इस कलाकार के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था. नन्हीं तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियाँ गाते सुनाते देखतीं और धीरे धीरे उन्हें ये कहानियाँ याद होने लगीं. उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया. 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया.
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