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छत्तीसगढ़ कीं पैड वुमेन...ले रहीं सैनिटरी नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण, महिलाओं को जागरूक करने उठाया बीड़ा

मानवीय और सामाजिक सरोकार को लेकर चर्चा में रही फिल्म ''पैडमैन'' तो आपने जरूर देखी होगी। फिल्म् में अभिनेता अक्षय कुमार को सैनिटरी नैपकिन को बढ़ावा देने के लिए संघर्ष करते हुए दिखाया गया है। ऐसी ही कुछ मिसाल पेश कर रही हैं बस्तर की युवतियां।

छत्तीसगढ़ कीं पैड वुमेन...ले रहीं सैनिटरी नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण, महिलाओं को जागरूक करने उठाया बीड़ा
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मानवीय और सामाजिक सरोकार को लेकर चर्चा में रही फिल्म 'पैडमैन' तो आपने जरूर देखी होगी। फिल्म् में अभिनेता अक्षय कुमार को सैनिटरी नैपकिन को बढ़ावा देने के लिए संघर्ष करते हुए दिखाया गया है। ऐसी ही कुछ मिसाल पेश कर रही हैं बस्तर की युवतियां।

इस ग्रुप की युवतियां सैनिटरी नैपकिन को बढ़ावा देने के लिए अंत्यावसायी सहकारी समिति में नैपकिन बनाने का काम सीखने के साथ ही ग्रामीण अंचल की आदिवासी महिलाओं और युवतियों को इसके महत्व बताकर जागरूक करने का काम कर रही हैं। युवतियों द्वारा तैयार किए गए सैनिटरी नैपकिन आश्रम, सरकारी स्कूल और व्यवसायिक तौर पर दुकानों में कम दामों में उपलब्ध कराया जाएगा।
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इस संस्था का नेतृत्व प्रबंधक अनुराधा शर्मा ने बताया जिले के अलग-अलग ब्लॉक में रहने वाली और कम पढ़ी-लिखी युवतियों को सैनिटरी नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। ताकि भविष्य में स्वरोजगार कर अपनी अजीविका चला सकें।
इसके साथ ही उन्हें इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि वह ग्रामीण अंचलों में जाकर आदिवासी महिलाओं और युवतियों को इसके फायदे बता सकें कि किस तरह महावरी के दौरान इंफेक्शन से बचा जा सकता है। इसका उपयोग न करने से किस तरह की बीमारियां हो सकती हैं। फिलहाल समिति में 60 आदिवासी युवतियां नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं।
कैंपेन चलाकर कर रहे जागरूक
संस्था प्रबंधक अनुराधा बताती हैं पहली बार इस काम को एक व्यवसाय के रूप में करने के लिए सभी को तकनीकी शिक्षा के साथ सारी सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है। हम बीच बीच में कैंपेन चलाकर आदिवासी महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं।
दिल्ली, अहमदाबाद के एक्सपर्ट दे रहे प्रशिक्षण
आशा योजना के तहत इन युवतियों को नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण महिलाएं प्रशिक्षकों द्वारा दिया जा रहा है। खासतौर पर दिल्ली अहमदाबाद से एक्सपर्ट विशेष तौर प्रशिक्षण दे रहे हैं। जो युवतियों को मशीन से नैपकिन बनाना सीखाने के साथ ही मशीनों के बारे में भी पूरी जानकारी दे रहे हैं।
इस पूरे प्रशिक्षण में खास बात यह भी है कि युवतियों को प्रशिक्षण के साथ हजार रुपए हर महीने मानदेय भी दिया जा रहा है। साथ ही दूर इलाके से आईं युवतियों के लिए सेंटर में ही रहने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
अभियान से करेंगे जागरूक
वहीं प्रशिक्षण ले रही युवतियों का कहना है गांव की 90 फीसदी से ज्यादा महिलाएं इसका उपयोग नहीं करतीं। क्योंकि उन्हें इसके महत्व के बारे में नहीं पता। कई जगहों पर तो महिलाओं को यह तक नहीं पता कि सैनिटरी होता क्या है। इससे गंभीर बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है। इसे लेकर आदिवासी युवतियों को जागरूक करेंगे।

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