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एसीआई में अब तक नहीं जुड़ी ऑक्सीजन पाइप लाइन, उधार के सिलेंडर से हो रहे ऑपरेशन

एस्कार्ट से अनुबंध समाप्त होने के बाद काटी गई गैस की पाइपलाइन को अब तक नहीं जोड़ा गया है। इसके लिए चार बार मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को रिमाइंडर भेजा जा चुका है, लेकिन इसकी प्रक्रिया शुरु ही नहीं की गई है।

एसीआई में अब तक नहीं जुड़ी ऑक्सीजन पाइप लाइन, उधार के सिलेंडर से हो रहे ऑपरेशन

एस्कार्ट से अनुबंध समाप्त होने के बाद काटी गई गैस की पाइपलाइन को अब तक नहीं जोड़ा गया है। इसके लिए चार बार मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को रिमाइंडर भेजा जा चुका है, लेकिन इसकी प्रक्रिया शुरु ही नहीं की गई है। एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के चिकित्सक आंबेडकर अस्पताल से उधार में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन गैस के सिलेंडर मंगाकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। अस्पताल में किसी भी तरह की सर्जरी के लिए दोनों गैस का होना जरूरी है।

एस्कार्ट से अनुंबध समाप्त होने के बाद राजधानी के लोगों को हृदय संबंधी बीमारी के उपचार की सुविधा देने के लिए एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट बना दिया गया, मगर वहां संसाधन उपलब्ध कराने में अब तक गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। एस्कार्ट के हटने के बाद से यहां आक्सीजन और नाइट्रोजन गैस की सप्लाई के लिए बिछाई गई पाइप लाइन को डिस्कनेक्ट कर दिया गया था।

मरीजों की सर्जरी के दौरान दोनों तरह के गैस की आवश्यकता होती है। कई बार मरीज की गंभीर स्थिति के दौरान उन्हें आक्सीजन की आवश्यकता होती है। मगर अस्पताल में इस पाइपलाइन को जोड़ने के लिए कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। एसीआई प्रबंधन की तरफ से गैस पाइपलाइन को कनेक्ट करने के लिए प्रस्ताव भेजने के बाद चार बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। चिकित्सक और अस्पताल का स्टाफ जरूरत होने पर आंबेडकर अस्पताल से सिलेंडर लाकर मरीजों का उपचार कर रहा है।

स्टाफ की तरफ भी ध्यान नहीं

आंबेडकर अस्पताल से संबंधित एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट में निचले स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को भी अब तक पूरा नहीं किया गया है। इसके लिए भी कई बार पत्र व्यवहार किया जा चुका है, मगर प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इस संस्थान में चिकित्सक गिनती के स्टाफ के जरिए काम कर रहे हैं। शुरुआती दौर में यहां भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी, मगर पूरे स्टाफ की भर्ती नहीं हो पाई थी।

बड़ी रकम सीजीएमएससी के पास

एसीआई में आने वाले मरीजों को पूरी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगभग 21 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। इसमें से 10 करोड़ रुपए आवश्यक उपकरण की खरीदी के लिए सीजीएमएससी को दिए गए थे। यहां छोटे उपकरण तो पहुंच गए, मगर बड़े उपकरणों की खरीदी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बाइपास सर्जरी के लिए बाइपास मशीन की खरीदी पूरी नहीं हो पाई है।

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