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प्रदूषण फ़ैलाने वाले रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को बंद करने और उनके विरुद्ध अभियोग चलाने के आदेश, NGT की सख्त आदेश के बाद उद्योगपतियों में हड़कंप, क्रिटिकल पोल्यूटेड सिटी में रायपुर का नाम भी शामिल

प्रदूषण फ़ैलाने वाले रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को बंद करने और उनके विरुद्ध अभियोग चलाने के आदेश के बाद उद्योगपतियों में हड़कंप मच गया है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने पॉल्यूशन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा फैसला करते हुए प्रदूषण फैलाने वाले रेड और ऑरेंज केटेगरी के उद्योगों को तत्काल बंद करने का आदेश जारी कर दिया है.

प्रदूषण फ़ैलाने वाले रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को बंद करने और उनके विरुद्ध अभियोग चलाने के आदेश, NGT की सख्त आदेश के बाद उद्योगपतियों में हड़कंप, क्रिटिकल पोल्यूटेड सिटी में रायपुर का नाम भी शामिल

रायपुर. प्रदूषण फ़ैलाने वाले रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को बंद करने और उनके विरुद्ध अभियोग चलाने के आदेश के बाद उद्योगपतियों में हड़कंप मच गया है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने पॉल्यूशन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा फैसला करते हुए प्रदूषण फैलाने वाले रेड और ऑरेंज केटेगरी के उद्योगों को तत्काल बंद करने का आदेश जारी कर दिया है. वही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए सभी को प्रारंभिक तौर पर एक-एक करोड़ क्षतिपूर्ति देने के लिए भी कहा है. छत्तीसग़ढ़ पर्यावरण मंडल के अनुसार राज्य में रेड और ऑरेंज केटेगरी के बड़े और मध्यम श्रेणी के 408 उद्योग हैं. इन सभी उद्योगों को जल्द ही बंद करना पड़ेगा.

केंद्रीय पर्यावरण मंडल ने रायपुर को प्रदूषण के मामले में क्रिटिकल शहरों में शामिल कर लिया है. कांप्रेंसिव एनवायरेंट पॉल्यूशन इंडेक्स में रायपुर को 70.77 नंबर मिले हैं. 70 नंबर से अधिक वाले को क्रिटिकल इंडेक्स में रखा जाता है. इस दृष्टि से भिलाई और कोरबा प्रदूषण में सुधार के उपाय करते हुए अब क्रिटिकल शहरों की सूची से बाहर हो गए हैं. एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच के 10 जुलाई के आदेश के बाद देश में हड़कंप मच गया है. एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने देश के 100 शहरों के प्रदूषित इंडस्ट्रियल एरिया क्लस्टर में ऐसे उद्योगों को जो कि प्रदूषण फैला रहे हैं विशेष रूप से जो कि रेड और ऑरेंज श्रेणी में आते हैं उन उद्योगों को बंद करने और उनके विरुद्ध अभियोग चलाने के आदेश दिए हैं.

एनजीटी ने ऐसे उद्योगों से पिछले 5 वर्षों में प्रदूषण के कारण पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई और पर्यावरण को बहाल कराने, मानव के स्वास्थ्य को हुए नुकसान के लिए मूल्यांकन करने का आदेश देकर नुकसान की राशि और पर्यावरण बहाल करने की राशि को केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल के पास जमा कराने हेतु भी आदेशित किया है. अंतरिम कंपनसेशन के रूप में भी ऐसे उद्योगों को तत्काल ही राशि जमा करानी होगी. रेड तथा ऑरेंज श्रेणी के वृहद उद्योगों को रुपए 1 करोड़, मध्यम उद्योगों को रु 50 लाख तथा छोटे उद्योगों को रुपए 25 लाख तत्काल ही जमा कराने हेतु आदेशित किया है.

बता दें कि वर्ष 2016 की केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल की सूची में रायपुर के इंडस्ट्रियल क्लस्टर को सेवेरली प्रदूषित श्रेणी में रखा गया था और छत्तीसगढ़ के ही कोरबा को और अधिक प्रदूषित श्रेणी क्रिटिकली प्रदूषित में रखा गया था. परंतु पिछले कुछ वर्षों में किए गए बहुत सारे दावों के बावजूद कि रायपुर में वायु प्रदूषण खत्म हो गया है, मानक से भी नीचे आ गया है, एनजीटी के समक्ष पेश की गई वर्ष 2018 की गई सूची में रायपुर का स्थान देश के 100 शहरों में 37 वें स्थान पर हैं और रायपुर ने उछाल मार कर अपना स्थान क्रिटिकली प्रदूषित इंडस्ट्रियल क्लस्टर में बना लिया है. इसके बाद 76 वें स्थान पर कोरबा और 93 स्थान पर भिलाई दुर्ग आते हैं.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में वृहद तथा मध्यम उद्योगों में से 360 रेड तथा 48 अरेंज श्रेणी में रखे गए हैं. लघु उद्योगों में 1127 रेड तथा 3438 अरेंज श्रेणी में रखे गए हैं एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का अब पुनः सत्यापन करने की आवश्यकता नहीं है. एनजीटी ने यह भी आदेशित किया की ऐसे उद्योग जो कि एक से ज्यादा मापदंडों में नहीं आते हैं परंतु जो अन्य मापदंडों जैसे पानी वायु या अन्य क्षेत्र में प्रदूषण फैला रहे हैं उन्हें राज्य के पर्यावरण संरक्षण मंडल चिन्हित करके अगले 3 माह में एनजीटी को रिपोर्ट करेंगे.

एनजीटी में उल्लेखित किया है की ऐसे प्रदूषित इंडस्ट्रियल क्लस्टर के लिए एक्शन प्लान बनाया गया है परंतु क्या सिर्फ एक्शन प्लान बनाने से ही आवश्यकता पूरी हो जाती है. एनजीटी ने कहा कि भले ही प्रदूषित इंडस्ट्रियल क्लस्टर चिन्हित कर लिए गए हो परंतु प्रदूषण की अपराधिक गतिविधियां चालू नहीं रखी जा सकती. कानून कहता है कि कोई भी गतिविधि जो कानून के विरुद्ध हो वह चालू नहीं रखी जा सकती और जो व्यक्ति कानून का उल्लंघन कर रहा है उसे सजा देनी चाहिए इसलिए खाली सुधार की आवश्यकता है कहकर प्रदूषण करने वाले और कानून का उल्लंघन करने वालों को सजा तथा पर्यावरण क्षतिपूर्ति देने से मुक्त नहीं किया जा सकता. क्योंकि यह अभी तक नहीं किया गया है इसलिए एनजीटी अपनी वैधानिक कार्यों को कर रहा है. एनजीटी ने कहा की पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले को व्यापार करने का अधिकार नहीं है और जो वैधानिक प्राधिकारी है उनके अधिकार उनके कर्तव्यों से बंधे हुए हैं वे अपने विवेक से पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करना बंद नहीं कर सकते. एनजीटी ने स्पष्ट आदेशित किया है की कि राज्य के पर्यावरण संरक्षण मंडल विभिन्न अधिनियम के तहत अगले 3 माह में आदेश का क्रियान्वयन कर एनजीटी को रिपोर्ट प्रस्तुत करें.

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