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अब नहीं डरते ग्रामीण, हाथियों ने जिनके घर तोड़े प्रशासन ने उनके लिए बना दी नई कॉलोनी

अंबिकापुर में हर पल मौत के साए में रहने वाले ग्राम पंचायत कंडराजा के ग्रामीणों का शासन की एक योजना ने पूरी जीवन शैली बदल दी।

अब नहीं डरते ग्रामीण, हाथियों ने जिनके घर तोड़े प्रशासन ने उनके लिए बना दी नई कॉलोनी
अंबिकापुर में हर पल मौत के साए में रहने वाले ग्राम पंचायत कंडराजा के ग्रामीणों का शासन की एक योजना ने पूरी जीवन शैली बदल दी। जो रोजी-रोजगार भूलकर रात-दिन हाथियों से जान बचाने के लिए मशक्कत करते थे अब वे न केवल पक्के मकानों की कालोनी में सुरक्षित रह रहे हैं बल्कि अपने समय का उपयोग रोजी-रोजगार के लिए कर रहे हैं।
विकासखण्ड मैनपाट अंतर्गत सीमावर्ती जंगल का इलाका दशकों से हाथी प्रभावित रहा है। यहां हाथी हमेशा तोड़फोड़ मचाते हैं। मामूली चूक पर हाथी कुचलकर जान ले लेते हैं। इन्हीं गांवों में शामिल है ग्राम पंचायत कंडराजा का पटेलपारा व बैगापारा। दो साल पहले जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने इन दोनों गांवों की स्थाई समस्या का हल हाथियों के नैसर्गिंक मार्ग से दूर सुरक्षित स्थान पर पक्के घर बनाने का निर्णय लिया।
तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल के प्रयासों से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रभावित ग्रामीणों के लिए पक्के मकानों की एक कालोनी विकसित करने का निर्णय लिया गया। विभाग ने प्रभावितों को दी जाने वाली मुआवजा राशि से 44 पक्के मकान बना दिया। अब प्रभावित ग्रामीण अपने पुस्तैनी घर को छोड़कर इसी कॉलोनी में रह रहे हैं जहां न तो हाथियों का कोई भय है न ही कोई असुविधा।

मुआवजा राशि से क्षेत्र का विकास

डीएफओ श्रीमती प्रियंका पाण्डेय ने बताया कि हाथी प्रभावितों को दी जाने वाली मुआवजा राशि व डीएम मद से कालोनी विकसित की गई है। कालोनी के चारों ओर सुरक्षा घेरा सहित अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है जिस पर काम चल रहा है।

44 पक्के मकान

हाथी प्रभावित ग्राम पटेलपारा व बैगापारा के ग्रामीणों के लिए विभाग द्वारा 44 पक्के मकान बनाए गए हैं। इन मकानों में एक परिवार की जरूरत के अनुसार सभी सुविधाएं मौजूद हैं।

कालोनी में बिजली पानी की सुविधा भी

प्रशासन द्वारा इस कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क सहित अन्य सारी सुविधाएं विकसित की गई है। ग्रामीणों को हर समय पानी उपलब्ध कराया गया है वहीं गांव में विद्युत का भी विस्तार किया गया। क्रेडा ने गांव में हाईमास्ट लाइट लगाया है जिसकी रोशनी में पूरी कॉलोनी रोशन होती है। कालोनी में ही स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्र खोले गए हैं। जहां दिनभर बच्चों की किलकारियां गुंजते रहती है।
ग्रामीण इंदल मांझी ने बताया कि अब हमें कोई समस्या नहीं होती। सभी ग्रामीण अब खेती व अन्य रोजगारों पर ध्यान देते हैं। जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है।ग्रामवासी मुन्नी बाई मांझी ने कहा कि पहले गांव के बच्चे सुबह होते ही अपनी बकरियों को चराने जंगल चले जाते थे।
अब सभी बच्चे नियमित आंबा केन्द्र व स्कूल जाते हैं।वही केश्वर मांझी ने बताया कि पहले के समय को याद कर ही मन सिहर उठता है। हम सभी हाथियों से अपनी जान बचाने भागते रहते थे।
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