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खेती के लिए नहीं हुई पर्याप्त वर्षा, नहर भी बदहाल तो किसानो ने शुरू की मरम्मत और सफाई

जशपुर जिले के नारायणपुर इलाके में मानसून की आंख मिचौली से किसानों की रातों की नींद उड़ी हुई है। खेतों में पानी के अभाव में काफी किसान अब तक रोपा का काम पूरा नहीं कर पाए हैं।

खेती के लिए नहीं हुई पर्याप्त वर्षा, नहर भी बदहाल तो किसानो ने शुरू की मरम्मत और सफाई
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जशपुर जिले के नारायणपुर इलाके में मानसून की आंख मिचौली से किसानों की रातों की नींद उड़ी हुई है। खेतों में पानी के अभाव में काफी किसान अब तक रोपा का काम पूरा नहीं कर पाए हैं। और जिन्होनें रोपा कर लिया है,वे पानी की कमी से धान के पौधों के सूखने से परेशान है।

किसानों की मुसीबत को जिले के बदहाल बांध और जर्जर नहरों ने बढ़ा दिया है। मुसीबत के समय करोड़ों की लागत से बने ये सरकारी बांध व नहर अन्न् दाता किसानों के लिये बेकार साबित हो रहे हैं। वहीं जिले को विद्युत उत्पादक जिले की पहचान दिलाने वाला गुल्लु हाईड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट ने किसानों की पानी की किल्लत को बढ़ाने का काम किया है।

फसल बचाने के लिये जुझ रहे किसानों का आरोप है कि प्रोजेक्ट प्रबंधन अपनी बिजली उत्पादन के लिये बांध में पानी को सुबह 9 बजे से 2 बजे तक रोक कर,उनके खेतों तक पानी की पहुंच को बाधित कर रहा है। वहीं इस पूरे मामले में जल संसाधन विभाग नहरों की मरम्मत के लिये फंड की कमी का पुराना राग अलापता नजर आ रहा है। इस सरकारी रवैये से परेशान किसानों ने श्रमदान कर नहर की मरम्मत का अभियान शुरू किया है। रविवार को सुबह से लेकर समाचार लिखे जाने तक दर्जनों किसान श्रमदान में जुटे हुए थे।

मामला कुनकुरी तहसील के बेने सिंचाई परियोजना की है। इस सिंचाई येाजना का निर्माण 70 के दशक में तात्कालिन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किया गया था। लेकिन चालू खरीफ़ सीजन में पानी की किल्लत से जूझ रहे किसानों के लिये यह पांच दशक पुराना सिंचाई परियोजना पूरी तरह से बेकार साबित हो रहा है। दरअसल, नारायणपुर सहित आसपास के क्षेत्र में इस बार मानसून पूरी तरह से मेहरबान नहीं हो पाया है।
स्थानीय किसानों के मुताबिक क्षेत्र में अल्प वर्षा की स्थिति बन गई है। खेत पानी के अभाव में सूखे पड़े हुए है। कई किसान पानी के अभाव में बोनी और रोपा का काम पूरा नहीं कर पाए हैं और जिन किसानों ने किसी तरह इन कामों को पूरा किया है,वे खेतों में अपने फ़सल को सूखता हुआ देख कर बैचैन हो रहे हैं। बेने बांध का एक शाखा दाराखरिका,नारायणपुर,रानीकोम्बो तक पहुंचता है।
इस 11 किलोमीटर नहर से दर्जनों गांव के सैकड़ों किसानों के खेत सिंचाई के लिये आश्रित हैं। लेकिन पांच दशक में नहर सही तरीके से ना तो सफाई हुई और ना ही मरम्मत। नतीजा नहर पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है और इसमें झाड़-झंकाड़ उग आए हैं। इस सरकारी खण्डहरनुमा नहर से हो कर खेत तक पानी पहुंचने की कोई उम्मीद अन्न्दाता किसानों को नहीं है।
नहर के मरम्मत और सफाई की मांग करके थक चुके किसानों को अब ना तो जल संसाधन विभाग से कोई उम्मीद है और ना ही यहां के जनप्रतिनिधियों से। मानसून की दगाबाजी से निराश हो चुके किसानों ने अपने फ़सल को बचाने के लिये नहर की सफाई के लिये श्रमदान करने का निश्चय किया है। रविवार की सुबह से नारायणपुर, चिटकवाइन के दर्जनों किसान एकजुट हो कर श्रमदान कर नहर की सफाई अभियान में जुट गए।
खेतों में पसीना बहाने के समय नहर की सपुाई में जुटे किसानों का कहना है कि फ़सल उनकी है,इसलिये खेतों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उनकी ही है। अब नहर की मरम्मत और सपुाई के लिये वे सरकारी मदद की राह नहीं देख सकते हैं। फंड की कमी का रोना रो रहे जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से नाराज किसानों का कहना है कि सिंचाई कर के रूप में विभाग हर साल उनसे हजारों रूपये की वसूली करता है। कम से कम इस टैक्स का उपयोग कर विभाग बांध व नहर का देखभाल कर सकता है।

किसानों का आरोप

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि अभी हाइड्रो पावर द्वारा 9 बजे से 2 बजे तक बिजली उत्पादन के लिए पानी जमा किया जाता है इस बीच मे नहर में पानी आना बंद हो जाता है जब 2 बजे खोला जाता है तो खेतों तक पानी पहुचने में रात हो जाती है ऐसे स्थिति में रात में जंगली जानवरों का डर बना रहता है जिससे खेतों में पानी पटाना संभव नही है।

बिजली की कीमत भी चुका रहे हैं किसान

बेने नहर पर आश्रित किसानों की मुसीबत को गुल्लु हाइड्रो इलेक्ट्रीक प्रोजेक्ट ने बढ़ा दिया है। किसानों का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट के बन जाने से बांध के पानी की पहुंच खेत से दूर हो गया है। मामला रबी फ़सल का हो या खरीफ़ का,जरूरत के समय उन्हें बेने बांध से पानी नहीं मिल पाता। पॉवर प्रोजेक्ट का प्रबंधन अपने हिसाब से बांध से पानी छोड़ता है। इससे या तो उनकी फ़सल बिना पानी के सुख जाती है या पिुर खेत में खड़ी पुसल बांध से छोड़े हुए पानी से बर्बाद हो जाती है। रनिंग वॉटर टेक्नोलॉजी से निर्मित होने के सरकारी दावे से भी क्षेत्र के प्रभावित किसान भरोसा नहीं रखते हैं। इस पॉवर प्रोजेक्ट से किसानों को हो रहे नुकसान को कांग्रेस आसन्न् विधान सभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में जुटी हुई है। इससे एक बार पिुर इस ग्रीन पॉवर को लेकर जिले में लड़ाई तेज होने की संभावना बनती दिख रही है।

सफाई के लिए नहीं है बजट

इस संबंध में जल संसाधन विभाग के ईई डीआर दर्रो, ने बताया कि नहर की सफाई के लिये विभाग के पास कोई बजट नहीं है।श्रमदान करके ही नहर की सफाई की जा सकती है। हाइड्रो प्रोजेक्ट द्वारा बांध के गेट को बंद किये जाने के मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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