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नहीं रहे 'सपनों के सौदागर', जानिए अजीत जोगी का कलेक्टर से सीएम बनने तक राजनीतिक सफर

1986 के आस-पास उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर सक्रिय राजनीति में किया था प्रवेश। पढ़िए पूरी खबर-

नहीं रहे सपनों के सौदागर, जानिए अजीत जोगी का कलेक्टर से सीएम बनने तक राजनीतिक सफर
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने 74 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। छत्तीसगढ़ियों की आवाज बुलंद करने वाले नायक की मौत छत्तीसगढ़ की राजनीति के एक युग का अंत था। जोगी का व्यक्तित्व असाधारण था उनके इस असाधारण की वजह से उन्होंने कलेक्टर से मुख्यमंत्री तक सफ़र तय किया। अजीत जोगी का पूरा नाम अजीत प्रमोद कुमार जोगी था।

जब से छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ है राज्य की सियासत जोगी के इर्द-गिर्द ही घूमी। अजीत जोगी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर कलेक्टर की थी, जोगी ने 14 साल तक कलेक्टरी की है। जिस दौरान इंदौर में कलेक्टरी कर रहे थो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संपर्क में आ गए। 1986 के आस-पास उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

राजनीति में प्रवेश करने के बाद जोगी ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना ली, वह 1986 से 1998 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। इस दौरान वह कांग्रेस में अलग-अलग पद पर कार्यकर रहे, वहीं 1998 में रायगढ़ से लोकसभा सांसद चुने गए।

साल 2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ, तो उस क्षेत्र में कांग्रेस को बहुमत था। यही कारण रहा कि कांग्रेस ने बिना देरी के अजीत जोगी को ही राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया। जोगी 2003 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे।

जोगी को 'सपनों का सौदागर' भी कहा जाता रहा है। साल 2000 में जब जोगी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो जोगी ने ख़ुद अपने को 'सपनों का सौदागार' कहा था। उन्होंने कहा था कि- 'हाँ मैं सपनों का सौदागर हूँ। मैं सपने बेचता हूँ।'

लंबे समय से थी तबीयत नासाज

हालांकि, उसके बाद प्रदेश के साबिक वजीरे आला अजीत जोगी की तबीयत खराब होती रही और उनका राजनीतिक ग्राफ भी गिरता गया। लगातार वह पार्टी में बगावती तेवर अपनाते रहे और अंत में उन्होंने अपनी अलग राह चुन ली। अजीत जोगी ने 2016 में कांग्रेस से बगावत कर अपनी अलग पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के नाम से गठन किया था। जबकि एक दौर में वो राज्य में कांग्रेस का चेहरा हुआ करते थे।

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