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फर्जी रॉयल्टी पर्ची मामले में अब तक नहीं हुई कार्रवाई, शासन को करोड़ो की चपत लगाने वाले हुए मनमौजी

फर्जी रायल्टी बुक से रायल्टी क्लेरेंस का गोरखधंधा का मामले सामने आने के बाद भी अब तक इस मामले से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है ।

फर्जी रॉयल्टी पर्ची मामले में अब तक नहीं हुई कार्रवाई, शासन को करोड़ो की चपत लगाने वाले हुए मनमौजी

फर्जी रायल्टी बुक से रायल्टी क्लेरेंस का गोरखधंधा का मामले सामने आने के बाद भी अब तक इस मामले से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है ।जबकि खनिज विभाग की ओर से इस मामले में 20 दिन पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी ।मामले में खनिज विभाग और पुलिस को कार्रवाई करना था लेकिन दोनों ने ही ख़ामोशी की चादर ओढ़ ली है ।

रायपुर जिले में विगत 2008 से यह कारोबार धड़ल्ले से चल रही थी।रायपुर जिले कई बड़ी ड्रीम प्रोजेक्ट जिसमे नया रायपुर परियोजना रायपुर से उड़ीसा फोरलेन बिलासपुर सिक्स लेंन कमल विहार सहित शासकीय निर्माण की कई खरबो की निर्माण कार्य हुए है।

जिसमे खनिज संपदा गौण खनिज का उपयोग हुए है।जिसमे 50 महज पैसे में शासन को 2000 एक पन्ने में शासकीय कोष को चुना लगाया गया है।निश्चित रूप से विभाग की सुस्त कार्यवाही की रवैया से पूरा चैनल नीचे से ऊपर इस घपले को अंजाम दिए है ? लाजमी है की विभाग इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने में लगे हुए है।शासन स्तर पर किये गए क्लेयरेन्श की जांच आडिट से बहुत बड़ी घोटाला सामने आने की बात कही जा रही है।

विभाग में जमे कर्मियों की भूमिका की जांच नहीं

मामले के ज्ञात आरोपी के विरुद्ध प्रशासन के द्वारा जारी आदेश का अब तक कही पता नही ।
विभाग अपने अधिकारी कर्मचारी को बचाने का खेल में लगे हुए है। खनिज विभाग में कई बाबू मलाईदार सीट पर 10-15 साल से कुंडली मार कर बैठे हैं, जो अफसरों के लिए 'कमाऊ पूत भी हैं। ऐसे बाबुओं को अफसरों का दोनों हाथों से समर्थन प्राप्त रहता है। रॉयल्टी क्लीयरेंस का काम संभालने वाले बाबू को खुद ही १५ साल से यहीं टिके हुए हैं।
अब जब रॉयल्टी क्लीयरेंसमें अरबों का घोटाला सामने आया है, इसके बाद भी बाबुओं का तबादला तो दूर आंतरिक फेरबदल भी नहीं किए गए है। जिसका खामियाजा विभाग और आम लोगों को भुगतना पड़ता है। खनिज विभागकी बात करें तो वहां कई बाबू ऐसे हैं, जिन्हें एक ही कुर्सी का काम करते 15 साल तक जहां एक ही सीट (एक ही काम का चार्ज) पर काम करते हुए कई बाबूओं की आधी जिंदगी बीत गई। कई बाबू ऐसे हैं, जो इस कदर जमे हैं कि रिटायरमेंट से पहले उस कुर्सी को छोडऩा ही नहीं चाहते हैं।

बदलते रहे कलक्टर पर बाबू नहीं

कई बार कलक्टर बदलने के बावजूद एक ही सीट पर बैठकर बाबू दोनों हाथों से माल समेटने में लगे हैं। कभी कभार किसी बाबू का ज्यादा विरोध होता है तो दिखाने भर के लिए एक-दो महीने के लिए चार्ज बदल दिया जाता है।

ठेकेदारों को सुविधा, बाबू खुद ही भरते हैं बैंक चालान

पड़ताल में पता चला कि खनिज विभाग में खनिज ठेकेदारों को विशेष सुविधाएं मिलती हैं। यहां परिवहन रॉयल्टी पर्ची जारी करने से पहले ठेकेदार को लीड बैंक में विभाग के नाम का चालान पटाना पड़ता है। इसके बाद चलान को देकर ही रॉयल्टी बुक मिलती है। लेकिन रायल्टी की कॉपी देने वाले बाबू अतिरिक्त शुल्क के साथ खुद चालानी की राशि लेकर रॉयल्टी बुक जारी कर देते हैं। रायल्टी बुक का सीरियल नंबर विभाग के सम्बंधित बाबू तथा लीज पट्टे धरियो को होता है।
जो की उसी सीरियल नंबर की दूसरी फर्जी बुक उसी पट्टे धारी के नाम से बाजार में तथा क्लीयरेंस में उपयोग किया जाना बहुत बड़ी धोखाधड़ी है । धोखाधड़ी के नेटवर्क का पर्दाफाश करने की बड़ी चुनौती पुलिस विभाग के पास आ खड़ी है। रायल्टी बुक का सीरियल नंबर विभाग से ही लीक होने के बाद पहले ही सामने आ चुकी है। जिसका फायदा उठा कर खनिज माफियाओं ने नकली रायल्टी बुक छाप कर क्लीयरेंस ले लिया।

विवेचना जारी है , जानकारी मांगी गई है

इस मामले में सिविल लाइन टीआई यदुमनी सिदार ने बताया कि खनिज विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर केस दर्ज है, इस मामले की विवेचना जारी है. अभी और भी जानकारी खनिज विभाग से मांगी गई है.
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