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खींचतान : नई राजधानी के शिलान्यास पत्थर पर बढ़ेगा संग्राम, मंत्रियों ने दिए संकेत- कई विकल्पों पर हो रहा मंथन

छत्तीसगढ़ की नई राजधानी के शिलान्यास स्थल और वहां स्थापित पत्थर काे लेकर आने वाले वक्त में संग्राम और बढ़ सकता है। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष साेनिया गांधी द्वारा शिलान्यास किए गए पत्थर के आईआईएम परिसर के भीतर जाने काे लेकर सरकार पहले ही अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुकी है।

खींचतान : नई राजधानी के शिलान्यास पत्थर पर बढ़ेगा संग्राम, मंत्रियों ने दिए संकेत- कई विकल्पों पर हो रहा मंथन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की नई राजधानी के शिलान्यास स्थल और वहां स्थापित पत्थर काे लेकर आने वाले वक्त में संग्राम और बढ़ सकता है। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष साेनिया गांधी द्वारा शिलान्यास किए गए पत्थर के आईआईएम परिसर के भीतर जाने काे लेकर सरकार पहले ही अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुकी है। इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार काे जिम्मेदार भी ठहराया है। ऐसे में अब शिलान्यास पत्थर काे सम्मानजनक ढंग से पुनर्स्थापित करने काे लेकर विकल्पाें पर विचार भी किया जा रहा है।

आईआईएम के भीतर शिलान्यास स्थल तक पहुंचने का रास्ता तैयार करने से लेकर शिलान्यास पत्थर काे किसी अन्य प्राइम लाेकेशन पर रखे जाने तक कई विकल्पाें पर सरकार विचार कर रही है। शनिवार काे वरिष्ठ मंत्री रविंद्र चाैबे और नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया ने भी कुछ इसी तरह के संकेत दिए।

सूत्राें से मिली जानकारी के अनुसार सरकार रायपुर से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे पर पूर्ववर्ती सरकार के खिलाफ सामने आ रही नाराजगी काे देखते हुए जल्द निर्णय़ लिया जा सकता है। नवा रायपुर में विधानसभा, राजभवन, सीएम हाउस और मंत्रियाें के बंगले बनाए जाने हैैं। सिविल लाइन के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने सेक्टर 24 काे पसंद किया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि सेक्टर 24 या नया रायपुर के किसी दूसरे प्राइम लाेकेशन पर शिलान्यास पत्थर काे स्थापित कर दिया जाए। मंत्रालय और सचिवालय के पास बने गार्डन या पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में बनाए गए किसी अन्य चाैक में भी इसे शिलान्यास पत्थर काे रखा जा सकता है। तमाम विकल्पाें के बीच यह तय है कि शिलान्यास पत्थर काे पुनर्स्थापित किया जाएगा। किसी भी सूरत में यह आईआईएम के भीतर वर्तमान स्वरुप में नहीं रहेगा।

चाैबे बाेले- बनेगी कार्ययाेजना

नवा रायपुर के शिलान्यास स्थल काे लेकर वरिष्ठ मंत्री रविंद्र चाैबे ने कहा, अभी कई विषयाें पर निर्णय लिया जाना बाकी है। मंत्रिमंडलीय कमेटी ने स्थल निरीक्षण किया था। सीएम भूपेश बघेल ने भी वहां पहुंचकर मंत्रियाें व अफसराें के निवास का स्थल देखा है। कहां विधानसभा, अफसराें और मंत्रियाें के निवास बनाए जाने हैं, इस पर निर्णय लिया गया हैै। अगर शिलान्यास पत्थर काे वहां रखा जाना है, ताे उसके लिए भी कार्ययाेजना बनाई जाएगी। उस पत्थर काे हटाकर किसी और सुंदर स्थान पर रखा जाना है, ताे ध्यान रखा जाएगा कि उसका सम्मान बना रहे। आने वाले समय में इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। दूसरी ओर नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया ने दाे टूक लहजे में कहा कि अभी शिलान्यास पत्थर पर निर्णय नहीं लिया गया है। जल्द ही इस पर फैसला हाेगा।

चौबे बोले-तो उम्मेन भी दोषी

एनआरडीए के तत्कालीन सीईओ एसएस बजाज के निलंबन पर पूर्व मंत्री राजेश मूणत और तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी पी. जॉय उम्मेन द्वारा उठा जा रहे सवालाें पर भी कृषिमंत्री रविंद्र चाैबे ने पलटवार किया। उन्हाेंने कहा, भाजपा सरकार की बदनीयती काे प्रदेश की जनता ने देखा है। नई राजधानी के स्थल चयन से लेकर विकास की याेजना कांग्रेस सरकार ने बनाई थी। 7500 हेक्टेयर की नई राजधानी में दाे एकड़ के शिलान्यास स्थल काे सुरक्षित रख देते ताे क्या बुराई हाेती, लेकिन पूर्व मंत्री राजेश मूणत की स्वीकाराेक्ति इस बात काे साबित करती है कि कांग्रेस सरकार ने जाे काम किया उसपर बदनीयती थी। जहां तक पी. जॉय उम्मेन का सवाल है, ये अपने अफसराें काे बचाने के लिए इस प्रकार की बातें कहते हैं। अगर उनके कार्यकाल में यह काम हुआ ताे बजाज के साथ वे भी दाेषी हैं।

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