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इलाज में लापरवाही, एक की आंख खराब, दूसरे की मौत, 8 साल बाद मिली डेढ़ लाख की क्षतिपूर्ति

8 साल पहले इलाज में बरती गई लापरवाही के एक मामले में एक व्यक्ति की एक आंख खराब हो गई और दूसरे मामले में एक महिला की मौत हो गई। दो

इलाज में लापरवाही, एक की आंख खराब, दूसरे की मौत, 8 साल बाद मिली डेढ़ लाख की क्षतिपूर्ति
रायपुर. 8 साल पहले इलाज में बरती गई लापरवाही के एक मामले में एक व्यक्ति की एक आंख खराब हो गई और दूसरे मामले में एक महिला की मौत हो गई। दोनों ही मामलों में पीड़ित परिवार इलाज में लापरवाही बरतने वाले सरकारी डॉक्टराें के खिलाफ मानव अधिकार आयोग में फरियाद लेकर गए। लंबी सुनवाई के बाद फैसला आया, वह भी चौंकाने वाला था। आयोग ने पहले को 50 हजार और दूसरे को एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने के लिए अनुशंसा की है।
पहले मामले के अनुसार राजनादगांव जिले के खैरागढ़ के वार्ड-05 निवासी बल्देव सिंह ने आयोग में शिकायत की थी। खैरागढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित नेत्र शिविर में 23 सितंबर 2011 को अपने आंख में हुए मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया। 24 सितंबर को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टर और इलाज में बरती जाने वाली लापरवाही के कारण उसके बांयी आंख की रोशनी चली गई। डॉ. बीआर आंबेडकर अस्पताल में आंखों की जांच करने पर पता चला कि उसकी आंख खराब हो गई है। इसकी शिकायत के आधार पर जांच हुई, तो पता चला कि बल्देव सिंह डायबिटीज ओर ग्लूकोमा से पीड़ित था। चेकअप में यूरिन जांच कराई गई, लेकिन ब्लड शुगर की जांच नहीं कराई गई। परिवार में एकलौता कमाने वाला बल्देव ने मामले की शिकायत मानव अधिकार आयोग में की। 8 साल की सुनवाई के बाद आयोग ने 17 जनवरी को पीड़ित को 50 हजार की मुआवजा राशि देने की अनुशंसा की।
उल्टी-दस्त के लिए नहीं दी दवा
दूसरे प्रकरण में खरसिया तहसील के ग्राम भेलवाडीह के शंभूनाथ की पत्नी रेशम बाई की 5 सितंबर 2011 को तबीयत खराब थी और उसे उल्टी-दस्त हो रहे थे। स्वास्थ्य के संबंध में उसने बीएमओ डॉ. सुरेश राठिया और स्वास्थ्य कार्यकर्ता दशरथराम पटेल को जानकारी दी। उन दिनों दोनाें वहां मौजूद थे, क्योंकि उल्टी-दस्त के कारण वहां शिविर लगाया गया था। शिविर लगाने बावजूद दोनों के माध्यम से इलाज में लापरवाही बरती गई। शिविर में इंजेक्शन होने के बावजूद डॉक्टर ने शंभूनाथ को इंजेक्शन खरीदकर लाने को कहा, कौन सा इंजेक्शन है, उसे नहीं बताया। इलाज नहीं होने के कारण तबीयत और भी खराब हो गई और रेशमबाई को खरसिया अस्पतलाल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मामले की शिकायत मानव अधिकार आयाेग में की गई। इस मामले में 17 जनवरी को आयोग ने मृतका के परिजनों को एक लाख रुपए मुआवजा राशि देने की अनुशंसा की है।
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