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नेत्रदान के संदेश को घर-घर पहुचाने की जरूरत : बृजमोहन अग्रवाल

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज यहां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा (25 अगस्त से आठ सितम्बर) का छत्तीसगढ़ में शुभारंभ किया।

नेत्रदान के संदेश को घर-घर पहुचाने की जरूरत : बृजमोहन अग्रवाल
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कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज यहां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा (25 अगस्त से आठ सितम्बर) का छत्तीसगढ़ में शुभारंभ किया। राजधानी रायपुर के भीमराव अम्बेडकर चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित शुभारंभ समारोह में अग्रवाल ने पखवाड़े के अंतर्गत नेत्रदान के प्रति जन - जागरूकता लाने के लिए अधिक से अधिक कार्यक्रम आयोजित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान का संदेश हर घर में पहुंचना चाहिए। इससे लोग नेत्रदान का महत्व समझेंगे। अग्रवाल ने नेत्रदान से संबंधित स्टीकर छपवाने के लिए स्वेच्छानुदान मद से 25 हजार रूपए की स्वीकृति दी और कहा कि स्टीकर घर-घर में लगना चाहिए। अग्रवाल ने इस अवसर पर सेवा सामाजिक संस्थान और विगर फाउण्डेशन द्वारा राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के मौके पर आयोजित विशाल निःशुल्क नेत्र रोग निदान शिविर का शुभारंभ भी किया।

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि वैसे तो हमारे शरीर में सभी अंगों का महत्वपूर्ण स्थान होता है, परन्तु इन अंगों में आंखों का महत्व सबसे ज्यादा है। सृष्टि और प्रकृति की सुन्दरता को निहारने के लिए दृष्टि की जरूरत होती है। मुझे लगता है कि दृष्टिहीनों को दैनिक जीवन में होने वाली समस्याओं को दृष्टि वाले लोग अच्छे से महसूस कर सकते हैं। अग्रवाल ने कहा कि नेत्रदान के प्रति आम लोगों में धीरे-धीरे जागरूकता आ रही है। लोगों को और अधिक जागरूक करने के लिए विविध कार्यक्रम करने की जरूरत है। नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक सु-व्यवस्थित संस्था खोलना चाहिए। कई बार हम देखते हैं कि मृत व्यक्ति के परिजन तत्काल नेत्रदान का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें सम्पर्क स्थल की जानकारी नहीं होती है। संस्था बनने से जरूरतमंद लोगों को सुविधा होगी। उन्होंने हर सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने से संबंधित कार्यक्रम रखने का सुझाव दिया। अग्रवाल ने कहा कि नेत्रदान के लिए जनजागरण सबसे ज्यादा जरूरी है। जनजागरण के तहत लोगों में नेत्रदान के संबंध में व्याप्त भ्रांतियों को भी दूर करने की कोशिश होनी चाहिए। राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर हम सब को सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए छत्तीसगढ़ को नेत्रदान के मामले में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने में संकल्प लेना होगा।
अम्बेडकर अस्पताल की डीन डॉ. आभा सिंह ने कहा कि सुन्दर दुनिया को देखने के लिए आंखों की जरूरत होती है। जिनकी आंखों की रौशनी नहीं है, उनकी दुनिया की कल्पना करने से ही बेहद पीड़ा होती है। डॉ. सिंह ने बताया कि देश में हर साल सवा करोड़ से डेढ़ करोड़ लोगों की मृत्यु होती है, लेकिन नेत्रदान की संख्या बेहद कम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर हमें आम जनता को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का बीड़ा उठाना होगा। आम लोगों को समझाना होगा कि मृत्यु के बाद भी दुनिया देख सकते हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के चार से छह घंटे के अन्दर आंखों की कार्निया को निकालना जरूरी होता है।
राज्य अंधत्व निवारण समिति के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि नेत्रदान के प्रति लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से हर साल राष्ट्रीय अंधत्व निवारण पखवाड़े का आयोजन किया जाता है। नेत्रदान से दृष्टिहीनों को दुनिया देखने के लिए रौशनी मिलती है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान में केवल आंखों की कार्निया ही ली जाती है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि नेत्रदान में जितनी भी कार्निया मिलती है, उन सबका सार्थक उपयोग किया जाता है। पिछले साल सबसे अधिक रिकार्ड संख्या में 378 लोगों ने नेत्रदान किया गया। इस साल पखवाड़े के दौरान विविध कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक करके 500 नेत्रदान कराने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि कार्निया में सफेदी की बीमारी को दूर करने के लिए पखवाड़े के तुरंत बाद दस सितम्बर से विशेष योजना शुरू की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश के एक हजार चिन्हित मरीजों का इलाज किया जाएगा। मिश्रा ने कहा कि नेत्रदान सामाजिक रूप से स्वीकार होने पर ही सभी दृष्टिहीनों को रोशनी देने का अभियान सफल होगा।

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