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नान घोटाले की खुली कुंडली, रोज SIT की बैठक, डायरी से होगी जांच की शुरुआत

36 हजार करोड़ के चर्चित नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले की दोबारा जांच करने कोर्ट से परमिशन मिलने के बाद एसआईटी की मैराथन बैठक शुरु हो गई है।

नान घोटाले की खुली कुंडली, रोज SIT की बैठक, डायरी से होगी जांच की शुरुआत

36 हजार करोड़ के चर्चित नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले की दोबारा जांच करने कोर्ट से परमिशन मिलने के बाद एसआईटी की मैराथन बैठक शुरु हो गई है।

ईओडब्ल्यू के रिकॉर्ड रूम में कैद फाइलों की कुंडली बन रही है। संभावना है, आरोपी अनिल टुटेजा से बरामद डायरी से जांच की शुरुआत होगी। हालांकि अभी एसआईटी घोटाले में जांच की शुरुआत करने बिंदु तैयार कर रही है, जिसमें पिछली जांच में आरोप तय नहीं किया गया था।

संभावना है, हफ्तेभर के होमवर्क के बाद घोटाले से जुड़े अफसर, राजनेता और अन्य से पूछताछ का सिलसिला शुरू होगा। दरअसल एसआईटी ने विगत गुरुवार को कोर्ट में आवेदन देकर दोबारा जांच शुरू करने मांग की थी।

उसी दिन कोर्ट ने जांच करने परमिशन दी थी, जिसके बाद एसआईटी पुरानी जांच फाइलों को इकट्ठा करने में जुट गई है। फिलहाल एसआईटी के बैठकों का दौर ईओडब्ल्यू दफ्तर में हो रहा है। इससे साफ है, एसआईटी का इन्वेस्टिगेशन दफ्तर वहीं रहेगा।

ईओडब्ल्यू दफ्तर में बैठेगी एसआईटी टीम
जानकारी के मुताबिक ईओडब्ल्यू के आईजी एसआरपी कल्लूरी के नेतृत्व में एडिशनल एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और विधि विशेषज्ञ समेत 11 और सदस्यों की एसआईटी बनाई गई है, जाे अब नागरिक आपूर्ति निगम के घोटाले की जांच करेगी। संभावना है, नान घोटाले में जब्त डायरी के उन 101 पन्नों की कहानी बाहर आएगी, जो अब तक फाइलों में कैद है।

साल 2015 में फूटा था घोटाला
जानकारी के मुताबिक साल 2015 में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने नागरिक आपूर्ति निगम के दफ्तरों में छापा मारा था। इस दौरान ब्यूरो ने भारी मात्रा में नकद और एक डायरी बरामद की थी। डायरी में कुछ रसूखदार लोगों के नाम थे। बाद में इस मामले में ब्यूरो ने आईएएस आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा समेत 18 अफसरों तथा अन्य को आरोपी बनाया था।

एसआईटी को फाइल का इंतजार
एसआईटी चीफ और आईजी रेंज बस्तर विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि झीरम घाटी केस की फाइल अब तक राष्ट्रीय जांच एजेंसी से नहीं मिली है। फाइल मिलने के बाद एसआईटी की बैठक कर केस की खामियाें का अध्ययन किया जाएगा, फिर जांच के बिंदु निर्धारित होंगे, जिसके बाद जांच की शुरुआत होगी। जरूरत के हिसाब से गवाहों और अन्य से पूछताछ भी की जाएगी।
दरअसल वर्ष 2013 में बस्तर के झीरम घाटी में माओवादी हमले के दौरान तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल समेत कांग्रेस के 29 नेताओं की हत्या कर दी गई थी। तत्कालिक भाजपा सरकार ने इसकी जांच एनआईए को सौंपी थी।
कांग्रेस पार्टी इस नरसंहार को राजनीतिक हत्या बताते हुए एनअाईए की जांच से संतुष्ट नहीं थी। हाल में शासन ने आईजी विवेकानंद के नेतृत्व में 10 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
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