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रायपुर के मच्छरों से परेशान हुए देशभर के खिलाड़ी, मैच हारे, ले जाना पड़ा हॉस्पिटल

64वें राष्ट्रीय शालेय खेल की मेजबानी कर रहा छत्तीसगढ़ अपने मेहमान खिलाड़ियों को मच्छरों से नहीं बचा पाया। खाने-पीने से लेकर रहने और प्रदूषणमुक्त वातावरण से यहां के खिलाड़ी तो खुश नजर आए, लेकिन मच्छरों ने उन्हें मैच हरा दिया।

रायपुर के मच्छरों से परेशान हुए देशभर के खिलाड़ी, मैच हारे, ले जाना पड़ा हॉस्पिटल
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64वें राष्ट्रीय शालेय खेल की मेजबानी कर रहा छत्तीसगढ़ अपने मेहमान खिलाड़ियों को मच्छरों से नहीं बचा पाया। खाने-पीने से लेकर रहने और प्रदूषणमुक्त वातावरण से यहां के खिलाड़ी तो खुश नजर आए, लेकिन मच्छरों ने उन्हें मैच हरा दिया।
राष्ट्रीयस्तर की इस प्रतियोगिता में 18 राज्यों के खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। 26 दिसंबर को समापन के बाद गुरुवार को खिलाड़ियों की वापसी हो जाएगी। बुधवार को कई खिलाड़ी समापन उत्सव का आनंद लेने के बजाय हॉस्पिटल के चक्कर लगाते नजर आए।
खिलाड़ियों का कहना है कि जितने मच्छर उन्हाेंने यहां चार दिनों में देखे, उतने मच्छर उन्होंने पूरी जिंदगी में नहीं देखे। कुछ खिलाड़ियों का कहना रहा कि रातभर मच्छरों के कारण नींद पूरी नहीं हो सकी। इसका असर खेल पर भी पड़ा। जम्मू-कश्मीर, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, असम और पंजाब सहित 18 राज्य के खिलाड़ी आए हुए हैं।

क्वॉइल भी असर नहीं करता

खिलाड़ियों ने पहली रात ही मच्छरों की शिकायत संबंधित अधिकारियों से कर दी थी। शिकायत के बाद उन्हें मच्छर भगाने वाला क्वॉइल, लिक्विड, अगरबत्ती और स्प्रे दिए गए। खिलाड़ियों को इससे भी राहत नहीं मिली।

कश्मीर के कोच खुर्शीद अहमद कहते हैं, यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। मच्छर की शिकायत करते ही उन्होंने हमें क्वाॅइल और दूसरी चीजें तुरंत लाकर दी, लेकिन यहां के मच्छरों पर यह सब भी असर नहीं करते। हमें रातभर मच्छरों ने बहुत परेशान किया। यहां दिन में भी मच्छर काटते हैं।

हॉस्पिटल ले जाना पड़ा

महाराष्ट्र टीम के कोच प्रफुल्ल गावंडे ने बताया कि महाराष्ट्र की टीम यहां थ्रो-बॉल में हिस्सा लेने के लिए आई हुई है। मच्छरों के काटने के कारण दो खिलाड़ियों के चेहरे और हाथों पर छोटे दाने उभर आए हैं। सावधानी बरतते हुए हमें खिलाड़ियों को हॉस्पिटल लेकर जाना पड़ा।

कालीबाड़ी स्थित एक हॉस्पिटल में खिलाड़ियों को लेकर गए, जहां उन्हें कुछ दवाइयां दी गईं। यहां प्रदूषण का स्तर हमारे राज्य की तुलना में बहुत कम है। हवा शुद्ध है। बस मच्छरों ने परेशान कर दिया। बाकी चीजें बढ़िया रहीं। वहीं कश्मीर, पंजाब, असम और दूसरे पहाड़ी क्षेत्रों से आए खिलाड़ी और टीम के मैनेजिंग मेंबर यहां के पानी से परेशान रहे। कश्मीर के छात्रों ने कहा कि छग का पानी नमकीन है।

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