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छत्तीसगढ़: राजधानी में जुटेंगे दस हजार से अधिक सरपंच, प्रदर्शन करेंगे

शिक्षाकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के बाद अब पंच-सरपंच अपनी मांगों को लेकर लामबंद हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़: राजधानी में जुटेंगे दस हजार से अधिक सरपंच, प्रदर्शन करेंगे
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शिक्षाकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के बाद अब पंच-सरपंच अपनी मांगों को लेकर लामबंद हो रहे हैं। मानदेय समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर राजधानी में प्रदेश के 10 हजार से अधिक सरपंच प्रदर्शन करेंगे। इसमें आधी महिला जनप्रतिनिधि होंगी। 7 अप्रैल को प्रदर्शन की रणनीति तय की जाएगी। प्रदर्शन के लिए अब तक की संभावित तिथि 10 अप्रैल बताई जा रही है।

प्रदेशभर में ग्राम पंचायतों की संख्या 10 हजार 968 है। बीते दिनों सरपंचों ने एक संगठन और पदाधिकारियों का ऐलान किया। इसमें प्रदेश सरपंच संघ छत्तीसगढ़ का गठन किया। इसके बैनर तले अपनी मांगों को लेकर सरपंचों ने बीते दिनों विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को ज्ञापन भी सौंपा था।
जब उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ, तो सरपंचों ने अब प्रदर्शन की ठानी है। सरपंचों की अधिकतर मांगें योजना के क्रियान्वयन का सरलीकरण का सुझाव है। प्रदर्शन में प्रदेश सरपंच संघ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पंच-सरपंच शामिल होंगे।
बता दें कि सरपंच संघ में भाजपा, कांग्रेस, जोगी कांग्रेस और निर्दलीय सरपंच भी हैं।

ये है प्रमुख मांग

सरपंचों को बैठक भत्ता 2000 रुपए के बजाए 15 हजार रुपए मानदेय तथा पंचों को 200 के बजाए 2000 रुपए मानदेय दिया जाए। अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सरपंच को हटाने की प्रक्रिया हटाई जाए। मनरेगा कार्य का सामाजिक अंकेक्षण बंद किया जाए।
शौचालय निर्माण में अधिकारी अनैतिक दबाव न डालें तथा अग्रिम राशि पंचायतों के खाते में भेजना चाहिए। निर्माण कार्य की राशि एकमुश्त जनपद पंचायतों के खाते में भेजी जाए ताकि मूल्यांकन-सत्यापन के बाद तत्काल भुगतान किया जा सके।
मनरेगा की जटिलता हटाई जाए, मनरेगा कार्य की योजना बनाते समय सरपंचों को भी शामिल किया जाए। मनरेगा कार्य की एजेंसी ग्राम पंचायत है, इसलिए पक्का निर्माण कार्य में भुगतान का अधिकार ग्राम पंचायतों को दिया जाए। कई बार गुणवत्ताविहीन कार्य का भुगतान भी शासन ठेकेदार को कर देता है।

अधिकारों के लिए प्रदर्शन करेंगे

10 अप्रैल को राजधानी में 10 हजार से अधिक सरपंच अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करेंगे। इसके लिए 7 अप्रैल को प्रदर्शन की रणनीति तय की जाएगी। हम अपनी मांग प्रदेश के मुखिया को पहले सौंप चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का जवाब नहीं आने पर हम प्रदर्शन के लिए मजबूर हैं।

- हिम्मत चंद्राकर, प्रदेश संयोजक, प्रदेश सरपंच संघ छत्तीसगढ़

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