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राष्ट्रीय कृषि मेले में बीज बुवाई के आधुनिक उपकरण न्यूमैटिक प्लांटर का होगा प्रदर्शन

इस प्लांटर की विशेषता है कि इसमें पौधे से पौधे एवं कतार से कतार की दूरी को सटीकता के साथ समान रखा जा सकता है साथ ही बीज की समुचित गहराई पर बुवाई की जा सकती है। यह यंत्र एयर सक्शन आधार पर कार्य करता है और एक समय पर एक बीज का रोपण करता है, जिससे मूल्यवान बीज की खपत में कमी आती है और फसल उत्पादकता बढ़ती है।

राष्ट्रीय कृषि मेले में बीज बुवाई के आधुनिक उपकरण न्यूमैटिक प्लांटर का होगा प्रदर्शन

रायपुर. छत्तीसगढ़ के तुलसी बाराडेरा में 23 फरवरी से शुरू होने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले में किसानों को परम्परागत सीड ड्रिल बुवाई यंत्र से हटकर बीज की बुवाई करने वाले आधुनिक तकनीक पर आधारित न्यूमैटिक प्लांटर का प्रदर्शन देखने को मिलेगा। इस प्लांटर की विशेषता है कि इसमें पौधे से पौधे एवं कतार से कतार की दूरी को सटीकता के साथ समान रखा जा सकता है साथ ही बीज की समुचित गहराई पर बुवाई की जा सकती है। यह यंत्र एयर सक्शन आधार पर कार्य करता है और एक समय पर एक बीज का रोपण करता है, जिससे मूल्यवान बीज की खपत में कमी आती है और फसल उत्पादकता बढ़ती है।

प्रमुख सचिव कृषि एवं कृषि उत्पादन आयुक्त मनिन्दर कौर द्विवेदी ने बताया कि 23 से 25 फरवरी के बीच लगने वाले इस राष्ट्रीय कृषि मेला में कृषि इंजीनियरिंग विभाग द्वारा अनेक नये एवं आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा, जो न केवल प्रगतिशील किसानों के लिए उपयोगी होगा बल्कि अपने खेती-बाड़ी को आगे बढ़ाने वाले किसानों के लिए आकर्षण का केन्द्र होगा। न्यूमैटिक प्लांटर इसी तरह का एक नवीन विकशित कृषि उपकरण है। यह उपकरण प्रदर्शन के साथ-साथ अनुदान पर किसानों को विक्रय के लिए भी उपलब्ध रहेगा। इसकी ऑनलाइन बुकिंग की भी सुविधा है। इच्छुक किसान मेले में खसरा, बी-1, परिचय पत्र जैसे आधार कार्ड, बिजली का बिल छायाप्रति एवं जाति प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज लाकर स्टाॅल के माध्यम से ही कृषि उपकरणों का अनुदान के लिए बुकिंग करा सकतें है।

उल्लेखनीय है कि कृषि के अग्रणी क्षेत्रों में न्यूमैटिक प्लांटर लोकप्रिय उपकरण बन गया है। इसमें प्रति एकड़ डेढ़ से दो किलो ग्राम तक बीज की बचत होती है, साथ ही चार से छः प्रति एकड़ खाद की बचत भी होती है। इसके अलावा बीज हानि नहीं होती और बुवाई की लागत में कमी आती है। इसमें माध्यम से मक्का, चना, सोयाबीन, सूरजमूखी, मूंगफल्ली, उरद, मूंग, सरसों एवं अन्य फसलें ली जा सकती है। इसकी अनुमानित कीमत छः से साढ़े छः लाख रूपये होती है जिस पर एक से सवा दो लाख रूपये तक ट्रेक्टर के हार्स पाॅवर के आधार पर अनुदान राशि प्राप्त हो सकती है।

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