logo
Breaking

मीडिया ने किया छात्रावास अधीक्षीका के कारनामों का भांडा फोड़, तो फोन पर कही ये बात...

आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित पेंड्रा अनुविभाग के कन्या छात्रावासों में छात्राएं भगवान भरोसे रह रही हैं। कन्या छात्रावासों में शीतकालीन अवकाश में गई अधीक्षिकाएं अभी तक छात्रावास वापस नहीं आई हैं। वहीं दूसरी ओर छात्रों की सुरक्षा के लिए रखी गईं महिला सुरक्षाकर्मी तक छात्रावासें से नदारद हैं।

मीडिया ने किया छात्रावास अधीक्षीका के कारनामों का भांडा फोड़, तो फोन पर कही ये बात...
आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित पेंड्रा अनुविभाग के कन्या छात्रावासों में छात्राएं भगवान भरोसे रह रही हैं। कन्या छात्रावासों में शीतकालीन अवकाश में गई अधीक्षिकाएं अभी तक छात्रावास वापस नहीं आई हैं। वहीं दूसरी ओर छात्रों की सुरक्षा के लिए रखी गईं महिला सुरक्षाकर्मी तक छात्रावासें से नदारद हैं।
ऐसे में न सिर्फ छात्राओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है बल्कि छात्राओं के अंदर किसी भी प्रकार की अनहोनी का डर बना रहता है। वहीं मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्यपालिक दंडाधिकारिओं को इन छात्रावासों में जांच के लिए भेजा है और उसके बाद कार्यवाही की बात भी कर रहा है।
बिलासपुर जिले के पेंड्रारोड आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित कन्या छात्रावासों में छात्राओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है। क्योंकि ज्यादातर छात्रावासों में रात के समय अधीक्षिकाएं नदारद रहती हैं। पेंड्रा विकासखंड के कोटमी सकोला के 50 बेड वाले प्रीमैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास की अधीक्षिका शीतकालीन अवकाश पर गई हैं। जो अभी तक छुट्टी से लौटकर वापस नहीं आई है।
जबकि स्कूल शुरू हुए 5 दिन हो गए हैं। वहीं छात्रावास की होमगार्ड भी इतने समय से नदारद है ऐसे में छात्रावास की 50 छात्राएं खौफ के सायें में रह रही हैं।
जब महिला अधीक्षक को पड़ी भनक
बता दें पांच दिन से छात्रावास से गायब अधीक्षकों को जब उसकी रसोइए के माध्यम से यह जानकारी लगी की कि मीडिया के सामने उनके 5 दिनों से छात्रावास से गायब रहने की बात आ गई है। सकोला छात्रावास अधीक्षका बिलासपुर से बाई रोड पेण्ड्रा पहुंच गयीं।
पहले तो अधीक्षिका महोदय ने स्थानीय शिक्षकों से फोन करा कर खबर नहीं चलाने की गुजारिश की पर जब उन्हें लगा कि बात हाथ से निकल गई है तो फोन करके मीडियाकर्मियों को धमकी देना शुरू कर दिया।
मीडियाकर्मियों को देने लगी फोन पर धमकी
महिला अधीक्षिका महोदय मीडियाकर्मियों को झूठे मामले में फंसाकर पुलिस में शिकायत करने की धमकी देने लग गई। मामले की सूचना जब अनुविभागीय अधिकारी को दी गई तो उन्होंने इसकी गंभीरता देखते हुए तुरंत ही दोनों छात्रावासों की स्थिति जानने पेंड्रा और मरवाही तहसीलदार को अलग-अलग इन छात्रावासों में भेजा साथ ही असिस्टेंट कमिश्नर आदिवासी विभाग बिलासपुर को भी फोन से सूचना दी और छात्रावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी बात कही।
गौरतलब है बस्तर में हुए झलियामारी कांड के बाद से प्रशासन ने कन्या छात्रावासों की सुरक्षा काफी कड़ी और चाक चौबंद करना शुरू किया था जिसके लिए सभी छात्रावासों में महिला होमगार्ड की भी नियुक्ति की गई थी पर जब हॉस्टल के अधीक्षक ही इस तरह कई कई दिन और रात में गायब हो रहे रही हैं तो इन छात्रावासों अधीक्षिकाओ के भरोसे रहने वाली मासूम छात्राओं की सुरक्षा कैसे संभव होगी।
नहीं मिलता ढंग का खाना
छात्राओं का कहना है खाने में दाल, चावल और आलू की सब्जी ही दी जाती है। हरी सब्जी खाए तो जमाना हो गया है। इतना ही नहीं हॉस्टल की अधीक्षिका मेडम भी सिर्फ 1 या 2 घंटे के लिए ही छात्रावास आती हैं और चली जाती हैं।
छात्राओं का कहना है अधी​क्षिका कभी भी रात में हॉस्टल में नहीं रुकती। ऐसे में हम सब एक रसोइए के भरोसे पर ही रह रही हैं। छात्राओं ने बताया कि विभाग की ओर से उन्हें जो कंबल दिए गया वह भी बदबूदार है। इतनी पतले हैं कि उनसे भी ठंड नहीं जाती। यहां तक की उन्हें एक महीने में एक साबुन और एक शैंपू का ही पाउच देती है।
Share it
Top