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लोकसभा चुनाव 2019 छत्तीसगढ़ : बस्तर के आदिवासी क्षेत्र में बघेल बनाम मोदी- जानें पूरा समीकरण

पिछले 20 साल से 1998 से बस्तर लोकसभा सीट में भाजपा का कब्जा है। लेकिन 2019 का चुनाव कई मामलों में चुनौती भरा होगा। क्योंकि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में 68 सीट जीतकर कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाई। इसमें बस्तर संसदीय सीट में आने वाले 8 विधानसभा में दंतेवाड़ा को छोड़कर अन्य 7 सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत हुई।

लोकसभा चुनाव 2019 छत्तीसगढ़ : बस्तर के आदिवासी क्षेत्र में बघेल बनाम मोदी- जानें पूरा समीकरण
पिछले 20 साल से 1998 से बस्तर लोकसभा सीट में भाजपा का कब्जा है। लेकिन 2019 का चुनाव कई मामलों में चुनौती भरा होगा। क्योंकि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में 68 सीट जीतकर कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाई। इसमें बस्तर संसदीय सीट में आने वाले 8 विधानसभा में दंतेवाड़ा को छोड़कर अन्य 7 सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत हुई। इस हिसाब से तीसरी बार चुनाव में संभावित प्रत्याशी दिनेश कश्यप के लिए जीत की राह आसान नहीं है। 2014 में दिनेश ने सवा लाख वोट से चुनाव जीता था। बस्तर में विधानसभा और लोकसभा चुनाव का परिणाम हमेशा से अप्रत्याशित रहा है। 2013 के विधानसभा चुनाव में 8 में से 5 पर कांग्रेस के विधायक चुनाव जीते। लेकिन एक साल बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में सभी 8 विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी दिनेश कश्यप को लीड मिली। इस हिसाब से लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे अहम होते हैं। 2019 के चुनाव में भाजपा के पास वर्तमान सांसद दिनेश कश्यप के अलावा कोई नया चेहरा नहीं है। हाल ही में विधानसभा चुनाव हारे कुछ नेता ही लोकसभा में टिकट के लिए जोर लगा रहे हैं। जबकि कांग्रेस में नए चेहरे को मौका देने की कवायद चल रही है। नए चेहरों में उद्योग मंत्री कवासी लखमा के पुत्र सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी, महेन्द्र कर्मा के पुत्र पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छविन्द्र कर्मा ने दावेदारी ठोकी है। वहीं पूर्व मंत्री शंकर सोढ़ी जो पूर्व में 2009 के चुनाव में पराजित हुए थे, वे भी दावेदारों में शामिल हैं। कांग्रेसी खेमे से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान विधायकों में कवासी लखमा और लखेश्वर बघेल ने लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है। इसलिए चित्रकोट विधायक दीपक बैज का नाम प्रमुखता से सामने आया है। पिछले दिनों टाटा से जमीन ग्रामीणों को वापस लौटाने के कार्यक्रम में पहुंचे राहुल गांधी और भूपेश बघेल दीपक बैज के भाषण को सुनकर काफी खुश हुए थे। दीपक युवा नेता भी हैं और पिछला दो चुनाव जीत चुके हैं।
मुचाकी कोसा का नहीं टूटा रिकार्ड
1952 में हुए पहले चुनाव में महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव की ओर से खड़े किए गए निर्दलीय प्रत्याशी मुचाकी कोसा ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल की थी। जिसका रिकार्ड 67 साल बाद भी नहीं टूटा है। मुचाकी कोसा को 177588 और कांग्रेस प्रत्याशी सुरती किस्टैया को 36257 वोट मिले थे। कोसा ने 141331 वोट के अंतर से चुनाव जीता था उसके बाद हुए सभी चुनाव में जीत का अंतर इससे अधिक नहीं हुआ है।
अपने दम पर जीतते थे बलीराम और मानकु
बस्तर सीट के लिए हुए 17 चुनाव में 4 बार लगातार 1998, 1999, 2004 और 2009 में भाजपा से बलीराम कश्यप ने चुनाव जीता। वैसे उन्होंने कुल 6 बार बस्तर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन 1971 और 1984 में उन्हें हार मिली। वहीं मानकु राम सोढ़ी को बस्तर का गांधी कहा जाता था। बलीराम और महेन्द्र कर्मा की तरह मानकु राम सोढ़ी को दबंग और तेज तर्रार नेता के रूप में ख्याति नहीं मिली, लेकिन सीधे सरल स्वभाव के कारण उन्होंने लगातार तीन बार कांग्रेस पार्टी की तरफ से 1984, 1989 और 1991 में प्रत्याशी रहकर चुनाव जीते। लेकिन दो बार 1996 और 1998 में चुनाव हारे। इस बार देखना रोचक होगा कि किसके नाम पर कौन सी पार्टी वोट पाती है।
बलीराम के नाम पिता-पुत्र को हराने का रिकार्ड
भाजपा के सर्वमान्य नेता बलीराम कश्यप ने बस्तर के दो बड़े नेता मानकु राम सोढ़ी और महेन्द्र कर्मा को लोकसभा चुनाव में हराया, वहीं उनके पुत्र को भी चुनाव में मात दी। शंकर सोढ़ी और दीपक कर्मा को भी बलीदादा ने पराजित किया।
आदिवासी वोट बैंक पर सबकी नजर
इंदिरा और राजीव गांधी के समय बस्तर के आदिवासी वोट बैंक कांग्रेस के पास रहा। उस दौरान जितने भी चुनाव होते थे उसमें कांग्रेस प्रत्याशी जीतते रहे, चाहे प्रत्याशी कोई भी हो। लेकिन कांग्रेस का उम्मीदवार होने से आदिवासियों का वोट उन्हें हासिल होता रहा। लेकिन 2003 के बाद जब से प्रदेश में रमन सिंह की सरकार बनी उस समय से आदिवासी वोट बैंक भाजपा के पाले में चला गया। 15 साल के सत्ता के बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में बस्तर संभाग के 12 में से 11 सीट पर कांग्रेस को जीत मिली और एक बार फिर आदिवासी वोट कांग्रेस की ओर चला गया।
(सुरेश रावल, जगदलपुर)
बस्तर में कब कौन जीता चुनाव
1952 मुचाकी कोसा निर्दलीय
1957 सुरती किस्टैया कांग्रेस
1962 लखमु भवानी निर्दलीय
1967 झाडु सुंदरलाल निर्दलीय
1971 लंबोधर बलीहार निर्दलीय
1977 दृगपाल शाह भारतीय लोक दल
1980 लक्ष्मण कर्मा कांग्रेस
1984 मानकुराम सोढ़ी कांग्रेस
1989 मानकुराम सोढ़ी कांग्रेस
1991 मानकुराम सोढ़ी कांग्रेस
1996 महेन्द्र कर्मा निर्दलीय
1998 बलीराम कश्यप भाजपा
1999 बलीराम कश्यप भाजपा
2004 बलीराम कश्यप भाजपा
2009 बलीराम कश्यप भाजपा
2011 दिनेश कश्यप भाजपा
2014 दिनेश कश्यप भाजपा
(गौरतलब है कि महेंद्र कर्मा भी अपना पहला चुनाव निर्दलीय जीते।)
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