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जानिये रविवि को क्यों मिला हाईकोर्ट से नोटिस

हाईकोर्ट ने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को व्यासनारायण पुनर्मूल्यांकन प्रकरण पर चार हफ्ते में जवाब देने कहा है।

जानिये रविवि को क्यों मिला हाईकोर्ट से नोटिस
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हाईकोर्ट ने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को व्यासनारायण पुनर्मूल्यांकन प्रकरण पर चार हफ्ते में जवाब देने कहा है। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में हुए पुनर्मूल्यांकन घोटाले के संबंध में छात्र नेता शांतनु झा द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं प्रोफेसर दुबे को 4 सप्ताह का समय जवाब प्रस्तुत करने के लिए दिया है।
हाईकोर्ट द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद पुनर्मूल्यांकन प्रकरण एक बार फिर खुल गया है। विश्वविद्यालय द्वारा प्रकरण बंद किए जाने के वक्त कुलपति प्रो. एसके पांडेय थे, जबकि वर्तमान कुलपति प्रो. केएल वर्मा हैं। ऐसे में पूर्व कुलपति की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

सुनियोजित रूप से बचाने का आरोप

याचिकाकर्ता शांतनु झा की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अखंड प्रताप पांडेय ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुनियोजित रूप से इस घोटाले से प्रोफेसर दुबे को बचाया है। जांच समितियों की रिपोर्ट के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। साक्ष्य प्रस्तुत न करते हुए उन्हें सभी आरोपों से मुक्त होने का अवसर दिया गया तथा अपने कार्यकाल के अंतिम दिवस में पूर्व कुलपति ने आनन-फानन में ही उनको बहाल कर दिया।

न्यायालय की कड़ी टिप्पणी

प्रोफेसर दुबे की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि अब वे सेवानिवृत्त हो गए हैं। इस पर न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, सेवानिवृत्त होने से वे आरोपों से मुक्त नहीं हो जाते। भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि घोटाले के सामने आने के बाद से ही छात्रों ने इसका विरोध करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहने के बाद भी विद्यालय प्रशासन के संरक्षण के कारण कार्यवाही नहीं हो सकी थी।

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