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कानन पेंडारी जू की दुर्दशा पर सेन्ट्रल जू अथारिटी ने जारी किया नोटिस, तत्काल मांगा जवाब

कानन पण्डारी जू की दुर्दशा को लेकर की गई शिकायत को अत्यन्त गंभीरता से लेते हुए सेन्ट्रल जू अथार्टी के सदस्त सचिव डाॅ. डी.एन.सिंह ने मुख्य वनजीव संरक्षक छत्तीसगढ़ को शिकायत की प्रति भेजकर आरोपों पर तत्काल जवाब मांगा है।

कानन पेंडारी जू की दुर्दशा पर सेन्ट्रल जू अथारिटी ने जारी किया नोटिस, तत्काल मांगा जवाब
कानन पेंडारी जू की दुर्दशा को लेकर की गई शिकायत को अत्यन्त गंभीरता से लेते हुए सेन्ट्रल जू अथार्टी के सदस्त सचिव डाॅ. डी.एन.सिंह ने मुख्य वनजीव संरक्षक छत्तीसगढ़ को शिकायत की प्रति भेजकर आरोपों पर तत्काल जवाब मांगा है। पत्र की प्रति सचिव वन विभाग तथा वनमंडलाधिकारी बिलासपुर को भी भेजी गई है।
दरअसल प्रसिद्ध वाईल्ड लाईफ ऐक्टिविस्ट भोपाल निवासी अजय दुबे 30-31 अगस्त को कानन पण्डारी जू घूमने आये थे जानवरों की दुर्दशा देखकर वे विचलित हो गये उन्होंने स्थानीय लोगों से जू की दुर्दशा को लेकर जानकारी इकट्ठी की और अजय दुबे ने ई-मेल भेजकर सेन्ट्रल जू अथार्टी को शिकायत दर्ज करवाई।

क्या लिखा है शिकायत में

वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए बने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित कानन पण्डारी जू में प्रबंधन की लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं में असंवेदनशील रवैये के कारण अधिकतर वन्य प्राणियों की सेहत खराब है। बारिश के कारण गंदगी में कई प्राणी विशेषकर हिरण प्रजाति के सदस्य बीमार हैं और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में इलाज कामगार सिद्ध नहीं हो रहा है। मैं स्वयं यहां उपस्थित होकर कल दिनांक 30 अगस्त 2018 और आज 31 अगस्त 2018 को इस जू में बदहाल स्थिति देख रहा हुं । वन्य प्राणियों को निमोनिया और अन्य बीमारियों से पीड़ित होने की जानकारी स्थानीय सूत्रों से मिली है।

यह भी लिखा शिकायत में

काननू पेंडारी में जू नियमों और वन्यप्राणी अधिनियम का गंभीर उल्लंघन स्पष्ट दिख रहा है। बाड़ों सहित जू में गंदगी का अंबार है स्टाफ वर्दी पहने नहीं दिखता स्वयं स्टाफ कर्मियों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होता खाद्य सामग्री भी घटिया देने की सूचना मिली पर्यटकों पर निगरानी की पुख्ता व्यवस्था नहीं है जिससे वन्य प्राणियों के साथ छेड़छाड़ होती है।
अजय दुबे ने लिखा कि इस जू में पूर्व में भी एंथे्रक्स नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित कई वन्य प्राणियों की मौत हुई थी और इसकी शिकायत भी मैंने पूर्व में 2014-15 में करी थी लेकिन आज तक न तो कोई पुख्ता वन्य प्राणी स्वास्थ्य सेवाएं स्थापित हुई और न ही उस वक्त की गंभीर लापरवाही के जिम्मेदारों पर कार्यवाही हुई।
अजय दुबे ने उच्च स्तरीय जांच करवाकर मूक दुर्लभ प्रजाति के वन्यप्राणियों की सुरक्षा की मांग की है।गौरतलब है कि हाल ही में कानन पण्डारी में तीन चैसिंगों की मौत हो चुकी है तथा कई बायसन, चीतल, बारहसिंघा, बार्किंग डीयर, सांभर और नीलगाय निमोनिया से पीड़ित है।
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