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कांकेर : सरकारी राशन दुकानों में मुनाफाखोरी, आदिवासी परेशान

आदिवासियों का आरोप- दुकानदार अधिक दामों पर सामान नहीं लेने पर भड़क जाता है और दुर्व्यवहार करता है। पढ़िए पूरी खबर-

सरकार की तरफ से दिए जा रहे आटे में घोटाला, चार किलो तक आटा कम दिया जा रहा
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प्रतीकात्मक चित्र

कांकेर। कोरोना वायरस के कारण देश संकट की घड़ी से गुजर रहा है। ऐसे समय में सरकारी राशन दुकानदार छत्तीसगढ़ सरकार के आदेश के बाद भी मुनाफाखोरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। गरीब का रोजगार बंद है लेकिन, मुनाफाखोर उनसे पैसे वसूलने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

यह मामला कांकेर जिले के आमाबेड़ा इलाके का है, जहां आदिवासियों को दो महीने का राशन, नि:शुल्क देने की बजाय दुकान संचालक उनसे पैसे वसूल रहे हैं। ग्राम पंचायत कोलियारी में सरकारी राशन दुकान के संचालक द्वारा ग्रामीणों से चावल की कीमत वसूली जा रही है। आदिवासी परिवारों को 17 रुपये किलो बिकने वाले गुड़ और शक्कर लेने के लिए 40 रुपये चुकाना पड़ रहा है और यहां 36 रुपये लीटर मिट्टी तेल के बदले 40 रुपया देना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि राशन दुकान संचालक अधिक दामों पर सामान नहीं लेने पर भड़क जाता है और आदिवासियों के साथ दुर्व्यवहार करता है।

इस मामले में कांकेर कलेक्टर केएल चौहान ने जांच कराने का आश्वासन दिया है। डीएम ने कहा कि मामले की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

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