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हरिभूमि के खुलासे पर सेंट्रल जू अथॉरिटी ने बिठाई जांच, जानिए क्या था पूरा मामला...

सेंट्रल जू अथॉरिटी ने हरिभूमि की खबर का उल्लेख करते हुए धमतरी में चल रहे अवैध जू पर जाँच बिठाई है. inh न्यूज़ चैनल ने भी इस मामले में प्रमुखता से खबर प्रसारित की थी. धमतरी के रतावा में हंसराज देव नामक व्यक्ति प्राइवेट चिड़ियाघर संचालित करता है. मुखबिर की सूचना पर बीते दिनों ने वन विभाग की टीम ने छापामार कार्रवाई भी की थी. हरिभूमि में खबर छपते ही बात सेंट्रल जू अथॉरिटी तक पहुँच चुकी है. सेंट्रल जू अथॉरिटी ने बाकायदा हरिभूमि में छपे खबर का उल्लेख करते हुए मामले पर जाँच बिठा दी है.

हरिभूमि के खुलासे पर सेंट्रल जू अथॉरिटी ने बिठाई जांच, जानिए क्या था पूरा मामला...

धमतरी. सेंट्रल जू अथॉरिटी ने हरिभूमि की खबर का उल्लेख करते हुए धमतरी में चल रहे अवैध जू पर जाँच बिठाई है. inh न्यूज़ चैनल ने भी इस मामले में प्रमुखता से खबर प्रसारित की थी. धमतरी के रतावा में हंसराज देव नामक व्यक्ति प्राइवेट चिड़ियाघर संचालित करता है. मुखबिर की सूचना पर बीते दिनों ने वन विभाग की टीम ने छापामार कार्रवाई भी की थी. हरिभूमि में खबर छपते ही बात सेंट्रल जू अथॉरिटी तक पहुँच चुकी है. सेंट्रल जू अथॉरिटी ने बाकायदा हरिभूमि में छपे खबर का उल्लेख करते हुए मामले पर जाँच बिठा दी है.

बता दें कि बीते दिनों धमरी जिले के एक गांव में आज एक मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की टीम ने छापा मारकर ग्रामीण के घर से कई जंगली जानवरों को बरामद किया था. जिनमें हिरण के दो बच्चे, कोटरी, दो सियार, दो अजगर और छह तोते शामिल थे. इस शख्स ने इन जानवरों को पिंजरे में रखा हुआ था. बता दें वन विभाग की टीम ने धमरी जिले के रतावा गांव में छापेमारी की थी. टीम के द्वारा पूछताछ करने पर हंसराज देव ने बताया था कि वह प्राइवेट चिड़ियाघर संचालित करता है. इस दौरान ग्रामीण ने पशुओं की बिमारी के इलाज की बात कही और उसने टीम को वन्य जीव संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा समिति ग्राम रतावा के नाम से संचालित चिड़ियाघर के दस्तावेज भी दिखाए थे.

आपको बता दें कि वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत अगर कोई भी शख्स किसी भी वन्य प्राणी को कैद में रखता है. या फिर किसी वन्य प्राणी को मार देता है तो उस शख्स को दो से सात साल की सजा हो सकती है. चीता, भालू, शेर, हिरण, कोटरी और सांप को वाइल्ड लाइफ एक्ट 1991 के अनुसार शेड्यूल-1 में रखा गया है. इन वन्य प्राणियों को कई संस्था या व्यक्ति कैद करके नहीं रख सकता. अगर को ऐसा करता हुए पाया जाता है तो उसे डायरेक्ट गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कोर्ट में केस दाखिल करने का नियम है. प्राइवेट व्यक्ति या संस्था निजी चिड़ियाघर नहीं बना सकता वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कोई भी निजी व्यक्ति या संस्था प्राइवेट (निजी) चिड़ियाघर नहीं बना सकता है. चिड़ियाघर खोलने के लिए राज्य सरकारों को भी सेंट्रल जू अथॉरिटी से चिड़ियाघर खोलने की इजाजत लेनी होती है. लेकिन सेंट्रल जू अथॉरिटी के कुछ नियम होते हैं, जब राज्य सरकार उन नियम को पूरा कर लेती हैं तभी उन्हें चिड़ियघर खोलने की अनुमति मिलती है.

साथ ही बता दें कि 'बगैर रजिस्ट्रेशन पेट शॉप की आड़ में संचालित हो रहे मिनी जू' शीर्षक से खबर प्रकाशित होते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया था. मुख्य वन संरक्षक अधिकारी ने खबर को गंभीरता से लेते हुए मामले में जाँच टीम गठन के आदेश जारी कर दिए हैं. जाँच टीम में नंदनवन चिड़ियाघर में पदस्थ परिक्षेत्र अधिकारी राम मूर्ति बघेल, वनपाल मकसूद हुसैन और वनरक्षक गिरीश कुमार रजक को शामिल किया गया है. मुख्य वन संरक्षक अधिकारी ने जाँच टीम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि खबर में छपे स्थलों पर पहुंचकर प्रभावी कार्रवाई की जाये.

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