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अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस: जानें कौन है छत्तीसगढ़ की सुनीता ठाकुर, आदिवासियों के लिए करती है हर दिन संघर्ष

साहस और मन में लोगो के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव कुछ ऐसी ही कहानी है सुनीता ठाकुर की। जिसके लिए वह हर रोज मौत का सामना करने से भी गुरैज नहीं करती।

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस: जानें कौन है छत्तीसगढ़ की सुनीता ठाकुर, आदिवासियों के लिए करती है हर दिन संघर्ष

आज पूरे देश में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ की ऐसी एक नर्स सुनीता ठाकुर की, जो आदिवासियों के लिए हर दिन संघर्ष करती हैं।

साहस और मन में लोगो के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव कुछ ऐसी ही कहानी है सुनीता ठाकुर की। जिसके लिए वह हर रोज मौत का सामना करने से भी गुरैज नहीं करती। आप जानकर हैरान होंगे कि कैसे एक लड़की अकेले अपनी जान केवल इसलिए खतरे में डालती है ताकि वह सूदूर जंगल में रह रहे लोगों को स्वास्थ्य सेवाए प्रदान कर सके।

सुनीता ठाकुर पेशे से ANM(सहायक नर्स मिडवाइफ) पिछले 7 सालों से हर रोज खतरनाक मगरमच्छों से घिरी इंद्रावती नदी को पर करती हैं। इस नदी को पार करने के लिए वह एक अस्थायी नाव का इस्तेमाल करती है।
आपको बता दें कि सुनीता हर रोज अपनी जान खतरे में इसलिए डालती है कि वह दंतेवाड़ा के आंतरिक इलाकों में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुवीधा दे सके। इसके लिए सुनीता को हर रोज इस खतरनाक नदी को पार करके जाना होता है।
सुनीता की परेशानी केवल यहां ही खत्म नही होती नदी पार करने के बाद सुनीता को सुनसान जंगल की 8 से 10 किलोमीटर की दूरी अपने पैरों से तय करनी होती है। तब जाकर के वह गांव तक पहुंच पाती हैं।
सुनीता यह निस्वार्थ सेवा पिछले 7 सालों से लगातार कर रही है। सुनीता का कहना है कि वह यर खतरा इसलिए उठाती है कि क्योंकि वह अपने काम के प्रति दृढ़ हैं।
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