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दिलचस्प खबर : छत्तीसगढ़ के इस जिले में बनने जा रहा है मगरमच्छ देवता का मंदिर, रोज होगी पूजा, जानिए आखिर क्या है पूरा मामला...

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में मौजूद बाबा मोहतरा गांव के निवासी मगरमच्छ ''गंगाराम'' की मौत से दुखी हैं. गंगाराम ग्रामीणों का तकरीबन सौ वर्ष से ''मित्र'' था. मित्र ऐसा कि बच्चे भी तालाब में उसके करीब तैर लेते थे. बाबा मोहतरा गांव के ग्रामीण बताते हैं कि गांव के तालाब में पिछले लगभग सौ वर्ष से मगरमच्छ निवास कर रहा था.

दिलचस्प खबर : छत्तीसगढ़ के इस जिले में बनने जा रहा है मगरमच्छ देवता का मंदिर, रोज होगी पूजा, जानिए आखिर क्या है पूरा मामला...
रायपुर. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में मौजूद बाबा मोहतरा गांव के निवासी मगरमच्छ 'गंगाराम' की मौत से बेहद दुखी हैं. गंगाराम ग्रामीणों का तकरीबन सौ वर्ष से 'मित्र' था. मित्र ऐसा कि बच्चे भी तालाब में उसके करीब तैर लेते थे. बाबा मोहतरा गांव के ग्रामीण बताते हैं कि तालाब में पिछले लगभग सौ वर्ष से मगरमच्छ निवास कर रहा था. विगत 9 जनवरी को ग्रामीणों ने मगरमच्छ को तालाब में अचेत देखा तब उसे बाहर निकाला गया. बाहर निकालने के दौरान जानकारी मिली कि मगरमच्छ की मृत्यु हो गई है. बाद में इसकी सूचना वन विभाग को दी गई.
ग्रामीणों का मगरमच्छ से गहरा लगाव हो गया था. मगरमच्छ ने दो तीन बार करीब के अन्य गांव में जाने की कोशिश की थी लेकिन हर बार उसे वापस लाया जाता था. यह गहरा लगाव का ही असर है कि गंगाराम की मौत के दिन गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला.
लगभग 500 ग्रामीण मगरमच्छ की शव यात्रा में शामिल हुए थे और पूरे सम्मान के साथ उसे तालाब के किनारे दफनाया गया. सरपंच ने बताया कि ग्रामीण गंगाराम का स्मारक बनाने की तैयारी कर रहे हैं और जल्द ही एक मंदिर बनाया जाएगा जहां लोग पूजा कर सकें.
गांव के लोग बताते हैं कि गंगाराम बहुत ही शांत स्वभाव का था. उसके आसपास ही गांव के बच्चे नहाते रहते थे, पर कभी किसी पर हमला नहीं किया. कहा जाता है कि लोगों को सामने आता देख गंगाराम रास्ता बदल लेता था. इतना ही नहीं गांव के लोगों की माने तो गंगाराम दाल भात भी खाता था। गंगाराम पर कई शार्ट फिल्म और डाक्यूमेंट्री भी बन चुकी है.
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