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छत्तीसगढ़/ थानों में बेहिसाब जेवरात, सरकार को नहीं पता वर्तमान कीमत

राजधानी रायपुर सहित जिले के सभी 32 थाना क्षेत्रों में कितने सोने-चांदी के जेवरात हैं, इसकी सही-सही जानकारी पुलिस को भी नहीं है। थानों के मालखानों में जब्त जेवरों की वर्तमान कीमत क्या है, इसकी जानकारी थानों के टीआई को भी नहीं है।

छत्तीसगढ़/ थानों में बेहिसाब जेवरात, सरकार को नहीं पता वर्तमान कीमत
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राजधानी रायपुर सहित जिले के सभी 32 थाना क्षेत्रों में कितने सोने-चांदी के जेवरात हैं, इसकी सही-सही जानकारी पुलिस को भी नहीं है। थानों के मालखानों में जब्त जेवरों की वर्तमान कीमत क्या है, इसकी जानकारी थानों के टीआई को भी नहीं है। कोतवाली थाना इलाके में 20 साल पुराने मामलों के जेवर मालखाने में जब्त हैं। अनुमान के मुताबिक जिले के सभी 32 थानों के मालखानों में तीन करोड़ रुपए से ज्यादा सोने-चांदी के जेवर हैं।

पुलिस अफसरों की मानें, तो जिन मामलों का निराकरण नहीं हुआ, ऐसे मामलों के जेवर थानों के मालखाने में जब्त हैं। इसके साथ कई ऐसे मामले हैं, जिनमें प्रार्थी अब तक जेवर लेने नहीं पहुंचे। इस वजह से थानों के मालखानों में सोने-चांदी के जेवरों को सुरक्षित रखा गया है। थानों के टीआई जब्त सोने-चांदी के जेवर की कीमत का वर्तमान वैल्यूएशन बता पाने में असमर्थ दिखे। अधिकतर थानों के टीआई जेवरों का पुराने वैल्यूएशन भी नहीं बता पाए।
ऐसे निकालते हैं वैल्यूएशन
चोरी या अन्य अपराधों में जब्त जेवरों की कीमत पुलिस जेवर जब खरीदे गए होते हैं, उस समय की कीमत कोड करती है। जेवर अगर 20 साल पुराना है, तो पुलिस उस समय जेवर का जो रेट होगा, उस लिहाज से जेवर की कीमत कोड करती है। उदाहरण के लिए 10 वर्ष पूर्व 10 ग्राम सोने की कीमत 20 हजार रुपए होगी, तो पुलिस वर्तमान में 10 ग्राम सोने की कीमत 40 हजार रुपए होगी, तब भी पुलिस उस सोने के जेवर की कीमत 20 हजार रुपए कोड करेगी।
तीन थाना मालदार
जिले के सबसे ज्यादा रईस थानों में कोतवाली, सिविल लाइंस और कोतवाली थाना क्षेत्र की गिनती होती है। इनमें भी सबसे ज्यादा रईस थाना कोतवाली थाना क्षेत्र है। इस थाने में 50 लाख रुपए से ज्यादा के सोने-चांदी के जेवर जब्त हैं। इसी तरह सिविल लाइंस थाने में लगभग 35 लाख और तेलीबांधा थाने के मालखाने में 20 लाख रुपए से ज्यादा के जेवर जब्त हैं।
देखरेख की जिम्मेदारी मोहर्रिर की
जब्त जेवर सहित नकदी और अन्य समान को हिसाब से रखने की जिम्मेदारी थाना के मोहर्रिर की होती है। मोहर्रिर थाना पहुंचने पर जब्त समान की सूची मिलान करने के साथ जब्त सामान सही हालत में है या नहीं, इसी जानकारी रखता है। अगर कहीं कुछ गड़बड़ी हो जाए, तो इसका जिम्मेदार मोहर्रिर को माना जाएगा। थाने के एक मुंशी के मुताबिक मालखाने में कैद जेवर और नकदी को सुरक्षित रखने की चिंता में कई बार वे रात को थाने आकर मालखाना में रखे समान को चेक करते हैं।
कीमत बता पाना मुश्किल
मालखाने में वे ही जेवर हैं, जिनका मामला कोर्ट में चल रहा है। इसके साथ उन दावेदारों के जेवर हैं, जिन्होंने अब तक जेवर लेने कोर्ट में दावा-अपत्ति पेश नहीं किया है। जब्त जेवर की वर्तमान कीमत बता पाना मुश्किल है।
- प्रफुल्ल ठाकुर, एएसपी सिटी

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