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स्वरोजगार के लिए सरकार ने दिया सहारा 34 दिव्यांगजन ने खोला ‘अपना बिजनेस’

कुदरत ने इनको दिव्यांग बनाकर संघर्ष करने मजबूर कर दिया था लेकिन शासन की दिव्यांगजन ऋण वितरण योजना इन दिव्यांगों की जिंदगी में ऐसी आशा और उम्मीदों की रौशनी लेकर आई कि आज 34 परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन गए हैं

स्वरोजगार के लिए सरकार ने दिया सहारा 34 दिव्यांगजन ने खोला ‘अपना बिजनेस’

कुदरत ने इनको दिव्यांग बनाकर संघर्ष करने मजबूर कर दिया था लेकिन शासन की दिव्यांगजन ऋण वितरण योजना इन दिव्यांगों की जिंदगी में ऐसी आशा और उम्मीदों की रौशनी लेकर आई कि आज 34 परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन गए हैं। आसान किश्तों में 10 साल तक ऋण चुकाने की मोहलत वाली इस योजना के बूते कई दिव्यांगजन परिवार इतने आत्मनिर्भर बन गए हैं कि इन्होंने अपने व्यवसाय का दायरा बढ़ा डाला।

दिव्यांगों की जिंदगी में खुशहाली लाने के लिए शासन कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इन्हीं योजनाओं में से एक है दिव्यांगजन ऋण योजना। दिव्यांगों को आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराते हुए रोजगार-स्वरोजगार स्थापित करने शासन पिछले 5 सालों से इस योजना का संचालन कर रही है।
जिसके तहत 18 से 60 वर्ष तक के दिव्यांगों को बेहद कम ब्याज दर पर 50 हजार से 5 लाख रुपए तक का ऋण स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्रदान किया जा रहा है। खास बात यह है कि उक्त योजना में दिव्यांगों को लिए गए ऋण को बेहद आसान किस्तों में अदायगी करने का प्रावधान है। शासन शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए भी दिव्यांगों को ऋण प्रदान कर रही है। इसकी सीमा 10 लाख रुपए तक की है।

अब जीवनसाथी का भी मिलेगा साथ

दिव्यांगजन ऋण वितरण योजना दिव्यांग राकेश अग्रवाल की जिंदगी में भी रौशनी बिखेरी है। सकदुकला निवासी 28 वर्षीय अविवाहित राकेश के लिए परिजनों ने रिश्ता तय कर लिया है लेकिन रोजगार की चिंता राकेश को खाए जा रही थी। लेकिन दिव्यांगजन ऋण वितरण योजना के तहत 95 हजार का ऋण लेकर किराना दुकान का संचालन कर आज राकेश आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर बन चुका है। राकेश को इस बात की बड़ी खुशी है कि इस योजना से वह अपने परिवार की आजीविका बेफिक्र चला सकेगा।

3 साल में फोटोकाॅपी की दूसरी दुकान भी खोल दी

दर्री निवासी दिव्यांग सहोरिक लाल की जिंदगी में भी दिव्यांगजन ऋण वितरण योजना ने आशा की नई किरण बिखेरी है। निर्धनता एवं बच्चों को बेहतर परवरिश देने की चिंता में डूबे सहोरिक लाल को योजना के तहत 2 लाख 70 हजार रुपए का ऋण फोटोकॉपियर्स एवं स्टेशनरी दुकान स्थापित करने के लिए मिला है। अपनी मेहनत से बच्चों के सहारे सहोरिक लाल ने दुकान का बेहतर संचालन कर 3 साल में ही एक और फोटोकॉपी दुकान स्थापित कर लिया है। वे इस योजना को दिव्यांगों के लिए कल्याणकारी मानते हैं।

जिले के 34 दिव्यांगों की बदल गई जिंदगी

दिव्यांगजन ऋण प्रदाय योजना ने जिले के 34 दिव्यांगों के चेहरे पर अब तक मुस्कान बिखेरी है। जिन्होंने स्वरोजगार के लिए 41 लाख 24 हजार 950 रुपए का ऋण लेकर अपना स्वरोजगार स्थापित कर लिया है। इनमें शहरी क्षेत्र के अलावा वनांचल क्षेत्र फतेहगंज, सकदुकला, गोड़मा, कनकी आदि क्षेत्र के दिव्यांग शामिल हैं।

2-3 साल में अपना व्यवसाय बढ़ा लिया

दिव्यांगों ने किराना दुकान, कपड़ा दुकान, इलेक्ट्रानिक्स दुकान, वीडियोग्राफी, आटो, कार एसेसरीज, लिफ्ट मशीन, इंटरनेट कैफे, फोटोकॉपियर्स एवं स्टेशनरी की दुकान स्थापित कर आर्थिक आजादी पा ली है। कई दिव्यांग ऐसे हैं जिन्होंने ऋण मिलने के बाद दुकान का बेहतर संचालन कर 2-3 साल में ही अपने व्यवसाय का विस्तार कर लिया है।
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