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पेंशन को तरसे पूर्व विधायक, भोजराज बोले- भारी दिक्कत, राजवाड़े भी परेशान

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार को बने सात महीने होने को हैं, लेकिन पूर्व हुए ​विधायकों को अब तक पेंशन नहीं मिली। विधायक रहे ज्यादातर नेता सक्षम हैं, पर कुछ ऐसे हैं जो पेंशन की बाट जोह रहे हैं।

पेंशन को तरसे पूर्व विधायक, भोजराज बोले- भारी दिक्कत, राजवाड़े भी परेशान

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार को बने सात महीने होने को हैं, लेकिन पूर्व हुए ​विधायकों को अब तक पेंशन नहीं मिली। विधायक रहे ज्यादातर नेता सक्षम हैं, पर कुछ ऐसे हैं जो पेंशन की बाट जोह रहे हैं। उनका ज्यादातर खर्च पेंशन से ही पूरा होता है। वे कह रहे हैं कि उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, विधानसभा सचिव ने कहा है कि प्रक्रिया पूरी करने में वक्त लगा। संभव है अगले महीने से पेंशन मिलने लगे।

अंतागढ़ के पर्वू विधायक भोजराज नाग ने हरिभूमि से अपनी दिक्कतें साझा कीं। बोले- विधायक थे तो अपने भी खर्चे बढ़े और लोगों की उम्मीदें भी। भले ही अब विधायक नहीं रहे हैं, पर लोग अब भी उम्मीद करते हैं और रुटीन में जो खर्चे थे वे हैं ही। अचानक सब बंद होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। आने जाने में भी परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि विधायक सुविधा केंद्र में फार्म भरकर काफी पहले दे दिए थे पर अब तक पेंशन शुरू नहीं हो पाई है श्री नाग को उम्मीद है कि पेंशन जल्द रिलीज होगी और उन्हें राहत मिल सकेगी।

पूर्व हुए ​विधायकों में ज्यादातर भाजपा के ही हैं। सुर्खियों में रहने वाले पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने कहा कि विधायक सुविधा केंद्र में सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सात माह का वक्त हो गया। अब तक पेंशन का ओदश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पहले की सरकारों को भी हमने देखा पर ऐसी दुर्दशा पहले नहीं देखी। उन्होंने कहा कि आदेश मिलेगा तभी पता चलेगा कि पेंशन किस बैंक से मिलेगी। अब तक कोई ठिकाना तक नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, हर किसी को धनकुबेर समझना नहीं चाहिए। बहुत से ऐसे पूर्व विधायक हैं जिन्हें पेंशन की बेहद जरूरत है। इस बात को समझने की जरूरत है।

पूर्व महिला विधायक बताती है। कि प्रक्रिया पूरी करने में भी कुछ वक्त लगा था लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी पेशंन अटक गई। संपर्क करने पर बताया गया है कि जल्द दी जाएगी। अब तक यह भी नहीं पता कि किस बैंक से मिलने वाली है। सारंगढ़ की पूर्व विधायक केराबाई मनहर बताती हैं कि विधानसभा से सही जानकारी नहीं मिलने के कारण पुस्तकालय के ड्यूस और अन्य कूपन वगैरह जमा नहीं करा पाए थे। विधासभा में पिछले माह ही सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद एनओसी मिली है। लेकिन पेंशन जारी नहीं की गई है।

ऐसी ही पेरशानी से मानपुर मोहला की पूर्व विधायक तेज कुंवर नेताम की जूझ रही हैं। कुछ पूर्व विधायकों ने नाम न प्र​काशित करने के आग्रह के साथ कहा कि पेंशन कम से कम बुनियादी जरूरतों को पूरा करेगी। उसका इंतजार तो है ही।

सचिव कर रहे हैं मेहनत

विधानसभा ​सचिव चंद्रशेखर गंगराड़े ने बताया कि सभी विधायकों के पेंशन प्रकरण बनकर एजी कार्यालय को भेजा जा चुका है। वहां से देरी के कारण अब तक पूर्व विधायकों को पेंशन मिलना शुरू नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि इस महीने से प्रकरण तैयार कर ट्रेजरी को भेजे जाने की संभावना है। श्री गंगराड़े ने कहा कि वे इसे लेकर बेहद संवेदनशील हैं। जल्द इस समस्या का निराकरण हो जाएगा ऐसी उम्मीद है।

20 हजार मिलती है पेंशन

ऐसे व्यक्ति जिन्होंने विधानसभा में पांच साल की कालवधि तक छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य के रूप में कार्य किया है उन्हें 20 हजार रुपए प्रतिमहा पेंशन दी जाती है। पेंशन प्रकरण की स्वीकृति के लिए विधानसभा की और से महालेखाकार कार्यालय को इसकी जानकारी भेजी जाती है। विधायकों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर महालेखाकर कार्यालय के द्वारा पेंशन प्रकरण आदेश जारी किया जाता है। इसे ट्रेजरी को भेजा जाता है जहां से विधायकों द्वारा दिए गए ​बैंक एकाउंट में पेंशन की राशि जमा की जाती है।

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