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राजस्व विभाग की लापरवाही से मुआवजे के लिए भटक रहे किसान

बडगांव क्षेत्र में हुई 132 केव्ही बिजली विस्तार कार्य क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए परेशानियों का सबब बनते जा रहा है। दरअसल बिजली विस्तार के दौरान ग्राम पंचयात कोंडे निवासी हरीश चन्द्र के निजी भूमि रकवा नंबर 1,91 और खसरा नंबर एस/1 में 15 पेड़ो की कटाई की गई थी।

राजस्व विभाग की लापरवाही से मुआवजे के लिए भटक रहे किसान

बडगांव क्षेत्र में हुई 132 केव्ही बिजली विस्तार कार्य क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए परेशानियों का सबब बनते जा रहा है। दरअसल बिजली विस्तार के दौरान ग्राम पंचयात कोंडे निवासी हरीश चन्द्र के निजी भूमि रकवा नंबर 1,91 और खसरा नंबर एस/1 में 15 पेड़ो की कटाई की गई थी। इसमें किसान हरीश चन्द्र को नियमानुसार मिलने वाली मुवावजा दिया जाना था। साल बीतने के वावजूद भी किसान मुआवजा पाने के लिए कार्यालय का चक्कर काटने को मजबूर है।

किसान को मुआवजा देने के वजाय सम्बंधित अधिकारी आवेदन पर आवेदन मांग रहे है। इस से विभागीय अधिकारी व प्रशासन से किसान का भोरासा उठते जा रहा है। राजस्व विभाग के लापरवाही दरअसल तीन महिना बीतने के बावजूद भी किसान हरिशचंद्र को मुआवजा नहीं मिला तो किसान ने दोबारा सम्बंधित अधिकारी को मामला से अवगत कराया तो खुलासा हुआ की हरिशचंद्र को मिलने वाला मुवाबजा गाँव के ही दूसरा किसिस किसान के नाम से 98 हज़ार रूपया का चेक के माध्यम से भुगतान हो चूका है। जबकि उक्त भुगतान हरिशचंद्र को दिए जाना था।

इसके बाद दुर्गकोंदल नायब तहसीलदार गेंद लाल साहू द्वारा मामला का जाँच करते हुए गलती से अन्य ग्रामीण के नाम से जरी मुवाबजा की राशी पर अहरण से रोक लगाने के लिए स्टेट बैंक दुर्गकोंदल के शाखा प्रबंधक को पत्र जरी कर स्टे लगा दिया था और मुवाबजा के वास्तविक हक़ दार किसान हरिशचंद्र को जल्द ही मुआवजा दिलाने का अश्वासन दिया गया था ! साल बीतने के वावजूद किसान को मुवाबजा अभी तक नहीं मिल सका!

वही इस पुरे मामला में मौके पर पहुचे पटवारी की भूमिका भी संदेहस्पद बनी हुई है। मौके पर पहुचे पटवारी ने गलत मुयायना कर सम्बंधित विभाग को रिपोर्ट सौपा,जिस अधर पर किसान को मुवाबजा दिया गया जो की वही मुआवजा हरिशचंद्र को मिलना चाहिए था।

मुआवजा के लिए दर-दर भटक रहे किसान का कहना है की मुवाबजे के लिए करीबन साल भर से कार्यलय का चक्कर काट रहा हु परन्तु सम्बंधित अधिकारी इस मामला को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। दुर्गकोंदल के तहसीलदार चत्तिरंजन दास के तबादले के बाद तत्कालीन तहसीलदार प्रियंका देवांगन के समक्ष मामला को भी रखा पर निराकरण के लिए पहल नहीं की गई है।

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