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Exclusive Interview : मोतीलाल वोरा बोले- लोग जुमलों से तंग, हम जीतेंगे सभी 11 सीटें

मोतीलाल वोरा। एक ऐसे शख़्स जो 90 साल की उम्र में भी अपनी सियासी ऊर्जा से लोगों को चकित करते हैं। जिनमें अनुभव की गूढ़ता होने के साथ साथ अपनी स्मृतियों को उस दिशा में सार्थकता देने की शक्ति है,जहां उसकी जरूरत है। मोतीलाल वोरा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे। वे कांग्रेस के ऐसे सिपाही हैं, जिन्होंने इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी, नरसिंहराव, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और अब राहुल गांधी के साथ खड़े दिखाई देते हैं उतनी ही मजबूती के साथ। आज सार्थक संवाद में वे संवाद करेंगे।

Exclusive Interview : मोतीलाल वोरा बोले- लोग जुमलों से तंग, हम जीतेंगे सभी 11 सीटें

डॉ. हिमांशु द्विवेदी

मोतीलाल वोरा। एक ऐसे शख़्स जो 90 साल की उम्र में भी अपनी सियासी ऊर्जा से लोगों को चकित करते हैं। जिनमें अनुभव की गूढ़ता होने के साथ साथ अपनी स्मृतियों को उस दिशा में सार्थकता देने की शक्ति है,जहां उसकी जरूरत है। मोतीलाल वोरा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे। वे कांग्रेस के ऐसे सिपाही हैं, जिन्होंने इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी, नरसिंहराव, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और अब राहुल गांधी के साथ खड़े दिखाई देते हैं उतनी ही मजबूती के साथ। आज सार्थक संवाद में वे संवाद करेंगे।

प्रश्न: आपने नेहरू जी का ज़माना देखा। उसके बाद इंदिरा, राजीव से लेकर सोनिया राहुल तक का कांग्रेस के सफ़र में सहभागी रहे। क्या बदलाव नज़र आता है?

मोतीलाल वोरा: इंदिरा जी का कार्यकाल चुनौतियों से भरा था। वे इनका सहजता से सामना करती थीं। पांचवीं लोकसभा में उन्होंने गरीबी हटाओ का नारा दिया और उसके लिए 20 सूत्रीय कार्यक्रम तैयार किया। बैंकों के दरवाजे गरीबों के लिए खोल दिए गए, ताकि वे रोजगार पा सकें। उनके साहस, बुद्धिमत्ता, निर्भिकता के कारण भारत ने गरीबी के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी। जब मैं उनसे 1984 मंे मिलने गया, तो मुझे 8.07 बजे रात का समय दिया गया था। तब वे कश्मीर के प्रतिनिधिमंडल के साथ थीं। मुझे कहा कि संगठन मजबूत करना है। शासन और संगठन दोनों में तालमेल जरूरी है, राजीव से मिलो। मैं रात 1.30 बजे राजीव गांधी जी से मिलने गया। उन्होंने मुझे कहा कि इंदिरा जी चाहती हैं कि आप मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनें, लेकिन इसके लिए आपको मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। मैं सहर्ष तैयार हो गया। उस दौर में श्यामाचरण शुक्ल, विद्याचरण शुक्ल, अर्जुन सिंह, माधवराव सिंधिया जैसे दिग्गज नेता थे।

प्रश्न: आज राहुल कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं, जब कांग्रेस अपने सबसे खराब दौर में है। क्या राहुल कांग्रेस को उबार पाएंगे?

मोतीलाल वोरा: मेरा मानना है कि राहुल गांधी में बहुत क्षमता है। इंदिरा जी के गरीबी हटाओ के नारे को राहुल गांधी ने बहुत बारिकी से समझा है। हर गरीब के खाते में 72 हजार सालाना की बात जब आई, तब लोगों ने अनाप शनाप कहा, लेकिन उन्होंने कई अर्थशास्त्रियों से मिलकर यह बात अपने घोषणा पत्र में रखी। और प्रियंका गांधी ने ने इसे न्याय शब्द दिया। 2018 में चिदंबरम जी की अध्यक्षता में घोषणा पत्र समिति का गठन कियागया था और इन्होंने बंद कमरे में बैठकर इसे तैयार नहीं किया है, बल्कि घूमघूमकर लोगों की जरूरत के मुताबिकबनाया है। मैं जब अपने क्षेत्र दुर्ग, वैशाली नगर विधानसभा में जाता हूं, तो इसका असर दिखता है।

प्रश्न: आप कह रहे हैं कि घोषणा पत्र जबरदस्त है, लेकिन मोदी लहर की चुनौती का सामना कैसे करेंगे?

मोतीलाल वोरा: मैंने मोदी जी का संकल्प पत्र देखा। 100 से अधिक बातें हैं, पर लोगों पर उनका असर नहीं। 2014 में भी उन्होंने कई वादे किए थे। लोगों के खातों में 15 लाख आने की बात कही थी, हर साल दो करोड़ रोजगार की बात कही थी, कालेधन को लाने की बात कही थी। मैं गांव गांव जाता हूं तो पूछता हूं कि खातों में 15 लाख आए, तो लोग नहीं कहते हैं। लोग जुमलों से तंग आ गए हैं। कांग्रेस ने कहा है कि वह सत्ता में आएगी तो किसानों का अलग बजट होगा, बिजली, पानी, उर्वरक की अलग व्यवस्था होगी। राहुल जी ने मोदी जी से किसानों की कर्जमाफी की बात कही थी, तो मोदी जी ने कहा कि उनके बस में नहीं, चाहें तो र ाज्य सरकारें करें। छत्तीसगढ़ में सरकार बनते ही राज्य ने किया।

इतना ही नहीं, 2500 में धान खरीदी, बिजली बिल हाफ किया। आदिवासियों की जमीन वापस की लोहंडीगुड़ा में। आदिवासी बेहद खुश थे। राजीव जी के समय में आरक्षण बिल राज्यसभा में कांग्रेस ने पास किया, लोकसभा में भाजपा ने लटकाया। तो इनकी कथनी-करनी में बहुत अंतर है।

प्रश्न: नरेंद्र मोदी और भाजपा ने राष्ट्रवाद को प्रमुख मुद्दा बनाया है। इस लहर से कांग्रेस कैसे निपटेगी?

मोतीलाल वोरा: दुनिया के तमाम देशों में हिन्दुस्तान का मतदाता बेहद होशियार है। कहते थे कि कश्मीर में सरकार आएगी तो 370 और 35 ए हटाएंगे। पीडीपी के साथ सरकार तो बनाई, पर इन्हें नहीं हटाया। महाराजा हरिसिंह के साथ विलय के समय जो समझौता हुआ था, वह इतना आसान नहीं। सवाल ये है कि कश्मीर में ये हालात बने क्यों? क्यों आतंकवाद बढ़ रहा है भाजपा के समय। सेना के अफसरों ने कहा कि सेना का श्रेय लेना ठीक नहीं, राजनीतिक इस्तेमाल के लिए। जनता इन बातों को समझ गई है।

प्रश्न: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के चार महीनों की सरकार के कामकाज के तरीकों को कैसे देखते हैं?

मोतीलाल वोरा: पिछले 15 सालों तक भाजपा की सरकार थी। यानी तकरीबन 180 महीने, उसके मुकाबले 40 दिन की सरकार बेहतर है। शपथ लेने के साथ ही किसानों का कर्ज माफ किया। किसानों का विश्वास जीता। यह उस दृषि्ट को दर्शाता है।

प्रश्न: सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि शराबबंदी की बात कही थी, बेरोजगारी भत्ते की बात कही थी? पर नहीं की।

मोतीलाल वोरा: मैंने कहा कि 180 महीने की सरकार और 40 दिन की सरकार की तुलना कर रहे हैं। शराब से सरकार की बड़ी आय होती है। एकदम से बंद नहीं किया जा सकता, लेकिन बंद जरूर किया जाएगा। कांग्रेस जो कहती है, वो करती है। जो कहा सो किया।

प्रश्न: भाजपा पिछले तीन चुनावों में 10-1 से जीतते आ रही है। इस बार उन्होंने चेहरे बदल दिए, सारे सांसदों के टिकट काट दिए। कैसे देखते हैं?

मोतीलाल वोरा: भाजपा ने सांसदों का टिकट काटा और नए चेहरों का सामने लाया, तो उससे उनकी पार्टी का असंतोष सामने आ गया। नए चेहरों को लाना ठीक है, लेकिन भाजपा सिरफुटव्वल से नहीं उबर पा रही है। बिना रमन सिंह की जानकारी के सारे नामों की घोषणा कर दी गई। हमनें सारे उम्मीदवारों को सोचसमझकर उतारा। दुर्ग से पहली बार प्रतिमा चंद्राकर, एक महिला उम्मीदवार को उतारा गया है। यहां धर्म जाति के आधार पर नहीं, मुद्दों के आधार पर चुनाव जीतेंगे।

प्रश्न: आप 90 वर्ष के हो गए हैं। आपकी प्रमुख प्रतिद्वंदी पार्टी ने 90 साल से ऊपर बताकर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और ऐसे तमाम वरिष्ठ नेताओं की टिकट काट दी। कैसा लगेगा संसद का दृश्य?

मोतीलाल वोरा: कांग्रेस युवाओं के साथ साथ बुजुर्गों का सम्मान करना जानती है। आडवाणी जी, मुरली मनोहर जोशी जी का दिल ही जानता होगा, जो उन पर बीत रही होगी। भाजपा वन मैन पार्टी है। मैंने जवाहर लाल जी को तो नहीं देखा, पर इंदिरा से लेकर राहुल तक का जमाना देखा है। सबका बहुत सम्मान है।

प्रश्न: छत्तीसगढ़ में आपको बहुत संयमित माना जाता है, फिर आपने डा. रमन सिंह के लिए ऐसा क्यों कहा कि अगर चौकीदार हैं, तो डॉ. अपने दामाद को क्यों नहीं देख पाए?

मोतीलाल वोरा: मैं डॉ. रमन सिंह से नाराज नहीं हूं। मोदी जी ने कहा कि मैं चौकीदार हूं, तो राजनाथ सिंह से लेकर डा. रमन सिंह तक ने खुद को चौकीदार लिख दिया। मैंने कुछ अलग संदर्भ में बात कही थी।

प्रश्न: 15 साल के डा. रमन सिंह के कार्यकाल को कैसा देखते हैं?

मोतीलाल वोरा: 15 साल का कार्यकाल भ्रष्टाचार का कार्यकाल था। मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी होती है सुशासन, लेकिन पता नहीं क्यों डा. रमन सिंह ने कुछ नहीं किया। कांग्रेस की सरकार आते ही इस पर लगाम लगाया गया है। कहते हैं न कि बोए पेड़ बबूल के तो आम कहां से पाए, तो रमन सिंह ने जो बोया था, वो ही काट रहे हैं।

प्रश्न: तो क्या भूपेश बघेल तो बबूल नहीं बो रहे हैं?

मोतीलाल वोरा: भूपेश बघेल को मैं बरसों से जानता हूं। जब उन्हें प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया था, तो उन्होंने बेहद संघर्ष किया। आंदोलन किए, लड़ाई लड़ी और पार्टी को इस मुकाम पर लाकर खड़ा किया। कांग्रेस के हाईकमान ने इसी कारण उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। मैं चकित रह जाता हूं उनकी सजगता देखकर। वे बेहद प्रतिबद्ध हैं। आने वाले कई सालों तक कांग्रेस को कोई नहीं हटा सकता।

प्रश्न: आने वाले कई सालों में अगर कांग्रेस रहेगी, तो भी मुख्यमंत्री बघेल ही होंगे?

मोतीलाल वोरा: भूपेश बघेल ने बहुत संघर्ष किया है। कांग्रेस के आलाकमान ने इसी कारण उन्हंे सीएम बनाया। और यह संदेश दिया कि जो भी जनता से जुड़कर जनता के लिए संघर्ष करेगा, हाईकमान उसे मौका देगा।

प्रश्न: छत्तीसगढ़ की 11 सीटों में कितनी सीटें जीतेंगे?

मोतीलाल वोरा: भाजपा का मनोबल गिर गया है। गिरे मनोबल से कोई चुनाव नहीं जीतता। कांग्रेस का मनोबल ऊंचा है क्योंिक हम जनता को काम बता पा रहे हैं। इसलिए उम्मीद है कि 11 की 11 सीटें जीतेंगे।

प्रश्न: जब रुझान 11 की 11 सीटें जीतने का है, तो मोतीलाल वोरा जैसे शख्स को दुर्ग में 10 -10 िदन सभाएं लेनी पड़ी रही है। क्यों?

मोतीलाल वोरा: हमारी जिम्मेदारी है और हम अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

प्रश्न: दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे हैं भोपाल से। पिछले कई सालों से वहां कांग्रेस नहीं जीती। कैसे देखते हैं?

मोतीलाल वोरा: मैंने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में, सांसद के रूप में देखा है। वे सरल हैं। साध्वी प्रज्ञा ने हेमंत करकरे को लेकर जिस तरह के बयान दिए और फिर अपने बयान को वापस लिया, भाजपा ने उनके बयान से जिस तरह किनारा किया, वे पहले ही धराशायी हो गईं हैं। दिग्विजय सिंह ने तो एक लाइन में कह दिया कि मुझे उनके बारे में कुछ नहीं कहना।

प्रश्न: क्या कांग्रेस अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल कर पाएगी, जो 44 सीटों तक सिमट गई थी?

मोतीलाल वोरा: 1984 में अविभाजित मध्यप्रदेश में 40 लोकसभा सीटें थीं और सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। मैं बैतूल में था बतौर अध्यक्ष। राजीव गांधी की सभा थी। वहां आदिवासियों से पूछा तो उन्होंने कहा कि इंदिरा मां को वोट देंगे। यह बात पूरे प्रदेश में फैली और पूरी सीटें कांग्रेस को मिली। इस बार भी कांग्रेस बहुत आगे जाएगी।

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