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उद्योगों के साथ विवाद भी शुरू, सीएम भूपेश से बातचीत की कोशिश

उद्योगों की सांस तो लौट रही, लेकिन अब तक राहत न मिलने से परेशानी। पढ़िए पूरी खबर-

उद्योगों के साथ विवाद भी शुरू, सीएम भूपेश से बातचीत की कोशिश
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रायपुर। प्रदेश के लघु, सूक्ष्म के साथ मिनी स्टील प्लांट में धीरे-धीरे काम होने लगा है। इस समय राजधानी रायपुर के साथ प्रदेश के दूसरे जिलों में लघु और सूक्ष्म उद्योग करीब 70 फीसदी शुरू हो गए हैं, लेकिन इनमें उत्पादन 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो पा रहा। इधर मिनी स्टील प्लांट में 25 फीसदी में आधा-अधूरा काम शुरू किया गया है। इन उद्योगों को प्रारंभ करने को लेकर बड़ा विवाद भी सामने आया है। यही वजह है कि अब तक पूरे उद्योग प्रारंभ नहीं हो सके। उद्योगों की सांस तो लौट रही है, लेकिन अब तक राहत न मिलने के कारण परेशानी हो रही है और उद्योगपति राहत की आस लगाए बैठे हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बात करने के लिए समय भी मांगा गया है।

लॉकडाउन के कारण सभी उद्योगों में तालाबंदी के बाद पहले चरण के लॉकडाउन के समाप्त होने से पहले प्रदेश सरकार ने उद्योगों को प्रारंभ कराने की दिशा में पहल करते हुए उद्योगों से 14 अप्रैल तक सहमति पत्र मांगा था। इसमें 40 फीसदी मजदूरों के साथ काम करने की शर्त पर मामला फंस गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ा दिया। इस दूसरे चरण के लॉकडाउन के बीच केंद्र और राज्य सरकार ने उद्योगों को प्रारंभ करने केे लिए कहा। ऐसे में 21 अप्रैल से ही सूक्ष्म और लघु उद्योग धीरे-धीरे खुलने शुरू हुए। वर्तमान में प्रदेश में करीब 70 फीसदी उद्योगों में कामकाज चलने लगा है, लेकिन इनके सामने सबसे बड़ी समस्या कच्चे माल की है, जिसके कारण कहीं 10 तो कहीं 20 और कहीं 50 फीसदी तक ही उत्पादन हो रहा है।

मिनी स्टील प्लांट में सबसे बड़ी परेशानी मजदूरों को लेकर सामने आ रही है। यहां पर 25 फीसदी रोलिंग और स्टील प्लांट में काम प्रारंभ हो गया है, लेकिन इन उद्योगों में काम करने वाले बिहार और उप्र के मजदूरों के वापस अपने प्रदेश लौट जाने के कारण मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। उद्योगों से जुड़े लोगों का कहना है, छत्तीसगढ़ के मजदूर उद्योगों में ज्यादा तापमान में काम नहीं कर पाते हैं, इनके दम पर उद्योग चलाना संभव नहीं है। लेकिन अब मजबूरी है तो इनको ही प्रशिक्षित करके काम चलाना पड़ेगा।

राहत का इंतजार

उद्योगों से जुड़े लोगों का कहना है, अब तक केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से किसी भी तरह का राहत पैकेज नहीं दिया गया है। प्रदेश सरकार अगर बिजली पर लगने वाला डिमांड शुल्क माफ कर दे तो उद्योगों को बहुत राहत हो जाएगी और ज्यादातर उद्योग अपना काम प्रारंभ करने में रुचि लेंगे, लेकिन अब तक सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं किया है। सरकार ने डिमांड शुल्क को तीन माह के लिए स्थगित किया है, इससे उद्योगों को कोई राहत मिलने वाली नहीं है।

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