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छत्तीसगढ़/ सरकार पर जमकर बरसे कौशिक, कहा- सरकार की कथनी और करनी में अंतर, शराबबंदी के नाम पर वादा खिलाफी

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि नई सरकार काे अस्तित्व में आए अभी कुछ ही दिन हुए हैं, सरकार की कथनी और करनी में अभी से अंतर दिखाई देने लगा है।

छत्तीसगढ़/ सरकार पर जमकर बरसे कौशिक, कहा- सरकार की कथनी और करनी में अंतर, शराबबंदी के नाम पर वादा खिलाफी

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि नई सरकार काे अस्तित्व में आए अभी कुछ ही दिन हुए हैं, सरकार की कथनी और करनी में अभी से अंतर दिखाई देने लगा है।

उन्होंने शराबबंदी को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि शराबबंदी के नाम पर महिलाओं ने खुलकर कांग्रेस को वोट दिया। सरकार बनने के बाद सबसे पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बयान आया कि शराबबंदी को लेकर कमेटी बनाई जाएगी। पूर्ण शराबबंदी का स्पष्ट उल्लेख किया गया था, लेकिन सरकार समिति बनाकर वादाखिलाफी कर रही है।

कौशिक ने कहा कि राज्य में शराब भाजपा की देन नहीं है। कांग्रेस ने पूर्ण शराबबंदी का वादा कर सत्ता पाई है, लेकिन सरकार बनने के बाद जारी आदेश में विदेशी मदिरा के नए ब्रांड के पंजीयन का आदेश जारी किया जा रहा है। एक तरफ पूर्ण शराबबंदी की बात होती है, दूसरी तरफ आदेश जारी होता है कि शराब के ब्रांड के लिए बाटलिंग कंपनियों से कोटेशन मांगे जा रहे हैं। भाजपा सरकार में जिस कोचिया प्रथा को हमने बंद किया, उसे एक बार फिर शुरू किए जाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा कि चिटफंड कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों के पैसे वापस दिलाने के लिए सख्त कदम उठाया। हमने उम्मीद की थी कि अनुपूरक बजट में निवेशकों के पैसों को लेकर प्रावधान होगा। राज्यपाल के अभिभाषण में ब्लूप्रिंट नजर आएगा कि राशि की वापसी को लेकर क्या नीति होगी, यह नजर नहीं आया। जनता के मन में अविश्वास की भावना बढ़ रही है। नक्सलवाद हमें मध्यप्रदेश से विरासत में मिला है। रमन सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने कारगर पहल की थी। बस्तर विकास के काम शुरू हुए। समस्या को खत्म करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास होने चाहिए।
किसानों को हर तरह के कर्ज से दिलाएं मुक्ति
कर्जमाफी को लेकर बहुत प्रचार किया गया, अब किसानों पर जो भी कर्ज है, उसका पूरा आकलन आना चाहिए। छत्तीसगढ़ के किसानों के हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलनी चाहिए। जांजगीर चांपा के ग्राम नवागढ़ केरा के पास अभी किसान धान खरीदी को लेकर चक्काजाम कर रहे हैं। धान खरीदी में कई तरह की दिक्कत है। हम पहले ही आगाह कर चुके हैं, किसान के साथ अन्याय न हो। किसानों की कई समस्याएं हैं, उन्हें सुविधा हो इसके लिए आसंदी से भी इसे लेकर निर्देश दिया जाए।
बिजली बिल हाफ की कोई नीति नहीं
बिजली बिल को लेकर अब तक कोई नीति नजर नहीं आ रही। घोषणापत्र में बिजली बिल आधा करने की घोषणा के बाद लोगों ने अपना बिजली बिल पटाना बंद कर दिया है। कहीं ऐसा न हो जाये कि इससे राज्य में अराजकता की स्थिति बन जाए। तत्काल स्थिति को स्पष्ट करने की जरूरत है। विकास के जो काम चल रहे हैं, पारदर्शिता से काम होना चाहिए। इस सरकार ने 5 से 20 लाख का जो ई टेंडर होता था, उसे बंद कर दिया। अब निविदा भरने का आदेश हो गया है। पहले जो समस्या आती थी, वह फिर आएगी। महत्वपूर्ण कामों पर सरकार का ध्यान नहीं है। ऑनलाइन निविदा बंद करने का मकसद भ्र्ष्टाचार को फिर शुरू करना है।
वारंटी के आवेदन पर एसआईटी जांच
देश में सबसे दुर्भाग्यजनक घटना झीरम कांड पर एसआईटी गठन का है। जिस अधिकारी के चाल चरित्र पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उसकी गिरफ्तारी की मांग की गई थी, आज वही अधिकारी प्रिय हो गए और जो अभियुक्त फरार है, उसके आवेदन पर एसआईटी का गठन कर दिया गया। आखिर सरकार कहां जा रही है। यूपीए की सरकार के समय झीरम कांड में जहां एनआईए की जांच शुरू हुई, उसमें अब एसआईटी बना रहे। जो न्यायालय में चल रहा, उस पर विश्वास नहीं रहा। ऐसे मामलों में न्यायालय और अपनी पार्टी के लोगों का तो सम्मान करें।
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