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''द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर'' पर विवाद शुरु, फिल्म बैन करने की मांग, विरोध की तैयारी

''द ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टिर'' को लेकर प्रदेश में भी विवाद शुरु हो गया है। एनएसयूआई ने प्रदेश में फिल्म को बैन करने की मांग की है।

'द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टिर' को लेकर प्रदेश में भी विवाद शुरु हो गया है। एनएसयूआई ने प्रदेश में फिल्म को बैन करने की मांग की है।
एनएसयूआई का कहना है कि इस फिल्म में कांग्रेस को गलत तरीके से दिखाया गया है। जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर छात्रनेता जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।
यह फिल्म प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की किताब पर आधारित है। कुछ दिनों पूर्व जारी हुए इसके ट्रेलर पर देशभर से मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कई जगहों पर इसे लेकर विरोध शुरू हो गया है।
यह फिल्म 11 जनवरी को रिलीज होने जा रही है। इससे पहले भी इमरजेंसी पर बनी फिल्म इंदु सरकार का प्रदेश में विरोध हुआ था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह फिल्म रिलीज की गई थी। इसके बाद भी स्क्रीन पर स्याही फेंकने और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं हुई थीं।
'द ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टिर' को प्रदेश में कितने स्क्रीन पर रिलीज किया जाएगा, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

गांधी परिवार पर निशाना
एनएसयूआई के जिला सचिव अरुणेश मिश्रा के अनुसार इस फिल्म के ट्रेलर से अभी तक जो तस्वीर साफ हुई है। उससे यह कहा जा सकता है कि इस फिल्म के निशाने पर सोनिया गांधी अथवा गांधी परिवार है। फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ऐसे दर्शाया गया है, जैसे उनके हर फैसले में सोनिया गांधी का हस्तक्षेप होता था।
गौरतलब है कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर आधारित संजय बारू की किताब के भी कई अंश विवादास्पद हैं, जिस पर अब भी मतभेद हैं। हालांकि किताब का व्यापक स्तर पर विरोध नहीं हुआ था। जनवरी में रिलीज होने वाली यह किताब लोकसभा के चुनावों पर भी प्रभाव डाल सकती है, इसलिए इस पर बैन की मांग की जा रही है।
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